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Kathua News: पति की दायर निकाह भंग याचिका को किया खारिज
संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
Updated Sun, 12 Apr 2026 02:07 AM IST
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अदालत से
तलाक की निर्धारित प्रक्रिया अपनाए बिना सिविल कोर्ट में सीधे निकाह भंग करने की मांग स्वीकार नहीं की
संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ। जिले के सीनियर डिवीजन सिविल न्यायाधीश ने एक पति की दायर निकाह भंग याचिका को खारिज कर दिया है। आदेश के अनुसार मुस्लिम पर्सनल लॉ के तहत तलाक की निर्धारित प्रक्रिया अपनाए बिना सिविल कोर्ट में सीधे निकाह भंग करने की मांग स्वीकार नहीं की जा सकती है।
सीनियर डिवीजन सिविल न्यायाधीश अजय कुमार की अदालत में दायर आवेदन के अनुसार खुर्शीद अहमद निवासी लोहाई बिलावर ने 21 मई 2025 को कोर्ट से निकाह भंग करने की मांग की थी। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि उसकी पत्नी ने उसके साथ मानसिक क्रूरता की है और उस पर झूठे मुकदमे दर्ज करवाए हैं। याचिकाकर्ता ने बताया कि दोनों का निकाह 24 मई 2020 को बिलावर क्षेत्र में मुस्लिम रीति-रिवाजों के अनुसार हुआ था और उनके दो छोटे बच्चे भी हैं।
पति का आरोप है कि पत्नी शादी के बाद से ही असम्मानजनक व्यवहार करती रही और महंगे जीवन स्तर की मांग करती थी। कई बार बिना बताए घर छोड़ देती थी। साथ ही उसने महिला सुरक्षा कानूनों का दुरुपयोग कर झूठे केस दर्ज कराए जिससे उसे और उसके परिवार को मानसिक प्रताड़ना झेलनी पड़ी। पति ने कोर्ट को बताया कि पत्नी अक्टूबर 2024 में घर छोड़कर चली गई और वापस आने से इन्कार कर दिया। उसने कई बार समझौते की कोशिश की लेकिन कोई समाधान नहीं निकला।
पत्नी कभी भी कोर्ट में हाजिर नहीं हुई जिस कारण गत वर्ष 13 अगस्त के बाद कोर्ट ने सुनवाई एक तरफा चलाने का निर्देश दिया था। कोर्ट ने याचिकाकर्ता की दलीलें सुनने के बाद कहा कि याचिकाकर्ता ने यह कहीं साबित नहीं किया कि उसने इस्लामी कानून के अनुसार वैध तरीके से तलाक दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि मुस्लिम पति को यदि विवाह समाप्त करना है तो पहले शरियत के तहत निर्धारित प्रक्रिया जैसे सुलह या मध्यस्थता और वैध कारणों के साथ तलाक का पालन करना आवश्यक है।
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तलाक की निर्धारित प्रक्रिया अपनाए बिना सिविल कोर्ट में सीधे निकाह भंग करने की मांग स्वीकार नहीं की
संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ। जिले के सीनियर डिवीजन सिविल न्यायाधीश ने एक पति की दायर निकाह भंग याचिका को खारिज कर दिया है। आदेश के अनुसार मुस्लिम पर्सनल लॉ के तहत तलाक की निर्धारित प्रक्रिया अपनाए बिना सिविल कोर्ट में सीधे निकाह भंग करने की मांग स्वीकार नहीं की जा सकती है।
सीनियर डिवीजन सिविल न्यायाधीश अजय कुमार की अदालत में दायर आवेदन के अनुसार खुर्शीद अहमद निवासी लोहाई बिलावर ने 21 मई 2025 को कोर्ट से निकाह भंग करने की मांग की थी। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि उसकी पत्नी ने उसके साथ मानसिक क्रूरता की है और उस पर झूठे मुकदमे दर्ज करवाए हैं। याचिकाकर्ता ने बताया कि दोनों का निकाह 24 मई 2020 को बिलावर क्षेत्र में मुस्लिम रीति-रिवाजों के अनुसार हुआ था और उनके दो छोटे बच्चे भी हैं।
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पति का आरोप है कि पत्नी शादी के बाद से ही असम्मानजनक व्यवहार करती रही और महंगे जीवन स्तर की मांग करती थी। कई बार बिना बताए घर छोड़ देती थी। साथ ही उसने महिला सुरक्षा कानूनों का दुरुपयोग कर झूठे केस दर्ज कराए जिससे उसे और उसके परिवार को मानसिक प्रताड़ना झेलनी पड़ी। पति ने कोर्ट को बताया कि पत्नी अक्टूबर 2024 में घर छोड़कर चली गई और वापस आने से इन्कार कर दिया। उसने कई बार समझौते की कोशिश की लेकिन कोई समाधान नहीं निकला।
पत्नी कभी भी कोर्ट में हाजिर नहीं हुई जिस कारण गत वर्ष 13 अगस्त के बाद कोर्ट ने सुनवाई एक तरफा चलाने का निर्देश दिया था। कोर्ट ने याचिकाकर्ता की दलीलें सुनने के बाद कहा कि याचिकाकर्ता ने यह कहीं साबित नहीं किया कि उसने इस्लामी कानून के अनुसार वैध तरीके से तलाक दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि मुस्लिम पति को यदि विवाह समाप्त करना है तो पहले शरियत के तहत निर्धारित प्रक्रिया जैसे सुलह या मध्यस्थता और वैध कारणों के साथ तलाक का पालन करना आवश्यक है।