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Mandi News: करसोग पंचायत समिति में कांग्रेस समर्थित अध्यक्ष-उपाध्यक्ष काबिज
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करसोग पंचायत समिति में अध्यक्ष व उपाध्यक्ष पद पर काबिज हुए कांग्रेस समर्थित सदस्य। संवाद
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करसोग (मंडी)। करसोग पंचायत समिति के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद के चुनाव ने मंडी जिले की सियासत में बड़ा संदेश दिया है। स्पष्ट बहुमत होने के बावजूद भाजपा समर्थित खेमा पंचायत समिति की दोनों शीर्ष कुर्सियां बचाने में नाकाम रहा। कांग्रेस ने संख्या बल में पिछड़ने के बावजूद रणनीतिक बढ़त हासिल करते हुए अध्यक्ष और उपाध्यक्ष दोनों पद अपने पक्ष में कर लिए। परिणाम सामने आने के बाद स्थानीय राजनीति में क्रॉस वोटिंग और अंदरूनी असंतोष को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
अध्यक्ष पद पर कांग्रेस समर्थित इशरा मेहता और उपाध्यक्ष पद पर कली चौहान ने एक-एक वोट के अंतर से जीत दर्ज की। चुनाव परिणाम घोषित होते ही कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने इसे रणनीति और राजनीतिक प्रबंधन की जीत बताया जबकि भाजपा खेमे में आत्ममंथन शुरू हो गया।
करसोग पंचायत समिति के 15 सदस्यीय सदन में भाजपा समर्थित 10 सदस्य, कांग्रेस समर्थित चार सदस्य और एक निर्दलीय सदस्य निर्वाचित हुआ था। ऐसे में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष दोनों पदों पर भाजपा की जीत लगभग तय मानी जा रही थी लेकिन मतदान के दौरान बदले समीकरणों ने पूरी तस्वीर बदल दी। एक-एक वोट के अंतर से मिली जीत ने यह संकेत भी दिया कि भाजपा समर्थित खेमे में कहीं न कहीं सेंध लगी।
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सूत्रों के अनुसार मतदान से पहले दोनों दलों ने अपने-अपने समर्थित सदस्यों को एकजुट रखने के लिए लगातार प्रयास किए। भाजपा ने भी किसी प्रकार की टूट-फूट रोकने के लिए पूरी ताकत झोंकी थी लेकिन अंतिम समय में बने राजनीतिक समीकरण उसके पक्ष में नहीं रहे। वहीं, कांग्रेस ने सीमित संख्या होने के बावजूद प्रभावी रणनीति अपनाकर सत्ता की दोनों अहम कुर्सियों पर कब्जा कर लिया। इस घटनाक्रम को केवल पंचायत समिति का चुनाव नहीं, बल्कि क्षेत्र की बदलती राजनीतिक बिसात के रूप में भी देखा जा रहा है।
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अध्यक्ष पद पर कांग्रेस समर्थित इशरा मेहता और उपाध्यक्ष पद पर कली चौहान ने एक-एक वोट के अंतर से जीत दर्ज की। चुनाव परिणाम घोषित होते ही कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने इसे रणनीति और राजनीतिक प्रबंधन की जीत बताया जबकि भाजपा खेमे में आत्ममंथन शुरू हो गया।
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करसोग पंचायत समिति के 15 सदस्यीय सदन में भाजपा समर्थित 10 सदस्य, कांग्रेस समर्थित चार सदस्य और एक निर्दलीय सदस्य निर्वाचित हुआ था। ऐसे में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष दोनों पदों पर भाजपा की जीत लगभग तय मानी जा रही थी लेकिन मतदान के दौरान बदले समीकरणों ने पूरी तस्वीर बदल दी। एक-एक वोट के अंतर से मिली जीत ने यह संकेत भी दिया कि भाजपा समर्थित खेमे में कहीं न कहीं सेंध लगी।
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सूत्रों के अनुसार मतदान से पहले दोनों दलों ने अपने-अपने समर्थित सदस्यों को एकजुट रखने के लिए लगातार प्रयास किए। भाजपा ने भी किसी प्रकार की टूट-फूट रोकने के लिए पूरी ताकत झोंकी थी लेकिन अंतिम समय में बने राजनीतिक समीकरण उसके पक्ष में नहीं रहे। वहीं, कांग्रेस ने सीमित संख्या होने के बावजूद प्रभावी रणनीति अपनाकर सत्ता की दोनों अहम कुर्सियों पर कब्जा कर लिया। इस घटनाक्रम को केवल पंचायत समिति का चुनाव नहीं, बल्कि क्षेत्र की बदलती राजनीतिक बिसात के रूप में भी देखा जा रहा है।