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Rampur Bushahar News: ठियोग कस्बे में नहीं रहेगा पेयजल संकट, अमृत-2 पेयजल योजना की टेस्टिंग सफल
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अगले सप्ताह मुख्य टैंक तक पहुंचेगा पानी, सात वार्डों को मिलेगी रोजाना आपूर्ति
तीन पाइपलाइनों को जोड़ने का काम शेष
सुनील ग्रोवर
ठियोग (रामपुर बुशहर)।
लंबे समय से पेयजल संकट झेल रहे ठियोग कस्बे के लिए राहत की खबर है। करीब 15 करोड़ रुपये की लागत से अमृत-2 पेयजल योजना का कार्य अंतिम चरण में पहुंच गया है। रविवार को सैंज से कंडा पंप हाउस तक बिछाई गई 1800 मीटर लंबी पाइपलाइन की पहली सफल टेस्टिंग हो गई। पानी की सप्लाई पूरी तरह सुचारु रही और कहीं भी लीकेज या तकनीकी खामी सामने नहीं आई। इसमें तीन पाइपलाइनों को जोड़ने का काम शेष है। इसके पूरा होते ही करीब पांच किलोमीटर लंबी पूरी लाइन से मुख्य टैंक तक पानी पहुंचाने का रास्ता साफ हो जाएगा। अगले सप्ताह तक पानी मुख्य टैंक तक पहुंच जाएगा। इसके बाद योजना को चरणबद्ध तरीके से शुरू किया जाएगा। वर्ष 2023 में इस महत्वाकांक्षी योजना का कार्य शुरू हुआ था। योजना के पूर्ण रूप से लागू होने पर नगर परिषद के सभी सात वार्डों को नियमित पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित होगी। इससे क्षेत्र की दशकों पुरानी पेयजल समस्या का स्थायी समाधान होने की उम्मीद है। योजना के तहत गिरि खड्ड से प्रतिदिन 19.70 लाख लीटर पानी उठाया जाएगा और 200 एमएम चौड़ाई वाली पाइपलाइन के माध्यम से इसे विभिन्न टैंकों तक पहुंचाया जाएगा। डीएवी स्कूल, हिमुडा कॉलोनी, कोर्ट परिसर, बासा ठियोग और आईटीआई क्षेत्र समेत विभिन्न स्थानों पर करीब 13 लाख लीटर क्षमता के टैंक तैयार किए जा चुके हैं। साथ ही पुराने टैंकों की क्षमता का भी उपयोग किया जाएगा। सभी टैंकों को आपस में जोड़ने का कार्य पूरा हो चुका है और सैंज स्थित पंप हाउस से लेकर बासा ठियोग तक राइजिंग मेन पाइपलाइन भी बिछाई जा चुकी है। विभाग के अनुसार पंप हाउस और वितरण नेटवर्क से जुड़े लगभग सभी तकनीकी कार्य पूरे कर लिए गए हैं।
16 घंटे होगी पंपिंग, 1.98 एमएलडी पानी की सप्लाई, गाद नहीं बनेगी बाधा
योजना के तहत प्रतिदिन 16 घंटे पंपिंग की जाएगी। इसके माध्यम से 1.98 एमएलडी पानी की आपूर्ति सुनिश्चित होगी। इससे पूरे कस्बे की पेयजल जरूरतों को पूरा किया जा सकेगा। बरसात के मौसम में गिरि खड्ड में गाद आने के कारण पहले पानी की सप्लाई बाधित हो जाती थी, लेकिन इस बार योजना में रैपिड सैंड फिल्टर और ट्यूब सेडिमेंटेशन जैसी आधुनिक तकनीक का उपयोग किया गया है। इससे पंपिंग प्रणाली पर गाद का असर कम होगा और सप्लाई लगातार जारी रह सकेगी।
हाईटेक कंट्रोल रूम से होगी निगरानी
पूरी योजना को उच्च तकनीक वाले कंट्रोल रूम से संचालित किया जाएगा। सोलर पैनल आधारित सिस्टम और मोबाइल मॉनिटरिंग के जरिये पानी के वितरण पर नजर रखी जाएगी। इससे न केवल आपूर्ति व्यवस्था पारदर्शी और प्रभावी बनेगी, बल्कि भविष्य में अन्य क्षेत्रों तक विस्तार की संभावनाएं भी मजबूत होंगी। योजना की सफल टेस्टिंग के बाद अब ठियोग के लोगों को लंबे इंतजार के बाद नियमित पेयजल आपूर्ति मिलने की उम्मीद बंध गई है। आने वाले दिनों में यह परियोजना कस्बे की जीवन रेखा साबित हो सकती है।
पहली टेस्टिंग कामयाब
जल शक्ति विभाग ठियोग का अतिरिक्त कार्यभार संभाल रहे सहायक अभियंता संजीत मेहता ने बताया कि सैंज पंप हाउस से कंडा पंप हाउस तक की पहली टेस्टिंग कामयाब रही है। करीब दो किलोमीटर लंबी पाइपलाइन में कहीं भी कोई गड़बड़ी या तकनीकी समस्या नहीं आई है। इस जगह पर तीन पाइपलाइन को जोड़ने का कार्य शुरू किया जा चुका है। इसके बाद बासा ठियोग स्थित मुख्य टैंक तक पानी पहुंचाया जाएगा और पेयजल सप्लाई का मार्ग खुल जाएगा।
