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Bilaspur News: फोरलेन के दायरे में आने वाले मकानों में बिजली कनेक्शन पर विभागीय जांच रिपोर्ट तैयार
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
Updated Thu, 12 Mar 2026 11:55 PM IST
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एक्सक्लूसिव
मुआवजा मिलने के बाद भी कई भवनों में जारी है बिजली कनेक्शन
शिकायत पर बनी विभागीय जांच समिति ने कई रिकॉर्ड खंगाले
2023 में कुछ उपभोक्ताओं के कनेक्शन काटे गए, कई अभी भी चालू
कई मामलों में जमीन का कब्जा अभी लंबित, स्पष्ट आदेश का इंतजार
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। कीरतपुर-नेरचौक फोरलेन परियोजना के दायरे में आने वाले मकानों में बिजली आपूर्ति जारी रहने के मामले में गठित विभागीय जांच समिति ने अपनी जांच रिपोर्ट तैयार कर ली है। जांच में पाया गया है कि कई मकान के मालिकों को मुआवजा मिलने के बावजूद अभी तक प्रशासन द्वारा सभी स्थानों पर कब्जा नहीं लिया गया है। ऐसे में कुछ भवनों में बिजली कनेक्शन पहले ही काट दिए गए हैं, जबकि कई स्थानों पर बिजली सप्लाई अब भी जारी है।
हिमाचल प्रदेश राज्य विद्युत बोर्ड लिमिटेड के ऑपरेशन सर्कल बिलासपुर के अधीक्षण अभियंता की ओर से 20 दिसंबर 2025 को इस मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित की गई थी। समिति में सहायक अभियंता दिनेश कौंडल को अध्यक्ष, सहायक कार्यकारी अभियंता रविंद्र चौधरी को सदस्य और सहायक अभियंता सुरेंद्र पटयाल को सदस्य सचिव बनाया गया। समिति को घुमारवीं उपमंडल के कंदरौर विद्युत उपमंडल से जुड़े इस मामले की जांच कर तथ्य स्पष्ट करने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।
जांच की शुरुआत एक शिकायत के आधार पर हुई। शिकायतकर्ता ने विभाग को कई बार पत्र लिखकर कहा था कि फोरलेन परियोजना के लिए जिन भवनों का अधिग्रहण किया गया है और उनके मालिकों को मुआवजा भी मिल चुका है, उनमें से कई लोगों ने अभी तक जमीन खाली नहीं की है और उन भवनों में बिजली आपूर्ति जारी है। समिति ने 12 जनवरी 2026 को विद्युत उपमंडल कंदरौर कार्यालय में बैठक कर शिकायतकर्ता से विस्तार से बातचीत की और रिकॉर्ड की जांच की। बाद में शिकायतकर्ता ने 19 जनवरी 2026 को भवनों की तस्वीरों सहित विस्तृत प्रतिनिधित्व भी विभाग को सौंपा।
शिकायतकर्ता के अनुसार रोहिण, पनोह, पलथीं, बकरोआ और औहर मौजा में कई भवन अब भी मौजूद हैं और उनमें बिजली सप्लाई हो रही है। जांच के दौरान विद्युत उपमंडल कंदरौर में तैनात वरिष्ठ सहायक (कॉमर्शियल) राजेश कुमार के बयान भी दर्ज किए गए। उन्होंने बताया कि वर्ष 2023 में उन उपभोक्ताओं के बिजली कनेक्शन काट दिए गए थे जिनके भवन फोरलेन परियोजना के राइट ऑफ वे में आते थे और जिनको मुआवजा मिल चुका था। हालांकि समिति की जांच में यह भी सामने आया कि कई अन्य भवनों में अभी भी बिजली सप्लाई जारी है और यह स्पष्ट नहीं हो पाया कि इन कनेक्शनों को अब तक क्यों नहीं काटा गया। विभागीय रिकॉर्ड में इस संबंध में कोई स्पष्ट कारण दर्ज नहीं मिला। शिकायतकर्ता ने रोहिण निवासी के घर के बिजली मीटर को अस्थायी शेड में शिफ्ट कर फिर से उसी भवन में लगाने का आरोप भी लगाया था। जांच के दौरान विभागीय रिकॉर्ड खंगाले गए, लेकिन मीटर शिफ्ट किए जाने का कोई प्रमाण नहीं मिला और न ही इसके लिए कोई सेंड्री जॉब ऑर्डर जारी हुआ है। विभाग के अनुसार मीटर उसी पते पर दर्ज है। समिति ने यह भी पाया कि राजस्व विभाग और राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के रिकॉर्ड के अनुसार कई भवनों को पहले ही गिराया जा चुका है। कुछ संरचनाएं संबंधित खसरा नंबरों के अनुसार चिह्नित नहीं हो पाईं, जबकि कई मामलों में जमीन का कब्जा लेने की प्रक्रिया अभी भी प्रशासनिक स्तर पर लंबित है।
