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Kathua News: फ्रीज 1.88 लाख पीड़ित को लौटाने का आदेश
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संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने ऑनलाइन ठगी के मामले में एक लाख 88 हजार की फ्रीज राशि को पीड़ित के खाते में जमा करने का आदेश दिया है। यह राशि जिला साइबर सेल ने पीड़ित की शिकायत के बाद स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की शाखा शाहदरा नई दिल्ली में फ्रीज कर रखे हैं।
मामले की सुनवाई 16 जुलाई को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अजय कुमार की अदालत में की गई। कोर्ट में दायर याचिका के अनुसार 21 मार्च को पीड़ित शेर सिंह निवासी धामन, बनी के खाते से एक लाख 88 हजार की साइबर ठगी हुई थी। पीड़ित ने इसकी शिकायत जिला साइबर सेल में की।
साइबर टीम ने शिकायत पर त्वरित कार्रवाई करते हुए संबंधित बैंक से संपर्क कर धनराशि को फ्रीज करवा दिया था। साइबर सेल ने अदालत को बताया कि जांच में पता चला कि शिकायतकर्ता के खाते से 90 हजार और 98 हजार के दो ट्रांजेक्शन विभिन्न फर्जी खातों में किए गए थे। इसके बाद रकम को एसबीआई की शाखा शाहदरा नई दिल्ली में ट्रांसफर कर दिया गया।
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कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और साइबर सेल की रिपोर्ट का अवलोकन करने के बाद माना कि संबंधित बैंक खाते में फ्रीज राशि प्रथम दृष्टया आवेदक की ही है। अदालत ने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की संबंधित शाखा के प्रबंधक को निर्देश दिया कि उक्त राशि शिकायतकर्ता के जेएंडके बैंक खाते में स्थानांतरित की जाए। साथ ही आदेश दिया कि आवेदक पहले अदालत में इंडेम्निटी बॉन्ड दाखिल करेगा, ताकि भविष्य में यदि किसी अन्य व्यक्ति का बेहतर दावा सिद्ध होता है तो उसकी भरपाई की जा सके।
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कठुआ। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने ऑनलाइन ठगी के मामले में एक लाख 88 हजार की फ्रीज राशि को पीड़ित के खाते में जमा करने का आदेश दिया है। यह राशि जिला साइबर सेल ने पीड़ित की शिकायत के बाद स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की शाखा शाहदरा नई दिल्ली में फ्रीज कर रखे हैं।
मामले की सुनवाई 16 जुलाई को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अजय कुमार की अदालत में की गई। कोर्ट में दायर याचिका के अनुसार 21 मार्च को पीड़ित शेर सिंह निवासी धामन, बनी के खाते से एक लाख 88 हजार की साइबर ठगी हुई थी। पीड़ित ने इसकी शिकायत जिला साइबर सेल में की।
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साइबर टीम ने शिकायत पर त्वरित कार्रवाई करते हुए संबंधित बैंक से संपर्क कर धनराशि को फ्रीज करवा दिया था। साइबर सेल ने अदालत को बताया कि जांच में पता चला कि शिकायतकर्ता के खाते से 90 हजार और 98 हजार के दो ट्रांजेक्शन विभिन्न फर्जी खातों में किए गए थे। इसके बाद रकम को एसबीआई की शाखा शाहदरा नई दिल्ली में ट्रांसफर कर दिया गया।
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कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और साइबर सेल की रिपोर्ट का अवलोकन करने के बाद माना कि संबंधित बैंक खाते में फ्रीज राशि प्रथम दृष्टया आवेदक की ही है। अदालत ने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की संबंधित शाखा के प्रबंधक को निर्देश दिया कि उक्त राशि शिकायतकर्ता के जेएंडके बैंक खाते में स्थानांतरित की जाए। साथ ही आदेश दिया कि आवेदक पहले अदालत में इंडेम्निटी बॉन्ड दाखिल करेगा, ताकि भविष्य में यदि किसी अन्य व्यक्ति का बेहतर दावा सिद्ध होता है तो उसकी भरपाई की जा सके।