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वैभव अपहरण-हत्याकांड: सतीश के सरेंडर के बाद सोमवार को दाखिल होगी पूरक चार्जशीट
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- सात अगस्त को मुख्य आरोपी समेत पांच के खिलाफ 35 पन्नों की चार्जशीट दाखिल कर चुकी है पुलिस
- हत्याकांड के मास्टरमाइंड ने बीते 11 अगस्त को कोर्ट में सरेंडर कर चुका है सतीश भट्ट
- पूरक चार्जशीट में सतीश के खिलाफ जुटाए गए साक्ष्य होंगे शामिल
गोरखपुर। खजनी के वैभव वर्मा अपहरण-हत्याकांड में आरोपी सतीश भट्ट के न्यायालय में आत्मसमर्पण के बाद पुलिस अब सोमवार को पूरक चार्जशीट दाखिल करने की तैयारी में है। सात अगस्त को पुलिस ने मुख्य आरोपी कंप्यूटर शिक्षक सर्वेश उर्फ बिट्टू शर्मा समेत पांच आरोपियों के खिलाफ 35 पन्नों की चार्जशीट कोर्ट में दाखिल की थी।
सतीश के 11 अगस्त को सरेंडर करने के बाद उसकी भूमिका और उससे जुड़े साक्ष्यों को विवेचना में शामिल कर पूरक आरोपपत्र दाखिल किया जाएगा। इसके बाद पुलिस मामले की जल्द सुनवाई और प्रभावी पैरवी के लिए अभियोजन के साथ समन्वय कर फास्ट ट्रैक में सुनवाई कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ाएगी।
पुलिस की पहली चार्जशीट में सर्वेश शर्मा को वैभव के अपहरण और हत्या का मुख्य आरोपी बनाया गया है। उसके पिता हरिनारायण शर्मा, भाई सत्येंद्र कुमार भट्ट उर्फ जिले, सतीश भट्ट, पत्नी अनामिका शर्मा और बबली शर्मा को आपराधिक साजिश में शामिल होने का आरोपी बनाया गया था। सतीश के भागने के कारण उसके संबंध में कार्रवाई पूरी होने के बाद अब पूरक चार्जशीट दाखिल की जाएगी।
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13 दिन में पूरी की थी विवेचना, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य बने आधार
पुलिस ने घटना के 13 दिन के भीतर विवेचना पूरी कर पहली चार्जशीट दाखिल की थी। इसमें सीसीटीवी फुटेज, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य, फोरेंसिक रिपोर्ट, बरामदगी और तकनीकी विश्लेषण को अहम आधार बनाया गया है। पुलिस का कहना है कि मुकदमे की त्वरित सुनवाई को ध्यान में रखते हुए महत्वपूर्ण गवाहों और साक्ष्यों को आरोपपत्र में शामिल किया गया है।
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सतीश के खिलाफ भी जुटाए गए साक्ष्य होंगे पूरक चार्जशीट का हिस्सा
साजिश में भूमिका के आरोपी सतीश भट्ट के खिलाफ पुलिस ने गिरफ्तारी से पहले भी कार्रवाई तेज कर रखी थी। उसके खिलाफ न्यायालय से गैर-जमानती वारंट जारी था और एसएसपी की ओर से 25 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया था। पुलिस की कई टीमें उसकी तलाश में दबिश दे रही थीं। इसी बीच 11 अगस्त को सतीश ने न्यायालय में आत्मसमर्पण कर दिया। अब उसके सरेंडर के बाद पुलिस उसकी भूमिका से जुड़े साक्ष्यों को आरोपपत्र के साथ जोड़कर सोमवार को पूरक चार्जशीट दाखिल करेगी। पुलिस का जोर इस बात पर है कि सभी आरोपियों के खिलाफ उपलब्ध साक्ष्यों को न्यायालय के समक्ष व्यवस्थित तरीके से रखा जाए, जिससे मुकदमे की सुनवाई में अनावश्यक देरी न हो और दोष सिद्ध होने पर आरोपियों को जल्द सजा दिलाने की दिशा में प्रभावी पैरवी की जा सके।
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यह था पूरा मामला
27 जुलाई को चौथी कक्षा का छात्र वैभव स्कूल से घर लौटने के बाद साइकिल लेकर खेलने निकला था। देर शाम तक घर नहीं पहुंचा तो पिता हनुमान वर्मा और परिवार के अन्य लोगों ने उसकी तलाश शुरू की। इस दौरान साइकिल और चप्पल मिलने पर परिजन ने पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर पांच टीमें गठित कीं। सीसीटीवी फुटेज, डॉग स्क्वॉड और तकनीकी संसाधनों की मदद से जांच आगे बढ़ी तो शक पड़ोसी और कोचिंग संचालक सर्वेश उर्फ बिट्टू शर्मा पर गया। पुलिस की विवेचना के मुताबिक, कर्ज में डूबे सर्वेश ने करीब एक करोड़ रुपये की फिरौती के लिए वैभव के अपहरण की साजिश रची थी। आरोपपत्र के अनुसार, उसने फिरौती मांगने के तरीके और पहचान छिपाने के उपाय तलाशने के लिए इंटरनेट और एआई की मदद ली। कंबोडिया के कंट्री कोड वाला वर्चुअल मोबाइल नंबर हासिल करने के साथ रकम के लेन-देन के लिए बैंक खाते की व्यवस्था की गई।
