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कॉलेजों में फीस वृद्धि का फैसला छात्र विरोधी : राहुल
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एसएफआई ने सरकार और एचपीयू के खिलाफ उग्र आंदोलन का किया एलान
संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर बुशहर।
हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (एचपीयू) और उससे संबद्ध कॉलेजों में फीस वृद्धि का फैसला छात्र विरोधी है और शिक्षा के खुले व्यापारीकरण की साजिश है। इस फरमान को किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा। एसएफआई रामपुर इकाई सचिव राहुल विद्यार्थी ने जारी बयान में यह बात कही। उन्होंने कहा कि एचपीयू और कॉलेजों में फीस वृद्धि के खिलाफ एसएफआई रामपुर उग्र आंदोलन करेगी। उन्होंने कहा कि जब प्रदेश के छात्र महंगाई, बेरोजगारी और आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं, तब फीस बढ़ाना सीधे-सीधे गरीब और मध्यम वर्ग के छात्रों को शिक्षा से बाहर करने की कोशिश है। यह फैसला साबित करता है कि सरकार और प्रशासन शिक्षा को अधिकार नहीं, बल्कि मुनाफे का साधन बनाना चाहते हैं। राहुल विद्यार्थी ने बताया कि विश्वविद्यालयों में शिक्षकों की भारी कमी, बुनियादी सुविधाओं का अभाव और जर्जर ढांचा पहले से ही छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहा है। इन समस्याओं को ठीक करने के बजाय फीस बढ़ाना प्रशासन की पूरी तरह विफलता और छात्रों के प्रति असंवेदनशीलता को दर्शाता है। एसएफआई ने चेताया है कि अगर यह फैसला वापस नहीं लिया गया, तो रामपुर इकाई उग्र आंदोलन छेड़ेगी। सड़कों से लेकर विश्वविद्यालय परिसरों तक संघर्ष तेज किया जाएगा और इस छात्र विरोधी नीति को हर हाल में वापस लेने पर मजबूर किया जाएगा। राहुल विद्यार्थी ने कहा कि फीस बढ़ी तो आंदोलन बढ़ेगा। शिक्षा पर अधिकार, नहीं किसी का व्यापार, हम लड़ेंगे और जीतेंगे।
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संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर बुशहर।
हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (एचपीयू) और उससे संबद्ध कॉलेजों में फीस वृद्धि का फैसला छात्र विरोधी है और शिक्षा के खुले व्यापारीकरण की साजिश है। इस फरमान को किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा। एसएफआई रामपुर इकाई सचिव राहुल विद्यार्थी ने जारी बयान में यह बात कही। उन्होंने कहा कि एचपीयू और कॉलेजों में फीस वृद्धि के खिलाफ एसएफआई रामपुर उग्र आंदोलन करेगी। उन्होंने कहा कि जब प्रदेश के छात्र महंगाई, बेरोजगारी और आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं, तब फीस बढ़ाना सीधे-सीधे गरीब और मध्यम वर्ग के छात्रों को शिक्षा से बाहर करने की कोशिश है। यह फैसला साबित करता है कि सरकार और प्रशासन शिक्षा को अधिकार नहीं, बल्कि मुनाफे का साधन बनाना चाहते हैं। राहुल विद्यार्थी ने बताया कि विश्वविद्यालयों में शिक्षकों की भारी कमी, बुनियादी सुविधाओं का अभाव और जर्जर ढांचा पहले से ही छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहा है। इन समस्याओं को ठीक करने के बजाय फीस बढ़ाना प्रशासन की पूरी तरह विफलता और छात्रों के प्रति असंवेदनशीलता को दर्शाता है। एसएफआई ने चेताया है कि अगर यह फैसला वापस नहीं लिया गया, तो रामपुर इकाई उग्र आंदोलन छेड़ेगी। सड़कों से लेकर विश्वविद्यालय परिसरों तक संघर्ष तेज किया जाएगा और इस छात्र विरोधी नीति को हर हाल में वापस लेने पर मजबूर किया जाएगा। राहुल विद्यार्थी ने कहा कि फीस बढ़ी तो आंदोलन बढ़ेगा। शिक्षा पर अधिकार, नहीं किसी का व्यापार, हम लड़ेंगे और जीतेंगे।