इनसेट
लगातार बदलती रहती है संरचनाओं और अतिक्रमण की स्थिति
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि संरचनाओं और अतिक्रमण की स्थिति लगातार बदलती रहती है क्योंकि इस संबंध में राजस्व विभाग, राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण और जिला प्रशासन की कार्रवाई जारी रहती है। समिति ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया कि यह मामला मुख्य रूप से भूमि अधिग्रहण, कब्जा और अतिक्रमण हटाने से जुड़ा है, जो राजस्व विभाग और राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के अधिकार क्षेत्र में आता है। बिजली विभाग केवल सक्षम प्राधिकारी के लिखित आदेश के आधार पर ही बिजली कनेक्शन काट सकता है।
इनसेट
संयुक्त निरीक्षण के बाद ही बिजली कनेक्शन पर होगा अंतिम फैसला
समिति ने सिफारिश की है कि एसडीएम घुमारवीं, भूमि अधिग्रहण अधिकारी बिलासपुर और राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के साथ मिलकर एक संयुक्त निरीक्षण किया जाए। इस निरीक्षण में राजस्व विभाग, बिजली विभाग, जल शक्ति विभाग, पुलिस और संबंधित फील्ड स्टाफ को भी शामिल किया जाए ताकि मौके पर वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके। समिति के अनुसार संयुक्त निरीक्षण के बाद ही एक प्रमाणित सूची तैयार की जानी चाहिए, जिससे यह स्पष्ट हो कि किन भवनों को मुआवजा मिला है, किनका कब्जा लिया जा चुका है और किन मामलों में बिजली कनेक्शन काटने की आवश्यकता है। इसके आधार पर ही आगे की कार्रवाई की जानी चाहिए।
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मुआवजा मिलने के बाद भी कई भवनों में जारी है बिजली कनेक्शन
शिकायत पर बनी विभागीय जांच समिति ने कई रिकॉर्ड खंगाले
2023 में कुछ उपभोक्ताओं के कनेक्शन काटे गए, कई अभी भी चालू
कई मामलों में जमीन का कब्जा अभी लंबित, स्पष्ट आदेश का इंतजार
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। कीरतपुर-नेरचौक फोरलेन परियोजना के दायरे में आने वाले मकानों में बिजली आपूर्ति जारी रहने के मामले में गठित विभागीय जांच समिति ने अपनी जांच रिपोर्ट तैयार कर ली है। जांच में पाया गया है कि कई मकान के मालिकों को मुआवजा मिलने के बावजूद अभी तक प्रशासन द्वारा सभी स्थानों पर कब्जा नहीं लिया गया है। ऐसे में कुछ भवनों में बिजली कनेक्शन पहले ही काट दिए गए हैं, जबकि कई स्थानों पर बिजली सप्लाई अब भी जारी है।
हिमाचल प्रदेश राज्य विद्युत बोर्ड लिमिटेड के ऑपरेशन सर्कल बिलासपुर के अधीक्षण अभियंता की ओर से 20 दिसंबर 2025 को इस मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित की गई थी। समिति में सहायक अभियंता दिनेश कौंडल को अध्यक्ष, सहायक कार्यकारी अभियंता रविंद्र चौधरी को सदस्य और सहायक अभियंता सुरेंद्र पटयाल को सदस्य सचिव बनाया गया। समिति को घुमारवीं उपमंडल के कंदरौर विद्युत उपमंडल से जुड़े इस मामले की जांच कर तथ्य स्पष्ट करने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।
