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Bhiwani News: आधुनिक ठोस अपशिष्ट प्रबंधन प्लांट का 60 फीसदी काम पूरा, अगले माह पर्यावरण एनओसी मिलने की उम्मीद
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
Updated Sat, 24 Jan 2026 11:32 PM IST
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शहर के दादारी रोड के डंपिंग यार्ड परिसर में लगे कूड़े के ढेर।
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भिवानी। शहर के दादरी रोड स्थित डंपिंग यार्ड परिसर में 24 एकड़ भूमि पर बनाए जा रहे आधुनिक ठोस अपशिष्ट प्रबंधन प्लांट का करीब 60 फीसदी निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। अगले माह प्लांट संचालन के लिए पर्यावरण एनओसी मिलने की उम्मीद है जिसके बाद शेष 40 फीसदी कार्य भी तेजी से पूरा किया जा सकेगा। वर्तमान में भिवानी, चरखी दादरी, बवानीखेड़ा और लोहारू से रोजाना करीब 200 टन से अधिक ठोस कचरा प्लांट तक पहुंच रहा है।
इनमें भिवानी शहर से 145 टन, चरखी दादरी से 36 टन, बवानीखेड़ा से 12 टन और लोहारू से 14 टन ठोस कचरा प्रतिदिन प्लांट में लाया जा रहा है। डंपिंग यार्ड परिसर में पिछले करीब ढाई दशक में जमा 82 हजार टन ठोस कचरे में से 22 हजार टन पुराने कचरे का निस्तारण किया जा चुका है जबकि शेष करीब 60 हजार टन पुराने ठोस कचरे के निस्तारण का कार्य जारी है।
दादरी रोड डंपिंग यार्ड की 24 एकड़ भूमि पर श्रीश्याम इंटरप्राइजिज प्राइवेट लिमिटेड कंपनी ने नगर परिषद से 22 साल की लीज पर जमीन लेकर अगस्त 2023 में ठोस कचरा निस्तारण का काम शुरू किया था। प्लांट पूरी तरह संचालित नहीं होने तक कंपनी को बीते दो वर्षों से ठोस कचरा निस्तारण के एवज में केवल 60 फीसदी राशि का ही भुगतान किया जा रहा है। पर्यावरण एनओसी मिलने और प्लांट निर्माण कार्य तेज होने पर यह भुगतान 80 फीसदी किया जाएगा जबकि प्लांट के पूर्ण संचालन के बाद कंपनी को शत प्रतिशत भुगतान सुनिश्चित किया जाएगा।
कंपनी ने चारों शहरों से रोजाना आने वाले ठोस कचरे और पुराने कचरे के निस्तारण के लिए चार प्रोसेसिंग मशीनें स्थापित की हैं। करीब 60 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले इस प्लांट में फिलहाल चहारदीवारी का निर्माण पूरा हो चुका है और इसके साथ नौ मीटर चौड़ी ग्रीन बेल्ट भी विकसित कर दी गई है। प्लांट के चारों ओर नौ मीटर चौड़ा सर्विस रोड बनाया जाएगा। इसके अलावा प्लांट में एक डिस्पोजल एरिया तैयार किया जाएगा। करीब साढ़े आठ एकड़ क्षेत्र में बड़ा पार्क विकसित किया जाएगा और साढ़े आठ एकड़ में प्रोसेसिंग यूनिट का शेड बनाया जाएगा जिसका आधार तैयार किया जा चुका है।
शहर से कचरा प्वाइंट हुए कम, नहीं हो रहा सूखा और गीला कचरा अलग
