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गोरखपुर में घट गया लिंगानुपात: अब 1000 पुरुषों के सापेक्ष 829 महिलाएं ही, खजनी की महिला वोटर रह गई सबसे पीछे

अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर Published by: गोरखपुर ब्यूरो Updated Sun, 12 Apr 2026 02:31 AM IST
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सार

राजनीतिक विश्लेषक एवं गोरखपुर विश्वविद्यालय में राजनीति विज्ञान विभाग के सहायक आचार्य डॉ. महेंद्र कुमार सिंह ने कहा कि मतदाता सूची की शुद्धता और उसका पारदर्शी, समावेशी और अद्यतन रूप में तैयार किया जाना किसी भी सशक्त लोकतंत्र और विश्वसनीय चुनावी प्रक्रिया की आधारशिला है।

The Census ratio has declined...now there are only 829 women for every 1000 men.
राजनीतिक पार्टी के प्रतिनिधियों को वोटर लिस्ट प्रदान करते जिला निर्वाचन अधिकारी दीपक मीणा. - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार

विशेष मतदाता पुनरीक्षण (एसआईआर) के बाद जिले में मतदाताओं की नई तस्वीर सामने आई है। जिले में अब कुल 14,71,316 महिला मतदाता हैं, जबकि पुरुष मतदाताओं की संख्या 17,73,929 दर्ज की गई है। आंकड़े बताते हैं कि मतदाता सूची में महिलाओं की भागीदारी पुरुषों की तुलना में अब भी पीछे है।

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एसआईआर के बाद नई वोटर लिस्ट के अनुसार, जिले में 1000 पुरुषों के सापेक्ष 829 महिलाएं ही मतदान करेंगी। वर्ष 2024 की सूची में यह संख्या 859 थी। प्रशासन की ओर से अनंतिम सूची प्रकाशित होने के बाद महिला मतदाताओं को जोड़ने के लिए विशेष प्रयास किए गए थे, लेकिन इसके बावजूद लिंगानुपात में सुधार नहीं हो सका।

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विधानसभा क्षेत्रवार देखें तो शहर की स्थिति सबसे बेहतर है। यहां लिंगानुपात 894 दर्ज किया गया है, जो जिले की सभी नौ विधानसभा क्षेत्रों में सर्वाधिक है। इसके विपरीत खजनी विधानसभा क्षेत्र सबसे पीछे है, जहां प्रति 1000 पुरुष मतदाताओं पर मात्र 790 महिला मतदाता हैं।

ग्रामीण क्षेत्रों में औसतन लिंगानुपात 859 है, जो संतोषजनक स्तर से नीचे माना जा रहा है। आबादी की तुलना में मतदाता संख्या के मामले में गोरखपुर शहर विधानसभा क्षेत्र सबसे आगे है, जहां ईपी (इलेक्टर पापुलेशन) रेशियो 76.48 प्रतिशत दर्ज किया गया है।

वहीं, कैंपियरगंज विधानसभा क्षेत्र 55.61 प्रतिशत के साथ सबसे पीछे है। इसके अलावा पिपराइच, खजनी, चौरीचौरा, बांसगांव, चिल्लूपार और सहजनवां विधानसभा क्षेत्र में यह अनुपात 60 प्रतिशत से नीचे बना हुआ है।

आंकड़े स्पष्ट करते हैं कि शहरी क्षेत्रों में मतदाता पंजीकरण अपेक्षाकृत बेहतर है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में अब भी महिलाओं की भागीदारी और मतदाता सूची में समग्र वृद्धि को लेकर सुधार की आवश्यकता बनी हुई है।

चिल्लूपार में कटे सबसे अधिक वोटरों के नाम
एसआईआर के बाद चिल्लूपार विधानसभा क्षेत्र में सबसे ज्यादा वोटरों के नाम कटे हैं। इस प्रक्रिया में कई नाम काटे गए तो बड़ी संख्या में नए मतदाता जोड़े भी गए हैं। कैंपियरगंज में 68,154 नाम काटे गए, 760 पर आपत्ति दर्ज हुई और 23,020 नए नाम जोड़े गए।