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जांच की शुरुआत एक शिकायत के आधार पर हुई। शिकायतकर्ता ने विभाग को कई बार पत्र लिखकर कहा था कि फोरलेन परियोजना के लिए जिन भवनों का अधिग्रहण किया गया है और उनके मालिकों को मुआवजा भी मिल चुका है, उनमें से कई लोगों ने अभी तक जमीन खाली नहीं की है और उन भवनों में बिजली आपूर्ति जारी है। समिति ने 12 जनवरी 2026 को विद्युत उपमंडल कंदरौर कार्यालय में बैठक कर शिकायतकर्ता से विस्तार से बातचीत की और रिकॉर्ड की जांच की। बाद में शिकायतकर्ता ने 19 जनवरी 2026 को भवनों की तस्वीरों सहित विस्तृत प्रतिनिधित्व भी विभाग को सौंपा।
शिकायतकर्ता के अनुसार रोहिण, पनोह, पलथीं, बकरोआ और औहर मौजा में कई भवन अब भी मौजूद हैं और उनमें बिजली सप्लाई हो रही है। जांच के दौरान विद्युत उपमंडल कंदरौर में तैनात वरिष्ठ सहायक (कॉमर्शियल) राजेश कुमार के बयान भी दर्ज किए गए। उन्होंने बताया कि वर्ष 2023 में उन उपभोक्ताओं के बिजली कनेक्शन काट दिए गए थे जिनके भवन फोरलेन परियोजना के राइट ऑफ वे में आते थे और जिनको मुआवजा मिल चुका था। हालांकि समिति की जांच में यह भी सामने आया कि कई अन्य भवनों में अभी भी बिजली सप्लाई जारी है और यह स्पष्ट नहीं हो पाया कि इन कनेक्शनों को अब तक क्यों नहीं काटा गया। विभागीय रिकॉर्ड में इस संबंध में कोई स्पष्ट कारण दर्ज नहीं मिला। शिकायतकर्ता ने रोहिण निवासी के घर के बिजली मीटर को अस्थायी शेड में शिफ्ट कर फिर से उसी भवन में लगाने का आरोप भी लगाया था। जांच के दौरान विभागीय रिकॉर्ड खंगाले गए, लेकिन मीटर शिफ्ट किए जाने का कोई प्रमाण नहीं मिला और न ही इसके लिए कोई सेंड्री जॉब ऑर्डर जारी हुआ है। विभाग के अनुसार मीटर उसी पते पर दर्ज है। समिति ने यह भी पाया कि राजस्व विभाग और राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के रिकॉर्ड के अनुसार कई भवनों को पहले ही गिराया जा चुका है। कुछ संरचनाएं संबंधित खसरा नंबरों के अनुसार चिह्नित नहीं हो पाईं, जबकि कई मामलों में जमीन का कब्जा लेने की प्रक्रिया अभी भी प्रशासनिक स्तर पर लंबित है।
इनसेट
लगातार बदलती रहती है संरचनाओं और अतिक्रमण की स्थिति
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि संरचनाओं और अतिक्रमण की स्थिति लगातार बदलती रहती है क्योंकि इस संबंध में राजस्व विभाग, राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण और जिला प्रशासन की कार्रवाई जारी रहती है। समिति ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया कि यह मामला मुख्य रूप से भूमि अधिग्रहण, कब्जा और अतिक्रमण हटाने से जुड़ा है, जो राजस्व विभाग और राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के अधिकार क्षेत्र में आता है। बिजली विभाग केवल सक्षम प्राधिकारी के लिखित आदेश के आधार पर ही बिजली कनेक्शन काट सकता है।
इनसेट
संयुक्त निरीक्षण के बाद ही बिजली कनेक्शन पर होगा अंतिम फैसला
समिति ने सिफारिश की है कि एसडीएम घुमारवीं, भूमि अधिग्रहण अधिकारी बिलासपुर और राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के साथ मिलकर एक संयुक्त निरीक्षण किया जाए। इस निरीक्षण में राजस्व विभाग, बिजली विभाग, जल शक्ति विभाग, पुलिस और संबंधित फील्ड स्टाफ को भी शामिल किया जाए ताकि मौके पर वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके। समिति के अनुसार संयुक्त निरीक्षण के बाद ही एक प्रमाणित सूची तैयार की जानी चाहिए, जिससे यह स्पष्ट हो कि किन भवनों को मुआवजा मिला है, किनका कब्जा लिया जा चुका है और किन मामलों में बिजली कनेक्शन काटने की आवश्यकता है। इसके आधार पर ही आगे की कार्रवाई की जानी चाहिए।