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Charkhi Dadri News: कानूनगो को रोवर मशीन का दिया प्रशिक्षण पर नहीं समझ पाए मशीन की कार्यप्रणाली
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
Updated Mon, 18 May 2026 01:54 AM IST
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चरखी दादरी। जिले में जमीन की रोवर मशीन से पैमाइश करने में कानूनगो खुद को सक्षम नहीं मान रहे हैं। पिछले दिनों दिए गए प्रशिक्षण से कानूनगो रोवर मशीन की कार्यप्रणाली एवं नियमावली को पूरी तरह से नहीं समझ पाए हैं।
जिले में सात सदस्यीय कानूनगो की टीम को रोवर मशीन से जमीन पैमाइश की जिम्मेदारी सौंपी गई है। अब तक पुराने ढर्रे पर जरीब आदि से जमीन की पैमाइश होती रही है। अब रोवर मशीन से जमीन की पैमाइश में सटीकता यानी एक्यूरेसी आएगी।
आधुनिक दौर में तकनीकी से काम शुरू होने पर अब कंप्यूटराइज पैमाइश होने जा रही है। जरीब से पैमाइश में पूरी तरह से सटीकता नहीं आ रही है। पैमाइश में तीन से चार फीट तक का अंतर आ जाता है। अब पैमाइश की नई तकनीक आने से इसमें सटीकता देखने को मिलेगी। ज्ञात रहे सरकारी व गैर सरकारी जमीन की पैमाइश का काम राजस्व विभाग ही करता है।
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पटवारी, गिरदावर व कानूनगो पैमाइश आदि का काम करते रहे हैं। जिले में कृषि भूमि का कुल रकबा एक लाख 22 हजार 378 हेक्टेयर क्षेत्र है। सरकारी व पंचायत जमीन इससे अलग है। समय-समय पर सरकार व विभाग के निर्देश पर जमीन की पैमाइश आदि का काम जारी रहता है। पैमाइश के लिए उच्च अधिकारी पटवारी या कानूनगो नियुक्त करते हैं।
पैमाइश की सरकारी फीस भी ली जाती है। जिले में जमीन की पैमाइश के लिए सात कानूनगो को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है। इन सात कानूनगो को ही रोवर मशीन का प्रशिक्षण दिया गया है। अब कानूनगो को प्रशिक्षण तो मिल गया है जबकि कानूनगो को रोवर मशीन की कार्यप्रणाली समझ नहीं आई है।
ऐसे में पैमाइश के कार्य शुरू होने में कुछ देरी हो सकती है। राजस्व विभाग जल्द ही इस विषय में मुख्यालय को पत्र लिखने जा रहा है ताकि कानूनगो को मशीन की पूरी तरह से जानकारी एवं समझ हो सके। दोबारा भी कानूनगो को प्रशिक्षण दिया जा सकता है। जिले में भर में करीब 70 पटवारी तैनात हैं।
जिले में सात सदस्यीय कानूनगो की टीम को रोवर मशीन से जमीन पैमाइश की जिम्मेदारी सौंपी गई है। अब तक पुराने ढर्रे पर जरीब आदि से जमीन की पैमाइश होती रही है। अब रोवर मशीन से जमीन की पैमाइश में सटीकता यानी एक्यूरेसी आएगी।
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आधुनिक दौर में तकनीकी से काम शुरू होने पर अब कंप्यूटराइज पैमाइश होने जा रही है। जरीब से पैमाइश में पूरी तरह से सटीकता नहीं आ रही है। पैमाइश में तीन से चार फीट तक का अंतर आ जाता है। अब पैमाइश की नई तकनीक आने से इसमें सटीकता देखने को मिलेगी। ज्ञात रहे सरकारी व गैर सरकारी जमीन की पैमाइश का काम राजस्व विभाग ही करता है।
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पैमाइश की सरकारी फीस भी ली जाती है। जिले में जमीन की पैमाइश के लिए सात कानूनगो को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है। इन सात कानूनगो को ही रोवर मशीन का प्रशिक्षण दिया गया है। अब कानूनगो को प्रशिक्षण तो मिल गया है जबकि कानूनगो को रोवर मशीन की कार्यप्रणाली समझ नहीं आई है।
ऐसे में पैमाइश के कार्य शुरू होने में कुछ देरी हो सकती है। राजस्व विभाग जल्द ही इस विषय में मुख्यालय को पत्र लिखने जा रहा है ताकि कानूनगो को मशीन की पूरी तरह से जानकारी एवं समझ हो सके। दोबारा भी कानूनगो को प्रशिक्षण दिया जा सकता है। जिले में भर में करीब 70 पटवारी तैनात हैं।