नगर परिषद ने शहर से करीब दस कचरा प्वाइंट समाप्त कर उन्हें सेल्फी प्वाइंट में तब्दील कर दिया है, लेकिन इसके बावजूद लोगों में सूखा और गीला कचरा अलग-अलग करने को लेकर जागरूकता नहीं आ पाई है। यही कारण है कि प्रत्येक वार्ड में पहुंचने वाले टिप्पर ऑटो में लोग घरों से निकलने वाला सूखा और गीला कचरा एक साथ डाल रहे हैं जिसे प्रोसेसिंग यूनिट तक भी मिश्रित रूप में ही पहुंचाया जा रहा है। प्रोसेसिंग यूनिट में ठोस कचरे को प्रोसेस कर खाद बनाने की प्रक्रिया चलाई जा रही है। भिवानी शहर के 31 वार्डों में घर-घर कूड़ा उठान के लिए 56 टिप्पर ऑटो लगे हैं जबकि चरखी दादरी शहर में 30 टिप्परों के माध्यम से ठोस कचरा एकत्रित किया जा रहा है। इसी प्रकार बवानीखेड़ा और लोहारू में पांच-पांच टिप्पर ऑटो घर-घर कूड़ा उठान का कार्य कर रहे हैं।
मुजफ्फरनगर के एनर्जी प्लांट में भेजी जा रही कचरे से तैयार खाद
भिवानी के आधुनिक ठोस कचरा प्रबंधन प्लांट में फिलहाल ठोस कचरे की प्रोसेसिंग के बाद मेटल और प्लास्टिक से अलग की गई खाद को स्थानीय किसानों के बजाय मुजफ्फरनगर स्थित एनर्जी प्लांट में भेजा जा रहा है। हालांकि स्थानीय किसानों को मांग पर खाद उपलब्ध कराई जा रही है लेकिन अभी तक अधिकांश किसान ठोस कचरे से बनने वाली खाद के प्रति जागरूक नहीं हैं। किसान फसल में शीघ्र परिणाम पाने के लिए डीएपी और यूरिया का ही अधिक प्रयोग कर रहे हैं।
ठोस कचरा प्रबंधन प्लांट संचालन के लिए अगले माह पर्यावरण एनओसी मिलने की संभावना है। जिसके बाद प्लांट स्थापित करने का काम तेजी से पूरा कराया जाएगा। फिलहाल चार प्रोसेसिंग यूनिट चल रही हैं। जिनके जरिए रोजाना ही प्लांट में 150 टन ठोस कचरे का निस्तारण किया जा रहा है। डंपिंग यार्ड में पहले से मौजूद अधिकांश कचरे का निस्तारण हो चुका है। कंपनी को नगर परिषद की तरफ से 22 साल की लीज पर 24 एकड़ प्लांट के लिए जगह दी है। नगर परिषद द्वारा कंपनी को 2350 रुपये प्रति टन के हिसाब से भुगतान करना है लेकिन प्लांट नहीं चालू होने तक कंपनी को 1410 रुपये प्रति टन के हिसाब से भुगतान किया जा रहा है। - सत्यवान सिंह, डायरेक्टर, श्रीश्याम इंटरप्राइजिज प्राइवेट लिमिटेड कंपनी
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इनमें भिवानी शहर से 145 टन, चरखी दादरी से 36 टन, बवानीखेड़ा से 12 टन और लोहारू से 14 टन ठोस कचरा प्रतिदिन प्लांट में लाया जा रहा है। डंपिंग यार्ड परिसर में पिछले करीब ढाई दशक में जमा 82 हजार टन ठोस कचरे में से 22 हजार टन पुराने कचरे का निस्तारण किया जा चुका है जबकि शेष करीब 60 हजार टन पुराने ठोस कचरे के निस्तारण का कार्य जारी है।
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दादरी रोड डंपिंग यार्ड की 24 एकड़ भूमि पर श्रीश्याम इंटरप्राइजिज प्राइवेट लिमिटेड कंपनी ने नगर परिषद से 22 साल की लीज पर जमीन लेकर अगस्त 2023 में ठोस कचरा निस्तारण का काम शुरू किया था। प्लांट पूरी तरह संचालित नहीं होने तक कंपनी को बीते दो वर्षों से ठोस कचरा निस्तारण के एवज में केवल 60 फीसदी राशि का ही भुगतान किया जा रहा है। पर्यावरण एनओसी मिलने और प्लांट निर्माण कार्य तेज होने पर यह भुगतान 80 फीसदी किया जाएगा जबकि प्लांट के पूर्ण संचालन के बाद कंपनी को शत प्रतिशत भुगतान सुनिश्चित किया जाएगा।
