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Rampur Bushahar News: कुमारसैन में जय बिहारी लाल खाची को किया याद
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पुण्यतिथि पर लोगों ने दिग्गज नेता को दी श्रद्धांजलि
संवाद न्यूज एजेंसी
कुमारसैन (रामपुर बुशहर)। पूर्व मंत्री स्व. जय बिहारी लाल खाची की 25वीं पुण्यतिथि पर कुमारसैन में कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर लोगों ने उनके चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी और उनके राजनीतिक एवं सामाजिक योगदान को याद किया।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि स्व. जेबीएल खाची संघर्षशील, कर्मठ, ईमानदार और निडर व्यक्तित्व के धनी नेता थे। उन्होंने लंबे राजनीतिक जीवन में जनता की सेवा को सर्वोपरि रखा। उनका जन्म 5 मई 1925 को कुमारसैन के घुमाना गांव में हुआ था। प्रारंभिक शिक्षा के बाद उन्होंने उच्च शिक्षा लाहौर से प्राप्त की और एलएलबी की डिग्री दिल्ली विश्वविद्यालय से हासिल की।
विद्यार्थी जीवन से ही उनमें नेतृत्व की क्षमता स्पष्ट दिखाई देने लगी थी। मात्र 23 वर्ष की आयु में ही उनका राजनीतिक जीवन शुरू हो गया था। दिल्ली विश्वविद्यालय में वह विद्यार्थी परिषद के पहले निर्वाचित अध्यक्ष बने। उस समय देश के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने उन्हें चाय पर आमंत्रित कर उनके नेतृत्व और प्रतिभा की सराहना की थी। तभी से उनके नाम के साथ जय शब्द जुड़ गया।
विद्यार्थी जीवन के दौरान वह प्रतियोगिताओं में हमेशा अव्वल रहते थे। उन्होंने कई पदक भी जीते। देशभर में आयोजित विभिन्न विद्यार्थी आंदोलनों में उन्होंने सक्रिय रूप से भाग लिया। अपने 52 वर्षों के राजनीतिक जीवन में खाची ने कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। उन्होंने 11 विधानसभा चुनाव लड़े, जिनमें से 7 में विजय हासिल की। उन्हें हिमाचल प्रदेश में सहकारिता आंदोलन का जनक भी माना जाता है। कार्यक्रम के अंत में दो मिनट का मौन रखकर दिवंगत नेता की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की गई।
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कुमारसैन (रामपुर बुशहर)। पूर्व मंत्री स्व. जय बिहारी लाल खाची की 25वीं पुण्यतिथि पर कुमारसैन में कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर लोगों ने उनके चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी और उनके राजनीतिक एवं सामाजिक योगदान को याद किया।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि स्व. जेबीएल खाची संघर्षशील, कर्मठ, ईमानदार और निडर व्यक्तित्व के धनी नेता थे। उन्होंने लंबे राजनीतिक जीवन में जनता की सेवा को सर्वोपरि रखा। उनका जन्म 5 मई 1925 को कुमारसैन के घुमाना गांव में हुआ था। प्रारंभिक शिक्षा के बाद उन्होंने उच्च शिक्षा लाहौर से प्राप्त की और एलएलबी की डिग्री दिल्ली विश्वविद्यालय से हासिल की।
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विद्यार्थी जीवन से ही उनमें नेतृत्व की क्षमता स्पष्ट दिखाई देने लगी थी। मात्र 23 वर्ष की आयु में ही उनका राजनीतिक जीवन शुरू हो गया था। दिल्ली विश्वविद्यालय में वह विद्यार्थी परिषद के पहले निर्वाचित अध्यक्ष बने। उस समय देश के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने उन्हें चाय पर आमंत्रित कर उनके नेतृत्व और प्रतिभा की सराहना की थी। तभी से उनके नाम के साथ जय शब्द जुड़ गया।
विद्यार्थी जीवन के दौरान वह प्रतियोगिताओं में हमेशा अव्वल रहते थे। उन्होंने कई पदक भी जीते। देशभर में आयोजित विभिन्न विद्यार्थी आंदोलनों में उन्होंने सक्रिय रूप से भाग लिया। अपने 52 वर्षों के राजनीतिक जीवन में खाची ने कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। उन्होंने 11 विधानसभा चुनाव लड़े, जिनमें से 7 में विजय हासिल की। उन्हें हिमाचल प्रदेश में सहकारिता आंदोलन का जनक भी माना जाता है। कार्यक्रम के अंत में दो मिनट का मौन रखकर दिवंगत नेता की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की गई।