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फर्जी इंश्योरेंस क्लेम प्रकरण : विद्यावती हॉस्पिटल के संचालक पर एक और एफआईआर की तैयारी
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गोरखपुर। फर्जी इंश्योरेंस प्रकरण की जांच अब कुशीनगर के एक सरकारी अस्पताल तक पहुंच गई है। जांच में सामने आया है कि डिसेंट अस्पताल की तरह खोराबार बाईपास स्थित विद्यावती हॉस्पिटल में भी कॉन्ट्रैक्चुअल बेस पर कुशीनगर के सरकारी अस्पताल में तैनात डॉक्टर के फर्जी हस्ताक्षर का इस्तेमाल कर बीमा क्लेम, आयुष्मान योजना समेत अन्य स्वास्थ्य योजनाओं के तहत फर्जी दावों को पास कराया जा रहा था। मामला संज्ञान में आने के बाद पुलिस डॉक्टर का बयान दर्ज कर संचालक के खिलाफ एक और एफआईआर दर्ज करने की तैयारी में है।
जांच में इस पूरे नेटवर्क की जड़ उरुवा बाजार के पचोहां गांव निवासी इंद्रेश यादव को बताया जा रहा है। वह वर्तमान में जेल में बंद है। आरोप है कि इंद्रेश ने बी-फार्मा की डिग्री के आधार पर पहले मेडिकल स्टोर खोला और बाद में उसने खुद को अस्पताल संचालक बताकर स्वास्थ्य योजनाओं के नाम पर बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा शुरू कर दिया था।
रामगढ़ताल थाना प्रभारी नितीन रघुनाथ श्रीवास्तव के मुताबिक, इंद्रेश यादव ने करीब ढाई साल पहले खोराबार बाईपास इलाके में विद्यावती हॉस्पिटल की शुरुआत की थी। इस अस्पताल को शुरू करने में कुशीनगर के एक सरकारी अस्पताल में कॉन्ट्रैक्चुअल आधार पर कार्यरत डॉ. नवाज आलम के नाम और एमबीबीएस डिग्री का सहारा लिया गया। शुरुआती दौर में अस्पताल सामान्य रूप से संचालित होता रहा लेकिन जनवरी 2025 से योजनाबद्ध तरीके से फर्जी क्लेम पास कराने का खेल शुरू किया गया।
इस दौरान बीमा और आयुष्मान योजना के तहत कई मरीजों के नाम पर क्लेम भेजे गए। पुलिस बीते आठ फरवरी को ही फर्जीवाड़े के मामले में उरुवा बाजार के पचोहां निवासी इंद्रेश यादव, शाहपुर थाना क्षेत्र के माेहनापुर सोनवा टोला निवासी अमन यादव उर्फ गौरव यादव और शाहपुर के सरस्वतीपुरम लेन नंबर तीन निवासी अभिषेक शर्मा उर्फ हनी शर्मा को गिरफ्तार कर चुकी है।
पुलिस ने जब डाॅक्टर नवाज से पूछताछ की तो उन्होंने बीमा क्लेम के फाइलों पर अपने हस्ताक्षर होने से इन्कार दिया। इसके बाद पुलिस ने संचालक पर एक और प्राथमिकी दर्ज करने की तैयारी शुरू कर दी है।
डिसेंट अस्पताल के मैनेजर के संपर्क में था संचालक
मामले के विवेचक राम सिंह के अनुसार, इस फर्जीवाड़े को अंजाम देने के लिए डिसेंट अस्पताल के मैनेजर ताहिर उर्फ सोनू खान के नेटवर्क का इस्तेमाल किया गया। सोनू खान पहले भी इसी तरह के मामलों में सक्रिय रहा है और उसका नेटवर्क स्वास्थ्य विभाग, निजी अस्पतालों और क्लेम एजेंसियों तक फैला हुआ बताया जा रहा है। इसी नेटवर्क की मदद से फर्जी दस्तावेज तैयार किए गए और सिस्टम की खामियों का फायदा उठाकर क्लेम पास कराए गए। फिलहाल पुलिस इस मामले में दर्ज मामलों की गहन जांच कर रही है और क्लेम से जुड़े बैंक खातों, डिजिटल रिकॉर्ड और कॉल डिटेल्स को खंगाल रही है।
अस्पताल कर्मचारी भी फर्जीवाड़े में शामिल
