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तस्वीरें: यूपी का एक गांव जहां नहीं मनाया जाता नया साल, हैरान करने वाली है वजह

अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Fri, 01 Jan 2021 05:58 PM IST
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this village not celebrate any new year in Gorakhpur
भैरोपुर गांव। - फोटो : अमर उजाला।

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले में एक ऐसा गांव है, जहां नया साल नहीं मनाया जाता। इसकी वजह भी हैरान करने वाली है। यहां बीते चार साल से दिसंबर के अंतिम सप्ताह में कोई न कोई काल के गाल में समा जाता है। ऐसे में लोग नया साल आने पर दुखी रहते हैं। आगे की स्लाइड्स में देखें तस्वीरें...

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भैरापुर गांव। - फोटो : अमर उजाला।

यह गांव कैंट इलाके का वार्ड नंबर एक भैरोपुर है। जानकारी के अनुसार, यह सिलसिला दिसंबर 2016 में शुरू हुआ, जब गांव में रामलीला का मंचन हो रहा था। इसी दौरान यहां रामलीला देखने आए युवक विजय पासवान की गांव के ही लोगों से मारपीट में गई। घायल अवस्था में उसे अस्पताल में भर्ती किया गया और 29 दिसंबर को उसकी मौत हो गई। गांव वालों ने रामलीला का मंचन बिना रावण दहन के ही रोक दिया। उस दिन के बाद से आज तक गांव में रामलीला नहीं हुई।

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भैरापुर गांव। - फोटो : अमर उजाला।

2017 दिसंबर में गांव के ही सोनू पासवान कुशीनगर से आते समय सड़क हादसे का शिकार हो गए और मौके पर ही दम तोड़ दिया। वहीं इसके बाद 2018 दिसंबर में एक मछली विक्रेता की रानीडीहा चौराहे पर सड़क हादसे में मौत हो गई। उसके दो दिन बाद ही गांव के ही एक और मछली विक्रेता की हत्या करके शव रामगढ़ताल के किनारे फेंक दिया गया था।



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भैरापुर गांव। - फोटो : अमर उजाला।

2019 दिसंबर में गांव के युवक युवराज ने अपने पिता के लाइसेंस राइफल से खुद को गोली मार मार ली थी। जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई थी। इसके अलावा उसी वर्ष गांव के एक अन्य युवक रंजीत की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।

 

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भैरापुर गांव। - फोटो : अमर उजाला।

वहीं वर्ष 2020 में बीते 29 दिसंबर को गांव के सेल्समैन रमेश चंद जायसवाल की सड़क हादसे में मौत हो गई। इससे अभी गांव के लोग उबर भी नहीं पाए थे कि 31 दिसंबर की सुबह गांव के ही युवक हजारीलाल ने आम के पेड़ से फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। पिछले चार सालों में ये सारी घटनाएं दिसंबर माह में अंतिम सप्ताह में हुई हैं। यही कारण है कि ये असामयिक मौत से नौ वर्ष की खुशियां पूरे दिल से नहीं मना पाते हैं।

गांव के अंकित जायसवाल, राहुल जायसवाल, संजीव कुमार, दीपक, प्रियंका आदि ने बताया कि पिछले चार साल से असामयिक मौत से गांव में दुख का पहाड़ टूट पड़ा है। अब गांव में कोई भी मन से नया साल नहीं मनाता है।

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