कंपनी ने चारों शहरों से रोजाना आने वाले ठोस कचरे और पुराने कचरे के निस्तारण के लिए चार प्रोसेसिंग मशीनें स्थापित की हैं। करीब 60 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले इस प्लांट में फिलहाल चहारदीवारी का निर्माण पूरा हो चुका है और इसके साथ नौ मीटर चौड़ी ग्रीन बेल्ट भी विकसित कर दी गई है। प्लांट के चारों ओर नौ मीटर चौड़ा सर्विस रोड बनाया जाएगा। इसके अलावा प्लांट में एक डिस्पोजल एरिया तैयार किया जाएगा। करीब साढ़े आठ एकड़ क्षेत्र में बड़ा पार्क विकसित किया जाएगा और साढ़े आठ एकड़ में प्रोसेसिंग यूनिट का शेड बनाया जाएगा जिसका आधार तैयार किया जा चुका है।
शहर से कचरा प्वाइंट हुए कम, नहीं हो रहा सूखा और गीला कचरा अलग
नगर परिषद ने शहर से करीब दस कचरा प्वाइंट समाप्त कर उन्हें सेल्फी प्वाइंट में तब्दील कर दिया है, लेकिन इसके बावजूद लोगों में सूखा और गीला कचरा अलग-अलग करने को लेकर जागरूकता नहीं आ पाई है। यही कारण है कि प्रत्येक वार्ड में पहुंचने वाले टिप्पर ऑटो में लोग घरों से निकलने वाला सूखा और गीला कचरा एक साथ डाल रहे हैं जिसे प्रोसेसिंग यूनिट तक भी मिश्रित रूप में ही पहुंचाया जा रहा है। प्रोसेसिंग यूनिट में ठोस कचरे को प्रोसेस कर खाद बनाने की प्रक्रिया चलाई जा रही है। भिवानी शहर के 31 वार्डों में घर-घर कूड़ा उठान के लिए 56 टिप्पर ऑटो लगे हैं जबकि चरखी दादरी शहर में 30 टिप्परों के माध्यम से ठोस कचरा एकत्रित किया जा रहा है। इसी प्रकार बवानीखेड़ा और लोहारू में पांच-पांच टिप्पर ऑटो घर-घर कूड़ा उठान का कार्य कर रहे हैं।
मुजफ्फरनगर के एनर्जी प्लांट में भेजी जा रही कचरे से तैयार खाद
भिवानी के आधुनिक ठोस कचरा प्रबंधन प्लांट में फिलहाल ठोस कचरे की प्रोसेसिंग के बाद मेटल और प्लास्टिक से अलग की गई खाद को स्थानीय किसानों के बजाय मुजफ्फरनगर स्थित एनर्जी प्लांट में भेजा जा रहा है। हालांकि स्थानीय किसानों को मांग पर खाद उपलब्ध कराई जा रही है लेकिन अभी तक अधिकांश किसान ठोस कचरे से बनने वाली खाद के प्रति जागरूक नहीं हैं। किसान फसल में शीघ्र परिणाम पाने के लिए डीएपी और यूरिया का ही अधिक प्रयोग कर रहे हैं।
ठोस कचरा प्रबंधन प्लांट संचालन के लिए अगले माह पर्यावरण एनओसी मिलने की संभावना है। जिसके बाद प्लांट स्थापित करने का काम तेजी से पूरा कराया जाएगा। फिलहाल चार प्रोसेसिंग यूनिट चल रही हैं। जिनके जरिए रोजाना ही प्लांट में 150 टन ठोस कचरे का निस्तारण किया जा रहा है। डंपिंग यार्ड में पहले से मौजूद अधिकांश कचरे का निस्तारण हो चुका है। कंपनी को नगर परिषद की तरफ से 22 साल की लीज पर 24 एकड़ प्लांट के लिए जगह दी है। नगर परिषद द्वारा कंपनी को 2350 रुपये प्रति टन के हिसाब से भुगतान करना है लेकिन प्लांट नहीं चालू होने तक कंपनी को 1410 रुपये प्रति टन के हिसाब से भुगतान किया जा रहा है। - सत्यवान सिंह, डायरेक्टर, श्रीश्याम इंटरप्राइजिज प्राइवेट लिमिटेड कंपनी