पिपराइच में 61,534 नाम हटाए गए, 2,013 पर आपत्ति आई और 28,769 नाम जुड़े। गोरखपुर शहर में 63,516 नाम कटे, 3,523 पर आपत्ति हुई और 32,581 नए मतदाता जोड़े गए। ग्रामीण विधानसभा में 68,041 नाम हटाए गए, 5,405 पर आपत्ति दर्ज हुई और 29,215 नाम बढ़े।

सहजनवां में 61,733 नाम कटे, 866 पर आपत्ति आई और 21,770 नाम जोड़े गए। खजनी में 84,993 नाम हटाए गए, 788 पर आपत्ति हुई और 26,400 नए मतदाता बने। चौरीचौरा में 68,006 नाम कटे, 1,765 पर आपत्ति आई और 26,836 नाम जुड़े। बांसगांव में 84,503 नाम हटे, 1,982 पर आपत्ति हुई और 26,969 नाम जोड़े गए। चिल्लूपार में 87,246 नाम कटे, 1,030 आपत्ति दर्ज हुई और 27,105 नए मतदाता जोड़े गए।

एसआईआर के बाद बनी सूची सटीक और विश्वसनीय
राजनीतिक विश्लेषक एवं गोरखपुर विश्वविद्यालय में राजनीति विज्ञान विभाग के सहायक आचार्य डॉ. महेंद्र कुमार सिंह ने कहा कि मतदाता सूची की शुद्धता और उसका पारदर्शी, समावेशी और अद्यतन रूप में तैयार किया जाना किसी भी सशक्त लोकतंत्र और विश्वसनीय चुनावी प्रक्रिया की आधारशिला है।

उत्तर प्रदेश में निर्वाचन आयोग की ओर से व्यापक पुनरीक्षण अभियान चलाकर मतदाता सूची को वैज्ञानिक एवं तकनीकी प्रक्रियाओं के माध्यम से अद्यतन किया गया है, जिसमें राज्य प्रशासन ने सहयोगात्मक भूमिका निभाई है।

घर-घर सत्यापन, बूथ स्तर अधिकारियों (बीएलओ) की सक्रिय भागीदारी, ऑनलाइन दावों-आपत्तियों की व्यवस्था और विशेष अभियान दिवसों के माध्यम से पात्र नागरिकों को शामिल करने का प्रयास किया गया। इस प्रक्रिया के अंतर्गत डुप्लीकेट प्रविष्टियों की पहचान कर उन्हें हटाया गया और मृत मतदाताओं के नामों को भी सूची से विलोपित किया गया, जिससे सूची अधिक सटीक और विश्वसनीय बनी है।

विशेष रूप से युवा, महिलाओं और वंचित वर्गों के पंजीकरण पर बल दिया गया। सूची निर्माण की प्रक्रिया में विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों की भागीदारी और निगरानी से पारदर्शिता को बल मिला है। हालांकि कुछ स्तरों पर आपत्तियां और आशंकाएं व्यक्त की जाती रही हैं, फिर भी व्यापक स्तर पर प्रक्रिया को व्यवस्थित और विश्वसनीय माना जा रहा है।

अब भी सूची में जुड़वा सकते हैं नाम
एसआईआर के बाद अंतिम सूची निर्वाचन आयोग की वेबसाइट पर उपलब्ध है। अभी भी यदि किसी नागरिक को अपना नाम जोड़वाना, संशोधित कराना या हटवाना है, तो इसके लिए संबंधित प्रपत्र भरे जा सकते हैं। फार्म 6, 7 और 8 ऑनलाइन उपलब्ध रहेंगे। इसके अलावा नागरिक अपने बूथ स्तर अधिकारी (बीएलओ) से संपर्क कर भी आवेदन कर सकते हैं। इस प्रक्रिया से मतदाता सूची को और अधिक सटीक बनाने का अवसर उपलब्ध रहेगा।

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