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राष्ट्र के महापुरुष तथा क्रांतिकारी युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत : सीएम
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- मुख्यमंत्री ने वीरांगना महारानी लक्ष्मीबाई की प्रतिमा पर माल्यार्पण और पुष्पार्चन कर स्वतंत्रता संग्राम में उनके योगदान को किया नमन
गोरखपुर। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि यह तिरंगा यात्रा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘हर घर तिरंगा’ फहराने के आह्वान का हिस्सा है। 2022 से शुरू हर घर तिरंगा अभियान प्रतिवर्ष चरम की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि राष्ट्र के महापुरुष तथा क्रांतिकारी युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत होते हैं। यह हमारा तिरंगा उन्हीं क्रांतिकारियों और महापुरुषों के बलिदान की अमिट गाथा है। युवाओं से उनका आदर्श छीना गया तो वे गौरव की अनुभूति करने से वंचित रह जाएंगे। इसीलिए पीएम मोदी ने हर घर तिरंगा फहराने का मंत्र दिया है।
नगर निगम परिसर से निकली तिरंगा यात्रा के पहले मुख्यमंत्री ने वीरांगना महारानी लक्ष्मीबाई की प्रतिमा पर माल्यार्पण और पुष्पार्चन कर स्वतंत्रता संग्राम में उनके योगदान और बलिदान को नमन किया। उन्होंने कहा कि भारत की आजादी के आंदोलन में हमारे स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों ने अलग-अलग समय, अलग-अलग प्रकार के ध्वज को लेकर आंदोलन को नई गति दी थी। 1905 में भारत की आजादी का मूलमंत्र स्वदेशी बना था। इसके बाद 1930 के दशक में तिरंगा के बीच चरखा, स्वतंत्रता सेनानियों का ध्वज बना था। स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात तिरंगा के साथ, सभी राज्यों का प्रतिनिधित्व करने वाले चक्र को लेकर राष्ट्रध्वज स्वीकार किया गया।
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भारत की आजादी का मंत्र बना था तिरंगा
सीएम योगी ने कहा कि कभी यह तिरंगा भारत की आजादी का मंत्र बना था। बैरकपुर में आजादी की चिंगारी मंगल पांडेय ने लगाई थी। गोरखपुर में बंधु सिंह, झांसी में रानी लक्ष्मीबाई तथा बिठुर (कानुपर) में तात्या टोपे, मेरठ में धनसिंह कोतवाल ने आजादी के आंदोलन को दिशा दी। आजादी के लिए बहुत सारी कीमत चुकानी पड़ी थी। मुख्यमंत्री ने कहा कि 1922 में गोरखपुर में चौरीचौरा की ऐतिहासिक घटना ने अंग्रेजों की चूलें हिला दी थी। 1925 में लखनऊ के काकोरी में पंडित राम प्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्ला खां, रोशन सिंह, चंद्रशेखर आजाद, शचीन्द्रनाथ सान्याल, राजेन्द्र लाहिड़ी आदि ने देश का धन अंग्रजों से कब्जे में लेने का कार्य किया था। अंग्रेजों ने इसे डकैती कहा था। 1947 से 2022 तक देश की इस ऐतिहासिक घटना को डकैती पढ़ाया जा रहा था, लेकिन पीएम मोदी ने इस घटना को काकोरी ट्रेन एक्शन का नाम दिया। इसमें शामिल पंडित राम प्रसाद बिस्मिल को गोरखपुर में फांसी दी गई। अन्य सभी क्रांतिकारियों को विभिन्न जेलों में फांसी दी गई।
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इस वर्ष पांच करोड़ घरों पर तिरंगा फहराने का लक्ष्य
उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ने इस वर्ष पांच करोड़ घरों में तिरंगा लहराने के लक्ष्य को तय किया है। प्रदेश के घरों के साथ सभी सरकारी, अर्द्धसरकारी, निजी, व्यावसायिक तथा व्यापारिक संस्थानों के भवनों पर तिरंगा लहराया जायेगा। यह कार्य राष्ट्र के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर शहीदों के प्रति हमारे सम्मान का प्रतीक है। इन बलिदानियों ने जाति न देखकर राष्ट्र प्रथम के भाव के साथ कार्य किया। उन्होंने कहा कि हम तिरंगा, राष्ट्रगान तथा राष्ट्रगीत वंदे मातरम को सम्मान देकर इन क्रांतिकारी एवं वीर आत्माओं को सम्मान दे सकते हैं।
