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Solan News: शहर में बिना लाइसेंस चल रहे पीजी, घरेलू दरों पर चुका रहे पानी और कूड़ा के बिल
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नगर निगम सोलन कार्यालय।
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पीजी मालिक नगर निगम के खजाने को हर महीने लगा रहे लाखों का चूना
जिला मुख्यालय शहर समेत अन्य क्षेत्रों में दो दर्जन से अधिक चल रहे है पेइंग गेस्ट
जानकारी के बाद भी शहर में निगम की ओर से नहीं की जा रही कार्रवाई
संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन। जिला मुख्यालय सोलन और इसके आसपास के क्षेत्रों में नियमों की धज्जियां उड़ाकर पेइंग गेस्ट (पीजी) चल रहे हैं। शहर में 100 से अधिक पीजी बिना किसी वैध ट्रेड लाइसेंस के संचालित हो रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि इनके लिए अभी तक कोई पॉलिसी तक नहीं बनीं है और नगर निगम प्रशासन सब कुछ जानते हुए भी इन रसूखदारों पर कार्रवाई नहीं कर पा रहा। इन पीजी संस्थानों में व्यावसायिक गतिविधियां चल रही हैं, लेकिन इन्हें पानी और कूड़े के बिल घरेलू उपभोक्ता के हिसाब से दिए जा रहे हैं। नियमानुसार, पीजी एक व्यावसायिक इकाई है जिसके लिए कमर्शियल दरों पर भुगतान होना चाहिए, लेकिन यहां पीजी मालिक घरेलू दरों पर शुल्क अदा कर नगर निगम के खजाने को हर महीने लाखों का चूना लगा रहे हैं। शहर के रिहायशी इलाकों में दर्जनों पीजी बिना किसी वैध ट्रेड लाइसेंस के संचालित हो रहे हैं। नियमानुसार किसी भी व्यावसायिक गतिविधि के लिए निगम से अनुमति अनिवार्य है, लेकिन यहां खुलेआम नियमों को ताक पर रखा गया है। लाइसेंस न होने के कारण निगम को मिलने वाले राजस्व का इससे भारी नुकसान हो रहा है।
घरेलू दर पर कमर्शियल इस्तेमाल
इन पीजी केंद्रों में पानी की खपत व्यावसायिक स्तर पर होती है, लेकिन यहां घरेलू पेयजल कनेक्शन का उपयोग किया जा रहा है। पीजी मालिक कमर्शियल रेट देने के बजाय घरेलू दरों पर बिल भुगतान कर रहे हैं। इतना ही नहीं, शहर के कई नामी कारोबारियों के ठिकानों पर एक-दो नहीं बल्कि चार से छह कनेक्शन तक दे दिए गए हैं।
कूड़ा शुल्क में भी हेराफेरी
नियमों का उल्लंघन केवल पानी तक सीमित नहीं है। पीजी संचालक अपने संस्थानों से निकलने वाले भारी कचरे का शुल्क भी सामान्य घरेलू उपभोक्ता के हिसाब से दे रहे हैं। व्यावसायिक संस्थानों के लिए कूड़ा निस्तारण शुल्क काफी अधिक है, लेकिन पीजी मालिक निगम की मिलीभगत से यहां भी अपनी जेबें भर रहे हैं।
कोट
नगर निगम सोलन के पास वर्तमान में पीजी संचालन को लेकर कोई ठोस नियमावली (रेगुलेशन) नहीं है। इसी स्पष्ट नीति के अभाव का फायदा उठाकर बिना पंजीकरण के पीजी चल रहे हैं। बिना रेगुलेशन के न तो निगम इन पर सख्ती से जुर्माना लगा पा रहा है और न ही इन्हें कमर्शियल श्रेणी में पूरी तरह से बाध्य कर पा रहा है।
एकता काप्टा आयुक्त,नगर निगम,सोलन
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जानकारी के बाद भी शहर में निगम की ओर से नहीं की जा रही कार्रवाई
संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन। जिला मुख्यालय सोलन और इसके आसपास के क्षेत्रों में नियमों की धज्जियां उड़ाकर पेइंग गेस्ट (पीजी) चल रहे हैं। शहर में 100 से अधिक पीजी बिना किसी वैध ट्रेड लाइसेंस के संचालित हो रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि इनके लिए अभी तक कोई पॉलिसी तक नहीं बनीं है और नगर निगम प्रशासन सब कुछ जानते हुए भी इन रसूखदारों पर कार्रवाई नहीं कर पा रहा। इन पीजी संस्थानों में व्यावसायिक गतिविधियां चल रही हैं, लेकिन इन्हें पानी और कूड़े के बिल घरेलू उपभोक्ता के हिसाब से दिए जा रहे हैं। नियमानुसार, पीजी एक व्यावसायिक इकाई है जिसके लिए कमर्शियल दरों पर भुगतान होना चाहिए, लेकिन यहां पीजी मालिक घरेलू दरों पर शुल्क अदा कर नगर निगम के खजाने को हर महीने लाखों का चूना लगा रहे हैं। शहर के रिहायशी इलाकों में दर्जनों पीजी बिना किसी वैध ट्रेड लाइसेंस के संचालित हो रहे हैं। नियमानुसार किसी भी व्यावसायिक गतिविधि के लिए निगम से अनुमति अनिवार्य है, लेकिन यहां खुलेआम नियमों को ताक पर रखा गया है। लाइसेंस न होने के कारण निगम को मिलने वाले राजस्व का इससे भारी नुकसान हो रहा है।
घरेलू दर पर कमर्शियल इस्तेमाल
इन पीजी केंद्रों में पानी की खपत व्यावसायिक स्तर पर होती है, लेकिन यहां घरेलू पेयजल कनेक्शन का उपयोग किया जा रहा है। पीजी मालिक कमर्शियल रेट देने के बजाय घरेलू दरों पर बिल भुगतान कर रहे हैं। इतना ही नहीं, शहर के कई नामी कारोबारियों के ठिकानों पर एक-दो नहीं बल्कि चार से छह कनेक्शन तक दे दिए गए हैं।
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कूड़ा शुल्क में भी हेराफेरी
नियमों का उल्लंघन केवल पानी तक सीमित नहीं है। पीजी संचालक अपने संस्थानों से निकलने वाले भारी कचरे का शुल्क भी सामान्य घरेलू उपभोक्ता के हिसाब से दे रहे हैं। व्यावसायिक संस्थानों के लिए कूड़ा निस्तारण शुल्क काफी अधिक है, लेकिन पीजी मालिक निगम की मिलीभगत से यहां भी अपनी जेबें भर रहे हैं।
कोट
नगर निगम सोलन के पास वर्तमान में पीजी संचालन को लेकर कोई ठोस नियमावली (रेगुलेशन) नहीं है। इसी स्पष्ट नीति के अभाव का फायदा उठाकर बिना पंजीकरण के पीजी चल रहे हैं। बिना रेगुलेशन के न तो निगम इन पर सख्ती से जुर्माना लगा पा रहा है और न ही इन्हें कमर्शियल श्रेणी में पूरी तरह से बाध्य कर पा रहा है।
एकता काप्टा आयुक्त,नगर निगम,सोलन

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