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Yamuna Nagar News: ठगों ने व्हाट्सएप ग्रुप में जोड़ा साइबर पुलिस का सीयूजी नंबर
Mon, 10 Aug 2026 12:51 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Mon, 10 Aug 2026 12:51 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। ठगों ने साइबर थाना पुलिस के सरकारी सीयूजी मोबाइल नंबर को कई व्हाट्सएप ग्रुप में जोड़ दिया। इन ग्रुपों में बाद में अश्लील और आपत्तिजनक फोटो-वीडियो भेजे गए। मामला सामने आने के बाद साइबर सेल के उपनिरीक्षक विशाल सैनी की शिकायत पर पुलिस ने पृथ्वीराज, हरीकेश और जितेंद्र यादव के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर जांच कर रही है।
साइबर क्राइम थाना पुलिस ठगी के मामले की जांच कर रही थी। इस दौरान कुछ संदिग्ध मोबाइल नंबर सामने आए। इनकी गतिविधियों पर नजर रखते हुए पुलिस आरोपी तक पहुंचने की कोशिश कर रही थी। इसी दौरान पुलिस के सरकारी नंबर को अलग-अलग व्हाट्सएप ग्रुप में जोड़ दिया गया। कुछ समय बाद इन ग्रुपों में आपत्तिजनक सामग्री साझा होने लगी।
पुलिस को आशंका है कि इन ग्रुपों का इस्तेमाल लोगों को साइबर ठगी के जाल में फंसाने के लिए किया जा रहा था। संदिग्ध गिरोह पहले वीडियो कॉल के जरिए लोगों से संपर्क करता है। बातचीत के दौरान फोटो या वीडियो हासिल करने के बाद अश्लील सामग्री तैयार की जाती है। साइबर क्राइम थाना प्रभारी रविंद्र कुमार ने बताया कि पता लगाया जा रहा इन ग्रुपों का इस्तेमाल किन अपराधों के लिए किया गया हैा।
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यमुनानगर। ठगों ने साइबर थाना पुलिस के सरकारी सीयूजी मोबाइल नंबर को कई व्हाट्सएप ग्रुप में जोड़ दिया। इन ग्रुपों में बाद में अश्लील और आपत्तिजनक फोटो-वीडियो भेजे गए। मामला सामने आने के बाद साइबर सेल के उपनिरीक्षक विशाल सैनी की शिकायत पर पुलिस ने पृथ्वीराज, हरीकेश और जितेंद्र यादव के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर जांच कर रही है।
साइबर क्राइम थाना पुलिस ठगी के मामले की जांच कर रही थी। इस दौरान कुछ संदिग्ध मोबाइल नंबर सामने आए। इनकी गतिविधियों पर नजर रखते हुए पुलिस आरोपी तक पहुंचने की कोशिश कर रही थी। इसी दौरान पुलिस के सरकारी नंबर को अलग-अलग व्हाट्सएप ग्रुप में जोड़ दिया गया। कुछ समय बाद इन ग्रुपों में आपत्तिजनक सामग्री साझा होने लगी।
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पुलिस को आशंका है कि इन ग्रुपों का इस्तेमाल लोगों को साइबर ठगी के जाल में फंसाने के लिए किया जा रहा था। संदिग्ध गिरोह पहले वीडियो कॉल के जरिए लोगों से संपर्क करता है। बातचीत के दौरान फोटो या वीडियो हासिल करने के बाद अश्लील सामग्री तैयार की जाती है। साइबर क्राइम थाना प्रभारी रविंद्र कुमार ने बताया कि पता लगाया जा रहा इन ग्रुपों का इस्तेमाल किन अपराधों के लिए किया गया हैा।
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