{"_id":"6a33f97ade4af7acf50b3cd2","slug":"court-decession-sirmour-nahan-news-c-177-1-nhn1017-181320-2026-06-18","type":"story","status":"publish","title_hn":"लीज विवाद : कोर्ट ने दीवानी वाद की अर्जी की खारिज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
लीज विवाद : कोर्ट ने दीवानी वाद की अर्जी की खारिज
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
नाहन। किराये पर लिए गए कार्यालय परिसर की 90 हजार रुपये की सिक्योरिटी राशि लौटाने को लेकर चल रहे विवाद में एसबीआई लाइफ इंश्योरेंस को बड़ी राहत मिली है। सिविल अदालत ने मकान मालिक की उस अर्जी को खारिज कर दिया, जिसमें लीज डीड में मौजूद आर्बिट्रेशन क्लॉज का हवाला देकर दीवानी वाद को समाप्त करने की मांग की गई थी। अदालत ने स्पष्ट किया कि लीज अवधि समाप्त हो चुकी है और परिसर पहले ही खाली किया जा चुका है। मौजूदा विवाद केवल सिक्योरिटी डिपॉजिट की वापसी से संबंधित है। इसलिए मामला दीवानी न्यायालय में सुनवाई योग्य है।
यह मामला एसबीआई लाइफ इंश्योरेंस बनाम विश्व राज के बीच का है। एसबीआई लाइफ इंश्योरेंस ने नाहन शहर के एक परिसर किराये पर लिया था। समझौते के तहत 90 हजार रुपये की सिक्योरिटी जमा कराई गई थी, जिसे परिसर खाली करने के बाद लौटाया जाना था। कंपनी का आरोप है कि किराया और अन्य देनदारियां चुकाने के बावजूद सुरक्षा राशि वापस नहीं की गई। प्रतिवादी ने अदालत में दलील दी कि लीज डीड में विवादों के समाधान के लिए मध्यस्थता (आर्बिट्रेशन) का प्रावधान है।
सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि प्रतिवादी ने मध्यस्थता एवं सुलह अधिनियम की धारा 8 के तहत आवश्यक दस्तावेज और प्रक्रिया का पालन नहीं किया। अदालत ने यह भी माना कि दीवानी वाद पर कोई स्पष्ट कानूनी रोक नहीं है। वरिष्ठ सिविल न्यायाधीश उपासना शर्मा ने अर्जी खारिज करते हुए मामले को आगे की सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का आदेश दिया है।
विज्ञापन
यह मामला एसबीआई लाइफ इंश्योरेंस बनाम विश्व राज के बीच का है। एसबीआई लाइफ इंश्योरेंस ने नाहन शहर के एक परिसर किराये पर लिया था। समझौते के तहत 90 हजार रुपये की सिक्योरिटी जमा कराई गई थी, जिसे परिसर खाली करने के बाद लौटाया जाना था। कंपनी का आरोप है कि किराया और अन्य देनदारियां चुकाने के बावजूद सुरक्षा राशि वापस नहीं की गई। प्रतिवादी ने अदालत में दलील दी कि लीज डीड में विवादों के समाधान के लिए मध्यस्थता (आर्बिट्रेशन) का प्रावधान है।
विज्ञापन
विज्ञापन
सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि प्रतिवादी ने मध्यस्थता एवं सुलह अधिनियम की धारा 8 के तहत आवश्यक दस्तावेज और प्रक्रिया का पालन नहीं किया। अदालत ने यह भी माना कि दीवानी वाद पर कोई स्पष्ट कानूनी रोक नहीं है। वरिष्ठ सिविल न्यायाधीश उपासना शर्मा ने अर्जी खारिज करते हुए मामले को आगे की सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का आदेश दिया है।