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Solan News: तूड़ी के दामों में भारी उछाल,10 हजार प्रति किल्ला
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नालागढ़ में 1.62 लाख क्विंटल गेहूं का उत्पादन होने की उम्मीद
संवाद न्यूज एजेंसी
नालागढ़(सोलन)। नालागढ़ में तूड़ी (भूसा) के अच्छे दाम मिलने से किसान खुश हैं। पिछले साल तक जहां पर खरीदार मुफ्त में तूड़ी उठाते रहे, वहीं इस वर्ष तूड़ी 10 हजार रुपये प्रति किल्ला बिक रहा है, जिससे किसानों तूड़ी के पैसा भी मिल रहा है और खेत में साफ हो रहे हैं। नालागढ़ में 65 हजार हेक्टेयर जमीन पर गेहूं की फसल लगाई है। 1.62 लाख क्विंटल गेहूं का उत्पादन होने की उम्मीद है। इतनी ही तूड़ी निकलती है। लोग अपने गुजारे की तुड़ी को शुरू में उठाकर भंडारण कर लेते हैं और अन्य तूड़ी को खेत में ही रखते हैं। इससे पहले खरीदार तूड़ी को बहुत कम पैसे में उठाते थे, लेकिन इस बार तूड़ी के अच्छे दाम मिल रहे हैं। पंजाब के ठेकेदार खेत से तूड़ी उठा रहे हैं। इस बार किसानों ने कंबाइन से ही गेहूं की फसल कटवाई है, जिसमें तूड़ी कम मिल पाई और इसके दामों पर उछाल आया है। हालांकि अगर मजदूरों से गेहूं कटवाते हैं तो तूड़ी अधिक मिलती है। मगर इसमें समय अधिक लगता है।
कोट
कंबाइन से गेहूं की थ्रैशिंग होने पर मात्र 50 प्रतिशत ही तूड़ी निकल पाती है। इस वर्ष मजदूरों की उपलब्धता कम होने के कारण किसानों ने मशीनों का सहारा लिया, जिससे तूड़ी का स्टॉक कम रहा। व्यापारियों द्वारा उद्योगों में इसकी सप्लाई किए जाने से भी इस बार दामों में ऐतिहासिक बढ़ोतरी देखी जा रही है।
-डॉ. संदीप गौतम, विषय वाद विशेषज्ञ, कृषि विभाग
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संवाद न्यूज एजेंसी
नालागढ़(सोलन)। नालागढ़ में तूड़ी (भूसा) के अच्छे दाम मिलने से किसान खुश हैं। पिछले साल तक जहां पर खरीदार मुफ्त में तूड़ी उठाते रहे, वहीं इस वर्ष तूड़ी 10 हजार रुपये प्रति किल्ला बिक रहा है, जिससे किसानों तूड़ी के पैसा भी मिल रहा है और खेत में साफ हो रहे हैं। नालागढ़ में 65 हजार हेक्टेयर जमीन पर गेहूं की फसल लगाई है। 1.62 लाख क्विंटल गेहूं का उत्पादन होने की उम्मीद है। इतनी ही तूड़ी निकलती है। लोग अपने गुजारे की तुड़ी को शुरू में उठाकर भंडारण कर लेते हैं और अन्य तूड़ी को खेत में ही रखते हैं। इससे पहले खरीदार तूड़ी को बहुत कम पैसे में उठाते थे, लेकिन इस बार तूड़ी के अच्छे दाम मिल रहे हैं। पंजाब के ठेकेदार खेत से तूड़ी उठा रहे हैं। इस बार किसानों ने कंबाइन से ही गेहूं की फसल कटवाई है, जिसमें तूड़ी कम मिल पाई और इसके दामों पर उछाल आया है। हालांकि अगर मजदूरों से गेहूं कटवाते हैं तो तूड़ी अधिक मिलती है। मगर इसमें समय अधिक लगता है।
कोट
कंबाइन से गेहूं की थ्रैशिंग होने पर मात्र 50 प्रतिशत ही तूड़ी निकल पाती है। इस वर्ष मजदूरों की उपलब्धता कम होने के कारण किसानों ने मशीनों का सहारा लिया, जिससे तूड़ी का स्टॉक कम रहा। व्यापारियों द्वारा उद्योगों में इसकी सप्लाई किए जाने से भी इस बार दामों में ऐतिहासिक बढ़ोतरी देखी जा रही है।
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-डॉ. संदीप गौतम, विषय वाद विशेषज्ञ, कृषि विभाग

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