{"_id":"6a621844d56efe2ec407c3f3","slug":"doctor-and-pharmacist-posts-vacant-at-phc-dhamandar-nahan-news-c-177-1-nhn1002-184173-2026-07-23","type":"story","status":"publish","title_hn":"Sirmour News: पीएचसी धमान्दर में डॉक्टर-फार्मासिस्ट के पद खाली","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Sirmour News: पीएचसी धमान्दर में डॉक्टर-फार्मासिस्ट के पद खाली
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
डेपुटेशन के भरोसे चल रही स्वास्थ्य सेवाएं
कोटी पधोग और हाब्बन में भी फार्मासिस्ट नहीं, इलाज के लिए राजगढ़ अस्पताल का सहारा
लोगों में विभाग और सरकार के प्रति नाराजगी, नियमित स्टाफ की नियुक्ति की उठाई मांग
संवाद न्यूज एजेंसी
राजगढ़ (सिरमौर)। स्वास्थ्य खंड राजगढ़ के ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं स्टाफ की कमी के कारण प्रभावित हैं। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) धमान्दर में लंबे समय से डॉक्टर और फार्मासिस्ट के पद रिक्त हैं। ऐसे में अस्पताल की व्यवस्था डेपुटेशन पर तैनात कर्मचारियों के भरोसे चल रही है। वहीं, कोटी पधोग और हाब्बन स्वास्थ्य संस्थानों में भी फार्मासिस्ट नहीं होने से मरीजों को समय पर दवाइयां और जरूरी स्वास्थ्य सेवाएं नहीं मिल पा रही हैं।
स्टाफ की कमी का सबसे अधिक असर दूर-दराज के गांवों के लोगों पर पड़ रहा है। मामूली बीमारी या प्राथमिक उपचार के लिए भी उन्हें कई किलोमीटर दूर राजगढ़ अस्पताल का रुख करना पड़ता है। इससे मरीजों का समय और पैसा दोनों खर्च हो रहे हैं।
स्थानीय निवासी राजेंद्र कुमार, रूपेश कुमार और दीक्षा ठाकुर ने बताया कि पीएचसी धमान्दर क्षेत्र के लोगों के लिए प्रमुख स्वास्थ्य केंद्र है, लेकिन डॉक्टर और फार्मासिस्ट के अभाव में मरीजों को पर्याप्त सुविधाएं नहीं मिल रहीं। कई बार केवल दवा लेने के लिए भी राजगढ़ जाना पड़ता है। इसका सबसे ज्यादा असर बुजुर्गों, महिलाओं और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों पर पड़ रहा है।
विज्ञापन
ग्रामीणों ने बताया कि कोटी पधोग और हाब्बन में भी फार्मासिस्ट के पद खाली होने से मरीजों को बिना दवा लौटना पड़ता है या फिर निजी मेडिकल स्टोर से महंगी दवाइयां खरीदने को मजबूर होना पड़ता है। उन्होंने प्रदेश सरकार और स्वास्थ्य विभाग से रिक्त पदों को जल्द भरने की मांग की है।
खंड चिकित्सा अधिकारी राजगढ़ डॉ. उपासना शर्मा ने बताया कि स्वास्थ्य संस्थानों में रिक्त पदों की जानकारी समय-समय पर उच्च अधिकारियों को भेजी जा रही है। उन्होंने स्वीकार किया कि क्षेत्र में स्टाफ की कमी है। विभाग की ओर से रिक्त पद भरने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं और नियुक्तियां होने के बाद स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार आएगा।
विज्ञापन
कोटी पधोग और हाब्बन में भी फार्मासिस्ट नहीं, इलाज के लिए राजगढ़ अस्पताल का सहारा
लोगों में विभाग और सरकार के प्रति नाराजगी, नियमित स्टाफ की नियुक्ति की उठाई मांग
संवाद न्यूज एजेंसी
राजगढ़ (सिरमौर)। स्वास्थ्य खंड राजगढ़ के ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं स्टाफ की कमी के कारण प्रभावित हैं। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) धमान्दर में लंबे समय से डॉक्टर और फार्मासिस्ट के पद रिक्त हैं। ऐसे में अस्पताल की व्यवस्था डेपुटेशन पर तैनात कर्मचारियों के भरोसे चल रही है। वहीं, कोटी पधोग और हाब्बन स्वास्थ्य संस्थानों में भी फार्मासिस्ट नहीं होने से मरीजों को समय पर दवाइयां और जरूरी स्वास्थ्य सेवाएं नहीं मिल पा रही हैं।
स्टाफ की कमी का सबसे अधिक असर दूर-दराज के गांवों के लोगों पर पड़ रहा है। मामूली बीमारी या प्राथमिक उपचार के लिए भी उन्हें कई किलोमीटर दूर राजगढ़ अस्पताल का रुख करना पड़ता है। इससे मरीजों का समय और पैसा दोनों खर्च हो रहे हैं।
विज्ञापन
स्थानीय निवासी राजेंद्र कुमार, रूपेश कुमार और दीक्षा ठाकुर ने बताया कि पीएचसी धमान्दर क्षेत्र के लोगों के लिए प्रमुख स्वास्थ्य केंद्र है, लेकिन डॉक्टर और फार्मासिस्ट के अभाव में मरीजों को पर्याप्त सुविधाएं नहीं मिल रहीं। कई बार केवल दवा लेने के लिए भी राजगढ़ जाना पड़ता है। इसका सबसे ज्यादा असर बुजुर्गों, महिलाओं और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों पर पड़ रहा है।
विज्ञापन
ग्रामीणों ने बताया कि कोटी पधोग और हाब्बन में भी फार्मासिस्ट के पद खाली होने से मरीजों को बिना दवा लौटना पड़ता है या फिर निजी मेडिकल स्टोर से महंगी दवाइयां खरीदने को मजबूर होना पड़ता है। उन्होंने प्रदेश सरकार और स्वास्थ्य विभाग से रिक्त पदों को जल्द भरने की मांग की है।
खंड चिकित्सा अधिकारी राजगढ़ डॉ. उपासना शर्मा ने बताया कि स्वास्थ्य संस्थानों में रिक्त पदों की जानकारी समय-समय पर उच्च अधिकारियों को भेजी जा रही है। उन्होंने स्वीकार किया कि क्षेत्र में स्टाफ की कमी है। विभाग की ओर से रिक्त पद भरने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं और नियुक्तियां होने के बाद स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार आएगा।