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Chamba News: चार कोड लागू करने के विरोध में मनाया काला दिवस
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
Updated Wed, 01 Apr 2026 11:05 PM IST
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चंबा में काले बिल्ले लगा विरोध जताती मिड डेम मील वर्कर।स्रोत जागरूक पाठक
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चंबा। सीटू के बैनर तले हिमाचल प्रदेश के मजदूरों ने मजदूर विरोधी चार लेबर कोड को लागू करने के खिलाफ प्रदेशव्यापी काला दिवस मनाया।
इस दौरान विभिन्न कार्यस्थलों पर काली पट्टी और काले बिल्ले लगाकर विरोध जताया। उन्होंने देश की केंद्र सरकार से मजदूर विरोधी चार लेबर कोड को रद्द करने की मांग की। सीटू के जिला अध्यक्ष नरेंद्र और जिला महासचिव सुदेश ठाकुर ने कहा कि लेबर कोड लागू होने से सत्तर प्रतिशत उद्योग और 74 प्रतिशत मजदूर श्रम कानूनों के दायरे से बाहर हो जाएंगे। हड़ताल करने पर मजदूरों को कड़ी सजा और जुर्माने का प्रावधान किया गया है। पक्के किस्म के रोजगार के बजाय ठेका प्रथा और फिक्स टर्म रोजगार को बढ़ावा दिया जाएगा। काम के घंटे आठ के बजाय बारह घंटे करने से बंधुआ मजदूरी स्थापित होगी। कहा कि भारत सरकार द्वारा लागू की जा रही चार श्रम संहिताएं देश के श्रमिक वर्ग के अधिकारों पर गंभीर आघात हैं। इन संहिताओं के माध्यम से दशकों के संघर्ष से प्राप्त श्रम कानूनों को कमजोर किया जा रहा है। जिससे श्रमिकों की नौकरी की सुरक्षा, वेतन, सामाजिक सुरक्षा एवं ट्रेड यूनियन अधिकारों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। इस मौके पर आंगनबाड़ी यूनियन की जिला अध्यक्ष सरोज, सचिव अंजू देवी, मिड डे मील यूनियन के अध्यक्ष विपिन कुमार, सचिव सरोज कुमारी, कौशल्या देवी सविता, जिला उपाध्यक्ष विपिन शर्मा, जिला कमेटी सदस्य प्रेम, चंपा देवी ने मांग की है कि चारों श्रम संहिताओं को तत्काल प्रभाव से वापस लिया जाए क्योंकि ये मजदूर विरोधी हैं और श्रमिक हितों के विरुद्ध हैं। ठेका प्रथा पर नियंत्रण लगाया जाए तथा स्थायी रोजगार को बढ़ावा दिया जाए। सभी श्रमिकों के लिए सामाजिक सुरक्षा, ईपीएफ, ईएसआई, पेंशन, ग्रेच्युटी आदि सुविधा सुनिश्चित की जाए। ट्रेड यूनियन अधिकारों की रक्षा की जाए, और श्रमिकों को संगठन एवं आंदोलन का संवैधानिक अधिकार सुनिश्चित किया जाए।
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इस दौरान विभिन्न कार्यस्थलों पर काली पट्टी और काले बिल्ले लगाकर विरोध जताया। उन्होंने देश की केंद्र सरकार से मजदूर विरोधी चार लेबर कोड को रद्द करने की मांग की। सीटू के जिला अध्यक्ष नरेंद्र और जिला महासचिव सुदेश ठाकुर ने कहा कि लेबर कोड लागू होने से सत्तर प्रतिशत उद्योग और 74 प्रतिशत मजदूर श्रम कानूनों के दायरे से बाहर हो जाएंगे। हड़ताल करने पर मजदूरों को कड़ी सजा और जुर्माने का प्रावधान किया गया है। पक्के किस्म के रोजगार के बजाय ठेका प्रथा और फिक्स टर्म रोजगार को बढ़ावा दिया जाएगा। काम के घंटे आठ के बजाय बारह घंटे करने से बंधुआ मजदूरी स्थापित होगी। कहा कि भारत सरकार द्वारा लागू की जा रही चार श्रम संहिताएं देश के श्रमिक वर्ग के अधिकारों पर गंभीर आघात हैं। इन संहिताओं के माध्यम से दशकों के संघर्ष से प्राप्त श्रम कानूनों को कमजोर किया जा रहा है। जिससे श्रमिकों की नौकरी की सुरक्षा, वेतन, सामाजिक सुरक्षा एवं ट्रेड यूनियन अधिकारों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। इस मौके पर आंगनबाड़ी यूनियन की जिला अध्यक्ष सरोज, सचिव अंजू देवी, मिड डे मील यूनियन के अध्यक्ष विपिन कुमार, सचिव सरोज कुमारी, कौशल्या देवी सविता, जिला उपाध्यक्ष विपिन शर्मा, जिला कमेटी सदस्य प्रेम, चंपा देवी ने मांग की है कि चारों श्रम संहिताओं को तत्काल प्रभाव से वापस लिया जाए क्योंकि ये मजदूर विरोधी हैं और श्रमिक हितों के विरुद्ध हैं। ठेका प्रथा पर नियंत्रण लगाया जाए तथा स्थायी रोजगार को बढ़ावा दिया जाए। सभी श्रमिकों के लिए सामाजिक सुरक्षा, ईपीएफ, ईएसआई, पेंशन, ग्रेच्युटी आदि सुविधा सुनिश्चित की जाए। ट्रेड यूनियन अधिकारों की रक्षा की जाए, और श्रमिकों को संगठन एवं आंदोलन का संवैधानिक अधिकार सुनिश्चित किया जाए।