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Rampur Bushahar News: चेक बाउंस के दोषी को आठ महीने का कारावास
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अदालत ने दोषी को 1.55 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया
संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर बुशहर। चेक बाउंस के मामले में दोषी को अदालत ने आठ महीने के साधारण कारावास की सजा सुनाई है। अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, कोर्ट नंबर 1 रोहड़ू की अदालत ने दोषी को 1.55 लाख रुपये जुर्माना भी लगाया है। शिकायतकर्ता रोहड़ू क्षेत्र के महेंद्र सिंह और मामले में दोषी दीवान सिंह एक ही क्षेत्र के निवासी होने के नाते एक-दूसरे को अच्छी तरह से जानते हैं। जनवरी 2020 को आरोपी ने शिकायतकर्ता से संपर्क किया। आरोपी ने 1.50 लाख रुपये की मदद मांगी और आश्वासन दिया कि आठ माह लौटा देगा। शिकायतकर्ता ने आरोपी पर पूरा भरोसा करते हुए राशि सौंप दी। आरोपी ने अगस्त में 1.50 लाख रुपये की राशि के लिए एक हस्ताक्षरित मल्टी-सिटी चेक जारी किया, जो बाउंस हो गया। शिकायतकर्ता ने वकील के माध्यम से आरोपी को कानूनी नोटिस भेजा, जिसमें नोटिस प्राप्त होने के 15 दिनों के भीतर चेक राशि का भुगतान करने की मांग की गई थी। नोटिस आरोपी को प्राप्त हुआ, लेकिन वह राशि का भुगतान करने में विफल रहा। इसके बाद यह शिकायत दर्ज की गई। आरोपी को इस जुर्म के लिए नोटिस दिया गया, जिस पर उसने खुद को बेगुनाह बताया और ट्रायल का दावा किया। अदालत ने फैसला दिया है कि शिकायतकर्ता ने एनआई अधिनियम की धारा-138 के तहत दंडनीय अपराध के सभी आवश्यक तत्वों को सफलतापूर्वक साबित कर दिया है। आरोपी शिकायतकर्ता के पक्ष में उत्पन्न वैधानिक अनुमान का खंडन करने में विफल रहा है। मौजूदा मामले के तथ्यों और दलीलों को ध्यान में रखते हुए दोषी को आठ महीने की साधारण जेल की सजा सुनाई जाती है। उसे 1.55 लाख रुपये का जुर्माना भरने का भी निर्देश दिया जाता है, जो शिकायतकर्ता को मुआवजे के तौर पर दिया जाएगा।
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संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर बुशहर। चेक बाउंस के मामले में दोषी को अदालत ने आठ महीने के साधारण कारावास की सजा सुनाई है। अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, कोर्ट नंबर 1 रोहड़ू की अदालत ने दोषी को 1.55 लाख रुपये जुर्माना भी लगाया है। शिकायतकर्ता रोहड़ू क्षेत्र के महेंद्र सिंह और मामले में दोषी दीवान सिंह एक ही क्षेत्र के निवासी होने के नाते एक-दूसरे को अच्छी तरह से जानते हैं। जनवरी 2020 को आरोपी ने शिकायतकर्ता से संपर्क किया। आरोपी ने 1.50 लाख रुपये की मदद मांगी और आश्वासन दिया कि आठ माह लौटा देगा। शिकायतकर्ता ने आरोपी पर पूरा भरोसा करते हुए राशि सौंप दी। आरोपी ने अगस्त में 1.50 लाख रुपये की राशि के लिए एक हस्ताक्षरित मल्टी-सिटी चेक जारी किया, जो बाउंस हो गया। शिकायतकर्ता ने वकील के माध्यम से आरोपी को कानूनी नोटिस भेजा, जिसमें नोटिस प्राप्त होने के 15 दिनों के भीतर चेक राशि का भुगतान करने की मांग की गई थी। नोटिस आरोपी को प्राप्त हुआ, लेकिन वह राशि का भुगतान करने में विफल रहा। इसके बाद यह शिकायत दर्ज की गई। आरोपी को इस जुर्म के लिए नोटिस दिया गया, जिस पर उसने खुद को बेगुनाह बताया और ट्रायल का दावा किया। अदालत ने फैसला दिया है कि शिकायतकर्ता ने एनआई अधिनियम की धारा-138 के तहत दंडनीय अपराध के सभी आवश्यक तत्वों को सफलतापूर्वक साबित कर दिया है। आरोपी शिकायतकर्ता के पक्ष में उत्पन्न वैधानिक अनुमान का खंडन करने में विफल रहा है। मौजूदा मामले के तथ्यों और दलीलों को ध्यान में रखते हुए दोषी को आठ महीने की साधारण जेल की सजा सुनाई जाती है। उसे 1.55 लाख रुपये का जुर्माना भरने का भी निर्देश दिया जाता है, जो शिकायतकर्ता को मुआवजे के तौर पर दिया जाएगा।