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- हत्याकांड के मास्टरमाइंड ने बीते 11 अगस्त को कोर्ट में सरेंडर कर चुका है सतीश भट्ट
- पूरक चार्जशीट में सतीश के खिलाफ जुटाए गए साक्ष्य होंगे शामिल
गोरखपुर। खजनी के वैभव वर्मा अपहरण-हत्याकांड में आरोपी सतीश भट्ट के न्यायालय में आत्मसमर्पण के बाद पुलिस अब सोमवार को पूरक चार्जशीट दाखिल करने की तैयारी में है। सात अगस्त को पुलिस ने मुख्य आरोपी कंप्यूटर शिक्षक सर्वेश उर्फ बिट्टू शर्मा समेत पांच आरोपियों के खिलाफ 35 पन्नों की चार्जशीट कोर्ट में दाखिल की थी।
सतीश के 11 अगस्त को सरेंडर करने के बाद उसकी भूमिका और उससे जुड़े साक्ष्यों को विवेचना में शामिल कर पूरक आरोपपत्र दाखिल किया जाएगा। इसके बाद पुलिस मामले की जल्द सुनवाई और प्रभावी पैरवी के लिए अभियोजन के साथ समन्वय कर फास्ट ट्रैक में सुनवाई कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ाएगी।
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पुलिस की पहली चार्जशीट में सर्वेश शर्मा को वैभव के अपहरण और हत्या का मुख्य आरोपी बनाया गया है। उसके पिता हरिनारायण शर्मा, भाई सत्येंद्र कुमार भट्ट उर्फ जिले, सतीश भट्ट, पत्नी अनामिका शर्मा और बबली शर्मा को आपराधिक साजिश में शामिल होने का आरोपी बनाया गया था। सतीश के भागने के कारण उसके संबंध में कार्रवाई पूरी होने के बाद अब पूरक चार्जशीट दाखिल की जाएगी।
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13 दिन में पूरी की थी विवेचना, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य बने आधार
पुलिस ने घटना के 13 दिन के भीतर विवेचना पूरी कर पहली चार्जशीट दाखिल की थी। इसमें सीसीटीवी फुटेज, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य, फोरेंसिक रिपोर्ट, बरामदगी और तकनीकी विश्लेषण को अहम आधार बनाया गया है। पुलिस का कहना है कि मुकदमे की त्वरित सुनवाई को ध्यान में रखते हुए महत्वपूर्ण गवाहों और साक्ष्यों को आरोपपत्र में शामिल किया गया है।
सतीश के खिलाफ भी जुटाए गए साक्ष्य होंगे पूरक चार्जशीट का हिस्सा
साजिश में भूमिका के आरोपी सतीश भट्ट के खिलाफ पुलिस ने गिरफ्तारी से पहले भी कार्रवाई तेज कर रखी थी। उसके खिलाफ न्यायालय से गैर-जमानती वारंट जारी था और एसएसपी की ओर से 25 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया था। पुलिस की कई टीमें उसकी तलाश में दबिश दे रही थीं। इसी बीच 11 अगस्त को सतीश ने न्यायालय में आत्मसमर्पण कर दिया। अब उसके सरेंडर के बाद पुलिस उसकी भूमिका से जुड़े साक्ष्यों को आरोपपत्र के साथ जोड़कर सोमवार को पूरक चार्जशीट दाखिल करेगी। पुलिस का जोर इस बात पर है कि सभी आरोपियों के खिलाफ उपलब्ध साक्ष्यों को न्यायालय के समक्ष व्यवस्थित तरीके से रखा जाए, जिससे मुकदमे की सुनवाई में अनावश्यक देरी न हो और दोष सिद्ध होने पर आरोपियों को जल्द सजा दिलाने की दिशा में प्रभावी पैरवी की जा सके।
यह था पूरा मामला
27 जुलाई को चौथी कक्षा का छात्र वैभव स्कूल से घर लौटने के बाद साइकिल लेकर खेलने निकला था। देर शाम तक घर नहीं पहुंचा तो पिता हनुमान वर्मा और परिवार के अन्य लोगों ने उसकी तलाश शुरू की। इस दौरान साइकिल और चप्पल मिलने पर परिजन ने पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर पांच टीमें गठित कीं। सीसीटीवी फुटेज, डॉग स्क्वॉड और तकनीकी संसाधनों की मदद से जांच आगे बढ़ी तो शक पड़ोसी और कोचिंग संचालक सर्वेश उर्फ बिट्टू शर्मा पर गया। पुलिस की विवेचना के मुताबिक, कर्ज में डूबे सर्वेश ने करीब एक करोड़ रुपये की फिरौती के लिए वैभव के अपहरण की साजिश रची थी। आरोपपत्र के अनुसार, उसने फिरौती मांगने के तरीके और पहचान छिपाने के उपाय तलाशने के लिए इंटरनेट और एआई की मदद ली। कंबोडिया के कंट्री कोड वाला वर्चुअल मोबाइल नंबर हासिल करने के साथ रकम के लेन-देन के लिए बैंक खाते की व्यवस्था की गई।