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Ground Report: कंडईवाला से मलबा तो हटा, लेकिन खतरा बरकरार; दो साल बाद भी अधूरे हैं सुरक्षा के वादे
Ankesh Dogra
Updated Fri, 24 Jul 2026 11:40 AM IST
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सिरमौर जिले के कंडईवाला गांव में 13 अगस्त 2023 को आई आपदा के निशान आज भी पूरी तरह नहीं मिटे हैं। उस दिन बादल फटने जैसी घटना के बाद पहाड़ी से आया हजारों टन मलबा गांव में घुस गया था। घर, दुकानें, वाहन और लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी इसकी चपेट में आ गई थी। दो साल बाद हालात सामान्य जरूर दिखते हैं, लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि खतरा अब भी टला नहीं है।
आपदा के बाद मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू, लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह और प्रशासनिक अधिकारी प्रभावित क्षेत्र में पहुंचे थे। उस समय स्थायी सुरक्षा कार्य, सुरक्षा डंगे और नाले के सुधार का भरोसा दिया गया था। ग्रामीणों का कहना है कि अधिकांश वादे अब तक जमीन पर नहीं उतर पाए हैं।
2023 की आपदा में गांव के कई घरों में कई फीट तक मलबा भर गया था। स्थानीय निवासी एन. ठाकुर के दो ट्रैक्टर दब गए थे। राजेंद्र चौहान की दुकान के पास खड़ी करीब 28 मोटरसाइकिलें मलबे में दब गई थीं। एक निजी स्कूल बस भी रास्ते में फंस गई थी, जिसमें करीब 30 बच्चे सवार थे। समय रहते राहत कार्य होने से बड़ा हादसा टल गया था। ग्रामीण बताते हैं कि हालात सामान्य करने में करीब दो महीने तक लगातार जेसीबी मशीनों से मलबा हटाना पड़ा था।
ग्रामीणों का कहना है कि सबसे अधिक चिंता उस पुलिया को लेकर है, जिसे आपदा के बाद बनाया गया। उनका आरोप है कि पुलिया की ऊंचाई पर्याप्त नहीं है। यदि फिर भारी बारिश के दौरान मलबा आया तो पुलिया के मुहाने पर रुककर पानी के साथ गांव की ओर मुड़ सकता है और दोबारा तबाही ला सकता है। इसके अलावा नाले का वैज्ञानिक तरीके से सुधार और मजबूत सुरक्षा डंगे बनाने का काम भी अब तक पूरा नहीं हुआ है।
स्थानीय निवासी महिमा चंद्र, राजेंद्र चौहान, बाबू राम समेत कई ग्रामीणों का कहना है कि दो साल बाद भी हालात में अपेक्षित बदलाव नहीं आया है। उनका कहना है कि मानसून के दौरान हर तेज बारिश के साथ लोगों की चिंता बढ़ जाती है। ग्रामीणों ने सरकार और प्रशासन से मांग की है कि संभावित खतरे को देखते हुए सुरक्षा कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर जल्द पूरा कराया जाए।
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