जांच में यह भी सामने आया है कि अस्पताल का एक कर्मचारी भी इस पूरे खेल में बराबर का भागीदार था। पुलिस के अनुसार वह इंश्योरेंस एजेंटों के सीधे संपर्क में रहता था और क्लेम पास कराने की पूरी प्रक्रिया को मैनेज करता था। फर्जी मरीजों को भर्ती दिखाने, अस्पताल के कागजात तैयार कराने और क्लेम फाइल आगे बढ़ाने का जिम्मा भी उसी कर्मचारी के पास था। इसी वजह से फर्जीवाड़े का यह नेटवर्क लंबे समय तक चलता रहा। थाना प्रभारी के अनुसार, जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसके आधार पर आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
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जांच में इस पूरे नेटवर्क की जड़ उरुवा बाजार के पचोहां गांव निवासी इंद्रेश यादव को बताया जा रहा है। वह वर्तमान में जेल में बंद है। आरोप है कि इंद्रेश ने बी-फार्मा की डिग्री के आधार पर पहले मेडिकल स्टोर खोला और बाद में उसने खुद को अस्पताल संचालक बताकर स्वास्थ्य योजनाओं के नाम पर बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा शुरू कर दिया था।
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रामगढ़ताल थाना प्रभारी नितीन रघुनाथ श्रीवास्तव के मुताबिक, इंद्रेश यादव ने करीब ढाई साल पहले खोराबार बाईपास इलाके में विद्यावती हॉस्पिटल की शुरुआत की थी। इस अस्पताल को शुरू करने में कुशीनगर के एक सरकारी अस्पताल में कॉन्ट्रैक्चुअल आधार पर कार्यरत डॉ. नवाज आलम के नाम और एमबीबीएस डिग्री का सहारा लिया गया। शुरुआती दौर में अस्पताल सामान्य रूप से संचालित होता रहा लेकिन जनवरी 2025 से योजनाबद्ध तरीके से फर्जी क्लेम पास कराने का खेल शुरू किया गया।
इस दौरान बीमा और आयुष्मान योजना के तहत कई मरीजों के नाम पर क्लेम भेजे गए। पुलिस बीते आठ फरवरी को ही फर्जीवाड़े के मामले में उरुवा बाजार के पचोहां निवासी इंद्रेश यादव, शाहपुर थाना क्षेत्र के माेहनापुर सोनवा टोला निवासी अमन यादव उर्फ गौरव यादव और शाहपुर के सरस्वतीपुरम लेन नंबर तीन निवासी अभिषेक शर्मा उर्फ हनी शर्मा को गिरफ्तार कर चुकी है।
पुलिस ने जब डाॅक्टर नवाज से पूछताछ की तो उन्होंने बीमा क्लेम के फाइलों पर अपने हस्ताक्षर होने से इन्कार दिया। इसके बाद पुलिस ने संचालक पर एक और प्राथमिकी दर्ज करने की तैयारी शुरू कर दी है।
डिसेंट अस्पताल के मैनेजर के संपर्क में था संचालक
मामले के विवेचक राम सिंह के अनुसार, इस फर्जीवाड़े को अंजाम देने के लिए डिसेंट अस्पताल के मैनेजर ताहिर उर्फ सोनू खान के नेटवर्क का इस्तेमाल किया गया। सोनू खान पहले भी इसी तरह के मामलों में सक्रिय रहा है और उसका नेटवर्क स्वास्थ्य विभाग, निजी अस्पतालों और क्लेम एजेंसियों तक फैला हुआ बताया जा रहा है। इसी नेटवर्क की मदद से फर्जी दस्तावेज तैयार किए गए और सिस्टम की खामियों का फायदा उठाकर क्लेम पास कराए गए। फिलहाल पुलिस इस मामले में दर्ज मामलों की गहन जांच कर रही है और क्लेम से जुड़े बैंक खातों, डिजिटल रिकॉर्ड और कॉल डिटेल्स को खंगाल रही है।
अस्पताल कर्मचारी भी फर्जीवाड़े में शामिल
जांच में यह भी सामने आया है कि अस्पताल का एक कर्मचारी भी इस पूरे खेल में बराबर का भागीदार था। पुलिस के अनुसार वह इंश्योरेंस एजेंटों के सीधे संपर्क में रहता था और क्लेम पास कराने की पूरी प्रक्रिया को मैनेज करता था। फर्जी मरीजों को भर्ती दिखाने, अस्पताल के कागजात तैयार कराने और क्लेम फाइल आगे बढ़ाने का जिम्मा भी उसी कर्मचारी के पास था। इसी वजह से फर्जीवाड़े का यह नेटवर्क लंबे समय तक चलता रहा। थाना प्रभारी के अनुसार, जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसके आधार पर आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।