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Bilaspur News: मारपीट के मामले में चार आरोपी बरी
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साक्ष्यों में विरोधाभास से नहीं हो सका आरोप साबित
घुमारवीं न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी ने दिया फैसला
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। घुमारवीं न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी (जेएमएफसी) कोर्ट नंबर-2 ने मारपीट, गाली-गलौज और धमकी के मामले में चार आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित करने में असफल रहा और गवाहों के बयानों में कई विरोधाभास पाए गए।
पुलिस थाना घुमारवीं में 31 जनवरी 2021 को एफआईआर दर्ज की गई। शिकायत में बताया कि उस दिन शाम करीब साढ़े छह बजे गांव में रास्ता रोककर मारपीट की घटना हुई थी। आरोप था कि आरोपियों ने शिकायतकर्ता और अन्य लोगों के साथ मारपीट की, गाली-गलौज की तथा जान से मारने की धमकी दी। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच के बाद चालान अदालत में पेश किया। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से आठ गवाहों को अदालत में पेश किया गया। अदालत ने पाया कि गवाहों के बयानों में कई विरोधाभास हैं। कुछ गवाह जिरह के लिए दोबारा अदालत में पेश नहीं हुए, जबकि कुछ गवाह पहले के बयानों से मुकर गए।
अदालत ने यह भी माना कि कथित चोटों से संबंधित मेडिकल साक्ष्य भी विधिसम्मत तरीके से साबित नहीं किए जा सके। अदालत ने चारों आरोपियों को सभी धाराओं से बरी करते हुए उनके जमानती बांड समाप्त करने के आदेश दिए। साथ ही केस संपत्ति को नियमानुसार राज्य के पक्ष में जब्त करने के निर्देश दिए हैं।
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घुमारवीं न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी ने दिया फैसला
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। घुमारवीं न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी (जेएमएफसी) कोर्ट नंबर-2 ने मारपीट, गाली-गलौज और धमकी के मामले में चार आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित करने में असफल रहा और गवाहों के बयानों में कई विरोधाभास पाए गए।
पुलिस थाना घुमारवीं में 31 जनवरी 2021 को एफआईआर दर्ज की गई। शिकायत में बताया कि उस दिन शाम करीब साढ़े छह बजे गांव में रास्ता रोककर मारपीट की घटना हुई थी। आरोप था कि आरोपियों ने शिकायतकर्ता और अन्य लोगों के साथ मारपीट की, गाली-गलौज की तथा जान से मारने की धमकी दी। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच के बाद चालान अदालत में पेश किया। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से आठ गवाहों को अदालत में पेश किया गया। अदालत ने पाया कि गवाहों के बयानों में कई विरोधाभास हैं। कुछ गवाह जिरह के लिए दोबारा अदालत में पेश नहीं हुए, जबकि कुछ गवाह पहले के बयानों से मुकर गए।
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अदालत ने यह भी माना कि कथित चोटों से संबंधित मेडिकल साक्ष्य भी विधिसम्मत तरीके से साबित नहीं किए जा सके। अदालत ने चारों आरोपियों को सभी धाराओं से बरी करते हुए उनके जमानती बांड समाप्त करने के आदेश दिए। साथ ही केस संपत्ति को नियमानुसार राज्य के पक्ष में जब्त करने के निर्देश दिए हैं।