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तीन पाइपलाइनों को जोड़ने का काम शेष
सुनील ग्रोवर
ठियोग (रामपुर बुशहर)।
लंबे समय से पेयजल संकट झेल रहे ठियोग कस्बे के लिए राहत की खबर है। करीब 15 करोड़ रुपये की लागत से अमृत-2 पेयजल योजना का कार्य अंतिम चरण में पहुंच गया है। रविवार को सैंज से कंडा पंप हाउस तक बिछाई गई 1800 मीटर लंबी पाइपलाइन की पहली सफल टेस्टिंग हो गई। पानी की सप्लाई पूरी तरह सुचारु रही और कहीं भी लीकेज या तकनीकी खामी सामने नहीं आई। इसमें तीन पाइपलाइनों को जोड़ने का काम शेष है। इसके पूरा होते ही करीब पांच किलोमीटर लंबी पूरी लाइन से मुख्य टैंक तक पानी पहुंचाने का रास्ता साफ हो जाएगा। अगले सप्ताह तक पानी मुख्य टैंक तक पहुंच जाएगा। इसके बाद योजना को चरणबद्ध तरीके से शुरू किया जाएगा। वर्ष 2023 में इस महत्वाकांक्षी योजना का कार्य शुरू हुआ था। योजना के पूर्ण रूप से लागू होने पर नगर परिषद के सभी सात वार्डों को नियमित पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित होगी। इससे क्षेत्र की दशकों पुरानी पेयजल समस्या का स्थायी समाधान होने की उम्मीद है। योजना के तहत गिरि खड्ड से प्रतिदिन 19.70 लाख लीटर पानी उठाया जाएगा और 200 एमएम चौड़ाई वाली पाइपलाइन के माध्यम से इसे विभिन्न टैंकों तक पहुंचाया जाएगा। डीएवी स्कूल, हिमुडा कॉलोनी, कोर्ट परिसर, बासा ठियोग और आईटीआई क्षेत्र समेत विभिन्न स्थानों पर करीब 13 लाख लीटर क्षमता के टैंक तैयार किए जा चुके हैं। साथ ही पुराने टैंकों की क्षमता का भी उपयोग किया जाएगा। सभी टैंकों को आपस में जोड़ने का कार्य पूरा हो चुका है और सैंज स्थित पंप हाउस से लेकर बासा ठियोग तक राइजिंग मेन पाइपलाइन भी बिछाई जा चुकी है। विभाग के अनुसार पंप हाउस और वितरण नेटवर्क से जुड़े लगभग सभी तकनीकी कार्य पूरे कर लिए गए हैं।
16 घंटे होगी पंपिंग, 1.98 एमएलडी पानी की सप्लाई, गाद नहीं बनेगी बाधा
योजना के तहत प्रतिदिन 16 घंटे पंपिंग की जाएगी। इसके माध्यम से 1.98 एमएलडी पानी की आपूर्ति सुनिश्चित होगी। इससे पूरे कस्बे की पेयजल जरूरतों को पूरा किया जा सकेगा। बरसात के मौसम में गिरि खड्ड में गाद आने के कारण पहले पानी की सप्लाई बाधित हो जाती थी, लेकिन इस बार योजना में रैपिड सैंड फिल्टर और ट्यूब सेडिमेंटेशन जैसी आधुनिक तकनीक का उपयोग किया गया है। इससे पंपिंग प्रणाली पर गाद का असर कम होगा और सप्लाई लगातार जारी रह सकेगी।
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हाईटेक कंट्रोल रूम से होगी निगरानी
पूरी योजना को उच्च तकनीक वाले कंट्रोल रूम से संचालित किया जाएगा। सोलर पैनल आधारित सिस्टम और मोबाइल मॉनिटरिंग के जरिये पानी के वितरण पर नजर रखी जाएगी। इससे न केवल आपूर्ति व्यवस्था पारदर्शी और प्रभावी बनेगी, बल्कि भविष्य में अन्य क्षेत्रों तक विस्तार की संभावनाएं भी मजबूत होंगी। योजना की सफल टेस्टिंग के बाद अब ठियोग के लोगों को लंबे इंतजार के बाद नियमित पेयजल आपूर्ति मिलने की उम्मीद बंध गई है। आने वाले दिनों में यह परियोजना कस्बे की जीवन रेखा साबित हो सकती है।
पहली टेस्टिंग कामयाब
जल शक्ति विभाग ठियोग का अतिरिक्त कार्यभार संभाल रहे सहायक अभियंता संजीत मेहता ने बताया कि सैंज पंप हाउस से कंडा पंप हाउस तक की पहली टेस्टिंग कामयाब रही है। करीब दो किलोमीटर लंबी पाइपलाइन में कहीं भी कोई गड़बड़ी या तकनीकी समस्या नहीं आई है। इस जगह पर तीन पाइपलाइन को जोड़ने का कार्य शुरू किया जा चुका है। इसके बाद बासा ठियोग स्थित मुख्य टैंक तक पानी पहुंचाया जाएगा और पेयजल सप्लाई का मार्ग खुल जाएगा।