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Gorakhpur News: पापा प्लीज लौट आओ... सफेद कपड़े में लिपटे पिता का शव देख फफक पड़ी सात साल की बेटी

Sat, 15 Aug 2026 02:06 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sat, 15 Aug 2026 02:06 AM IST
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डॉ. परमात्मा सुसाइड प्रकरण : पिता को अंतिम बार देखने के बाद भाई से लिपटकर रोती रही मासूम
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- बहन बोली- भाभी ने दो दिन पहले फोन कर बताया था भाई लोन के मामले में फंसे हैं बहुत टेंशन में हैं... समझाने आती, उससे पहले ही दुनिया छोड़ गए
गोरखपुर। सफेद कपड़े में लिपटे पिता डॉ. परमात्मा सिंह का शव सामने था। सात साल की पर्णिका सिंह उर्फ बिन्नी को पहले समझ ही नहीं आया कि जमीन पर लेटे पापा अब कभी उठेंगे नहीं। अर्थी उठने से पहले अंतिम दर्शन के दौरान बिन्नी को बुलाया। बिन्नी ने पिता को देखा तो उसे बताया गया कि पापा अब इस दुनिया में नहीं रहे। यह सुनते ही वह फफक पड़ी। आंखों से आंसू बहने लगे और वह बार-बार कहती रही- ‘पापा, प्लीज लौट आओ।’
कुछ देर तक वह पिता के पास खड़ी उन्हें निहारती रही। फिर बड़े भाई 12 वर्षीय अरिहंत सिंह से लिपटकर रोने लगी। बच्चों के लिए यह समझ पाना मुश्किल था कि जिस पिता के साथ वे रोजमर्रा की जिंदगी जीते थे, वह अब उनके बीच नहीं हैं। रिश्तेदार और आसपास मौजूद लोग दोनों बच्चों को संभालते रहे। वहीं डॉ. परमात्मा की पत्नी डॉ. सुमित्रा सिंह भी पति की मौत से बदहवास थीं। मां कुंती सिंह व बहनों प्रतिभा, आभा, रंजना, नूतन व आस्था का रो-रोकर बुरा हाल था।
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‘दो दिन पहले आती तो शायद भैया को बचा लेती’
भाई की मौत की खबर मिलते ही डॉ. परमात्मा की छोटी बहन रंजना सिंह भी अपाॅर्टमेंट पहुंचीं थीं। शव देखते ही वह चीख-चीखकर रोने लगीं। उनके मुंह से बार-बार यही निकल रहा था कि अगर वह दो दिन पहले आ जातीं तो शायद भाई को समझाकर बचा लेतीं। रंजना ने बताया कि दो दिन पहले भाभी ने फोन किया था। उन्होंने बताया था कि भाई एक लोन के मामले में फंस गए हैं और काफी तनाव में चल रहे हैं। यह सुनकर रंजना ने भाई के पास आने और उनसे बात कर समझाने की बात कही थी। मगर वह गोरखपुर पहुंच पातीं, उससे पहले ही भाई ने अपनी जान दे दी। भाई को याद कर रंजना कहती रहीं, ‘भाभी ने दो दिन पहले बताया था। मैं आकर भैया को समझाने वाली थी। अगर उसी समय आ जाती तो शायद आज भैया हमारे बीच होते।’ परिजन ने उन्हें संभाला, लेकिन भाई को खोने का दर्द उनके चेहरे पर साफ दिखाई दे रहा था।
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मासूम बच्चों के सिर से उठ गया पिता का साया
डॉ. परमात्मा की मौत ने परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है। सबसे मुश्किल स्थिति उन दोनों बच्चों के लिए है, जिन्होंने अचानक अपने पिता को खो दिया। बिन्नी की पिता को वापस बुलाने की मासूम गुहार वहां मौजूद हर व्यक्ति को भावुक कर गई। परिवार के लोग बच्चों को संभालने में जुटे रहे। मां डॉ. सुमित्रा सिंह का भी रो-रोकर बुरा हाल था। जिस घर में बच्चों की पढ़ाई, भविष्य और परिवार की खुशियों की बातें होती थीं, वहां अचानक मातम छा गया। पिता के शव के पास बैठकर रोते बच्चों को देखकर रिश्तेदारों और पड़ोसियों की आंखें भी नम हो गईं।


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हर साल रक्षाबंधन पर डॉ. परमात्मा के घर पहुंचती थीं बहनें
डॉ. परमात्मा पांच बहनों के इकलौते भाई थे। हर साल रक्षाबंधन पर बहनें प्रतिभा, आभा, रंजना, नूतन और आस्था भाई की कलाई पर राखी बांधने उनके घर पहुंचती थीं। इस बार भी त्योहार पर मिलने की तैयारी थी लेकिन उससे पहले ही डॉ. परमात्मा ने अपनी जान दे दी। भाई की मौत की खबर से पांचों बहनों का रो-रोकर बुरा हाल था। जिस घर में कुछ दिन बाद राखी की खुशियां और भाई-बहनों की हंसी गूंजनी थी, वहां मातम पसरा था। बहनें भाई को याद कर बार-बार बिलख उठतीं। उन्हें यकीन नहीं हो रहा था कि इस बार रक्षाबंधन पर उनकी राखी की थाली तो सजेगी, लेकिन भाई की कलाई सामने नहीं होगी। परिवार के लोगों के मुताबिक, डॉ. परमात्मा बहनों के बेहद करीब थे और सभी बहनों के सुख-दुख में हमेशा साथ खड़े रहते थे। भाई की मौत ने बहनों से त्योहार की खुशियां भी छीन लीं।
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