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Panipat News: रंगों की डाट लगा मनाया फाग महोत्सव
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इसराना। नौल्था गांव में लोगों ने रंगों की डाट लगाकर फाग महोत्सव मनाया और अपनी नौ शताब्दी से चली आ रही ऐतिहासिक फाग महोत्सव की परंपरा को कायम रखा।
महोत्सव से ग्रामीणों ने पहले बाबा लाठे और देवी-देवताओं की मनमोहक झांकियां निकाली। महोत्सव में दूर-दराज के क्षेत्रों से लोग शामिल हुए।
कमेटी प्रमुख खिलार सिंह जागलान और पवन जागलान ने बताया कि गांव में फाग महोत्सव पर रंगों की डाट लगाई जाती है यह गांव की वर्षों पुरानी पंरपंरा है। गांव के युवा आज भी इस को जोश व उत्साह से निभा रहे हैं। नौल्था के ऐतिहासिक रंगों की डाट फाग महोत्सव को देखने के लिए प्रदेशभर के अन्य जिलों भी लोग पहुंचे और फाग उत्सव का हिस्सा बने। नौल्था में इस बार भी परंपरा को कायम रखते हुए कढ़ाओं में उबला रंग ठंडा कर प्रमुख चौपालों पर रख गया। गांव की सभी बिरादरियों के लोग आपसी भेद भाव भुला कर चौपालों के नीचे गली में जमा हो गए व ऊपर से सभी पर रंग डाल कर रंगों की डाट की परंपरा निभाई गई।
रंगों की डाट के इस खेल में जाति, वर्ग, समुदाय व छोटे बड़े का भेदभाव भुला कर सभी ने एक दूसरे को रंग लगाया और प्रेमभाव से एक दूसरे को रंग लगा कर फाग महोत्सव मनाया। बाबा लाठे वाले व देवी देवताओं झांकी निकालकर महोत्सव का शुभारंभ हुआ-
पवन जागलान ने बताया कि गांव में फाग महोत्सव की शुरूआत परंपरा के अनुसार ग्रामीणों ने बाबा लाठे वाले व देवी देवताओं की झांकियां सजाकर पूरे गांव में शोभायात्रा निकाल कर की। पहले बाबा लाठे के मंदिर में पहुंच कर पूजा अर्चना की और उसके बाद गांव में शोभा यात्रा निकाली गई। अब की बार शोभा यात्रा में झोटा बुग्गी की जगह रथों का इस्तेमाल किया गया। शोभायात्रा के आगे ग्रामीण डीजे की ताल पर नाच रहे थे। महिलाओं ने धार्मिक गीत गाकर शोभायात्रा और झांकियों का आनंद लिया।
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महोत्सव से ग्रामीणों ने पहले बाबा लाठे और देवी-देवताओं की मनमोहक झांकियां निकाली। महोत्सव में दूर-दराज के क्षेत्रों से लोग शामिल हुए।
कमेटी प्रमुख खिलार सिंह जागलान और पवन जागलान ने बताया कि गांव में फाग महोत्सव पर रंगों की डाट लगाई जाती है यह गांव की वर्षों पुरानी पंरपंरा है। गांव के युवा आज भी इस को जोश व उत्साह से निभा रहे हैं। नौल्था के ऐतिहासिक रंगों की डाट फाग महोत्सव को देखने के लिए प्रदेशभर के अन्य जिलों भी लोग पहुंचे और फाग उत्सव का हिस्सा बने। नौल्था में इस बार भी परंपरा को कायम रखते हुए कढ़ाओं में उबला रंग ठंडा कर प्रमुख चौपालों पर रख गया। गांव की सभी बिरादरियों के लोग आपसी भेद भाव भुला कर चौपालों के नीचे गली में जमा हो गए व ऊपर से सभी पर रंग डाल कर रंगों की डाट की परंपरा निभाई गई।
रंगों की डाट के इस खेल में जाति, वर्ग, समुदाय व छोटे बड़े का भेदभाव भुला कर सभी ने एक दूसरे को रंग लगाया और प्रेमभाव से एक दूसरे को रंग लगा कर फाग महोत्सव मनाया। बाबा लाठे वाले व देवी देवताओं झांकी निकालकर महोत्सव का शुभारंभ हुआ-
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पवन जागलान ने बताया कि गांव में फाग महोत्सव की शुरूआत परंपरा के अनुसार ग्रामीणों ने बाबा लाठे वाले व देवी देवताओं की झांकियां सजाकर पूरे गांव में शोभायात्रा निकाल कर की। पहले बाबा लाठे के मंदिर में पहुंच कर पूजा अर्चना की और उसके बाद गांव में शोभा यात्रा निकाली गई। अब की बार शोभा यात्रा में झोटा बुग्गी की जगह रथों का इस्तेमाल किया गया। शोभायात्रा के आगे ग्रामीण डीजे की ताल पर नाच रहे थे। महिलाओं ने धार्मिक गीत गाकर शोभायात्रा और झांकियों का आनंद लिया।