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Mandi News: चेक बाउंस के मामले में कारोबारी दोषी करार
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जेएमएफसी सुंदरनगर की अदालत का फैसला
संवाद न्यूज एजेंसी
मंडी। दो लाख रुपये की कानूनी देनदारी के बदले जारी दो चेक बाउंस होने के मामले में न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी (जेएमएफसी) सुंदरनगर की अदालत ने आरोपी कारोबारी तारिक उर्फ गुड्डू को दोषी करार दिया है। अदालत ने आरोपी को परक्राम्य लिखत अधिनियम (एनआई एक्ट) की धारा 138 के तहत दोष सिद्ध ठहराते हुए सजा के निर्धारण के लिए 12 अगस्त की तिथि तय की है।
अदालत में दायर परिवाद के अनुसार सुंदरनगर निवासी आमना ने वर्ष 2022 में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में कहा गया कि आरोपी ने नौ नवंबर 2021 को एक-एक लाख रुपये के दो चेक अपनी कानूनी देनदारी के निर्वहन के लिए जारी किए थे। पंजाब नेशनल बैंक के माध्यम से प्रस्तुत किए गए दोनों चेक 12 नवंबर 2021 को खाते में पर्याप्त धनराशि नहीं होने के कारण बाउंस हो गए। इसके बाद सात दिसंबर 2021 को कानूनी नोटिस भेजा गया लेकिन निर्धारित अवधि में भुगतान नहीं किया गया।
सुनवाई के दौरान आरोपी ने दलील दी कि उसने शिकायतकर्ता को हस्ताक्षरित खाली चेक दिए थे और उधार की राशि लौटा दी थी। अदालत ने पाया कि आरोपी अपने दावों के समर्थन में कोई विश्वसनीय साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सका और उसने चेकों पर अपने हस्ताक्षर भी स्वीकार किए। अदालत ने कहा कि केवल चेक को ब्लैंक साइन चेक बताने से दायित्व समाप्त नहीं होता। शिकायतकर्ता ने दस्तावेजी और मौखिक साक्ष्यों से अपना मामला सिद्ध किया, जबकि आरोपी कानूनी अनुमान को खंडित करने में असफल रहा।
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संवाद न्यूज एजेंसी
मंडी। दो लाख रुपये की कानूनी देनदारी के बदले जारी दो चेक बाउंस होने के मामले में न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी (जेएमएफसी) सुंदरनगर की अदालत ने आरोपी कारोबारी तारिक उर्फ गुड्डू को दोषी करार दिया है। अदालत ने आरोपी को परक्राम्य लिखत अधिनियम (एनआई एक्ट) की धारा 138 के तहत दोष सिद्ध ठहराते हुए सजा के निर्धारण के लिए 12 अगस्त की तिथि तय की है।
अदालत में दायर परिवाद के अनुसार सुंदरनगर निवासी आमना ने वर्ष 2022 में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में कहा गया कि आरोपी ने नौ नवंबर 2021 को एक-एक लाख रुपये के दो चेक अपनी कानूनी देनदारी के निर्वहन के लिए जारी किए थे। पंजाब नेशनल बैंक के माध्यम से प्रस्तुत किए गए दोनों चेक 12 नवंबर 2021 को खाते में पर्याप्त धनराशि नहीं होने के कारण बाउंस हो गए। इसके बाद सात दिसंबर 2021 को कानूनी नोटिस भेजा गया लेकिन निर्धारित अवधि में भुगतान नहीं किया गया।
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सुनवाई के दौरान आरोपी ने दलील दी कि उसने शिकायतकर्ता को हस्ताक्षरित खाली चेक दिए थे और उधार की राशि लौटा दी थी। अदालत ने पाया कि आरोपी अपने दावों के समर्थन में कोई विश्वसनीय साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सका और उसने चेकों पर अपने हस्ताक्षर भी स्वीकार किए। अदालत ने कहा कि केवल चेक को ब्लैंक साइन चेक बताने से दायित्व समाप्त नहीं होता। शिकायतकर्ता ने दस्तावेजी और मौखिक साक्ष्यों से अपना मामला सिद्ध किया, जबकि आरोपी कानूनी अनुमान को खंडित करने में असफल रहा।
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