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राजकुमार हत्याकांड : हाईकोर्ट ने लालजी यादव की गिरफ्तारी को बताया अवैध, तत्काल रिहाई के आदेश
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गोरखपुर। बरगदवां के प्रॉपर्टी डीलर राजकुमार चौहान हत्याकांड में अहम मोड़ आया है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मामले में आरोपी बनाए गए लालजी यादव की गिरफ्तारी को अवैध करार देते हुए उसे तत्काल रिहा करने का आदेश दिया है। अदालत का आदेश मिलते ही जेल प्रशासन ने शनिवार को लालजी यादव को रिहा कर दिया।
न्यायमूर्ति सिद्धार्थ और न्यायमूर्ति विनय कुमार द्विवेदी की खंडपीठ ने बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई करते हुए पाया कि गिरफ्तारी के दौरान निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। अदालत ने कहा कि आरोपी को गिरफ्तारी के कारणों की जानकारी न देना और उसके परिजनों को सूचित न करना संविधान के अनुच्छेद 22(1) का स्पष्ट उल्लंघन है। इसके साथ ही 21 मार्च 2026 को गोरखपुर के रिमांड मजिस्ट्रेट द्वारा पारित रिमांड आदेश को भी निरस्त कर दिया गया।
अदालत ने स्पष्ट किया कि गिरफ्तारी की प्रक्रिया में पारदर्शिता और कानूनी प्रावधानों का पालन अनिवार्य है। सुप्रीम कोर्ट के पूर्व फैसलों का हवाला देते हुए कहा गया कि गिरफ्तारी के कारणों की सूचना आरोपी और उसके परिजनों को देना आवश्यक है।
कोर्ट ने न केवल रिहाई का आदेश दिया, बल्कि मामले में लापरवाही को गंभीरता से लेते हुए जांच अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश भी दिए हैं। रजिस्ट्रार को आदेश की प्रति जिला जज और एसएसपी गोरखपुर को भेजने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि तीन दिन के भीतर जिम्मेदार अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई शुरू की जा सके।
जानकारी के अनुसार, 17 मार्च की सुबह बरगदवां निवासी राजकुमार चौहान की गोली और चाकू मारकर हत्या कर दी गई थी। इस मामले में कई आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज हुई थी। पुलिस ने जांच के दौरान कई लोगों को गिरफ्तार किया था, जिनमें लालजी यादव भी शामिल था।
उच्च न्यायालय ने रिमांड प्रक्रिया में खामियों को इंगित करते हुए रिमांड खारिज किया है। विवेचना पर कोई टिप्पणी नहीं की गई है। नियमानुसार आगे की विधिक कार्रवाई करते हुए शीघ्र ही आरोप पत्र प्रेषित किया जाएगा।
- ज्ञानेंद्र, एसपी नार्थ
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न्यायमूर्ति सिद्धार्थ और न्यायमूर्ति विनय कुमार द्विवेदी की खंडपीठ ने बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई करते हुए पाया कि गिरफ्तारी के दौरान निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। अदालत ने कहा कि आरोपी को गिरफ्तारी के कारणों की जानकारी न देना और उसके परिजनों को सूचित न करना संविधान के अनुच्छेद 22(1) का स्पष्ट उल्लंघन है। इसके साथ ही 21 मार्च 2026 को गोरखपुर के रिमांड मजिस्ट्रेट द्वारा पारित रिमांड आदेश को भी निरस्त कर दिया गया।
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अदालत ने स्पष्ट किया कि गिरफ्तारी की प्रक्रिया में पारदर्शिता और कानूनी प्रावधानों का पालन अनिवार्य है। सुप्रीम कोर्ट के पूर्व फैसलों का हवाला देते हुए कहा गया कि गिरफ्तारी के कारणों की सूचना आरोपी और उसके परिजनों को देना आवश्यक है।
कोर्ट ने न केवल रिहाई का आदेश दिया, बल्कि मामले में लापरवाही को गंभीरता से लेते हुए जांच अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश भी दिए हैं। रजिस्ट्रार को आदेश की प्रति जिला जज और एसएसपी गोरखपुर को भेजने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि तीन दिन के भीतर जिम्मेदार अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई शुरू की जा सके।
जानकारी के अनुसार, 17 मार्च की सुबह बरगदवां निवासी राजकुमार चौहान की गोली और चाकू मारकर हत्या कर दी गई थी। इस मामले में कई आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज हुई थी। पुलिस ने जांच के दौरान कई लोगों को गिरफ्तार किया था, जिनमें लालजी यादव भी शामिल था।
उच्च न्यायालय ने रिमांड प्रक्रिया में खामियों को इंगित करते हुए रिमांड खारिज किया है। विवेचना पर कोई टिप्पणी नहीं की गई है। नियमानुसार आगे की विधिक कार्रवाई करते हुए शीघ्र ही आरोप पत्र प्रेषित किया जाएगा।
- ज्ञानेंद्र, एसपी नार्थ