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गोरखपुर। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि यह तिरंगा यात्रा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘हर घर तिरंगा’ फहराने के आह्वान का हिस्सा है। 2022 से शुरू हर घर तिरंगा अभियान प्रतिवर्ष चरम की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि राष्ट्र के महापुरुष तथा क्रांतिकारी युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत होते हैं। यह हमारा तिरंगा उन्हीं क्रांतिकारियों और महापुरुषों के बलिदान की अमिट गाथा है। युवाओं से उनका आदर्श छीना गया तो वे गौरव की अनुभूति करने से वंचित रह जाएंगे। इसीलिए पीएम मोदी ने हर घर तिरंगा फहराने का मंत्र दिया है।
नगर निगम परिसर से निकली तिरंगा यात्रा के पहले मुख्यमंत्री ने वीरांगना महारानी लक्ष्मीबाई की प्रतिमा पर माल्यार्पण और पुष्पार्चन कर स्वतंत्रता संग्राम में उनके योगदान और बलिदान को नमन किया। उन्होंने कहा कि भारत की आजादी के आंदोलन में हमारे स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों ने अलग-अलग समय, अलग-अलग प्रकार के ध्वज को लेकर आंदोलन को नई गति दी थी। 1905 में भारत की आजादी का मूलमंत्र स्वदेशी बना था। इसके बाद 1930 के दशक में तिरंगा के बीच चरखा, स्वतंत्रता सेनानियों का ध्वज बना था। स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात तिरंगा के साथ, सभी राज्यों का प्रतिनिधित्व करने वाले चक्र को लेकर राष्ट्रध्वज स्वीकार किया गया।
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भारत की आजादी का मंत्र बना था तिरंगा
सीएम योगी ने कहा कि कभी यह तिरंगा भारत की आजादी का मंत्र बना था। बैरकपुर में आजादी की चिंगारी मंगल पांडेय ने लगाई थी। गोरखपुर में बंधु सिंह, झांसी में रानी लक्ष्मीबाई तथा बिठुर (कानुपर) में तात्या टोपे, मेरठ में धनसिंह कोतवाल ने आजादी के आंदोलन को दिशा दी। आजादी के लिए बहुत सारी कीमत चुकानी पड़ी थी। मुख्यमंत्री ने कहा कि 1922 में गोरखपुर में चौरीचौरा की ऐतिहासिक घटना ने अंग्रेजों की चूलें हिला दी थी। 1925 में लखनऊ के काकोरी में पंडित राम प्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्ला खां, रोशन सिंह, चंद्रशेखर आजाद, शचीन्द्रनाथ सान्याल, राजेन्द्र लाहिड़ी आदि ने देश का धन अंग्रजों से कब्जे में लेने का कार्य किया था। अंग्रेजों ने इसे डकैती कहा था। 1947 से 2022 तक देश की इस ऐतिहासिक घटना को डकैती पढ़ाया जा रहा था, लेकिन पीएम मोदी ने इस घटना को काकोरी ट्रेन एक्शन का नाम दिया। इसमें शामिल पंडित राम प्रसाद बिस्मिल को गोरखपुर में फांसी दी गई। अन्य सभी क्रांतिकारियों को विभिन्न जेलों में फांसी दी गई।
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इस वर्ष पांच करोड़ घरों पर तिरंगा फहराने का लक्ष्य
उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ने इस वर्ष पांच करोड़ घरों में तिरंगा लहराने के लक्ष्य को तय किया है। प्रदेश के घरों के साथ सभी सरकारी, अर्द्धसरकारी, निजी, व्यावसायिक तथा व्यापारिक संस्थानों के भवनों पर तिरंगा लहराया जायेगा। यह कार्य राष्ट्र के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर शहीदों के प्रति हमारे सम्मान का प्रतीक है। इन बलिदानियों ने जाति न देखकर राष्ट्र प्रथम के भाव के साथ कार्य किया। उन्होंने कहा कि हम तिरंगा, राष्ट्रगान तथा राष्ट्रगीत वंदे मातरम को सम्मान देकर इन क्रांतिकारी एवं वीर आत्माओं को सम्मान दे सकते हैं।