भले ही अब तक आपको कोई दिमाग़ी बीमारी न हुई हो, मगर रोजमर्रा का तनाव इस कदर है कि ये आप से आपकी सुकून और खुशी छीन सकता है।ऐसे तमाम प्रयोग हुए हैं, जो ये कहते हैं कि आप कुछ कदम उठा कर ऐसी मुश्किल से निकल सकते हैं इसे वैज्ञानिक भाषा में 'पॉजिटिव साइकोलॉजी' कहते हैं। पिछले 20 साल से इस पर रिसर्च हो रही है।मनोवैज्ञानिक ऐसे तमाम आसान नुस्खे बताते हैं जो आप का मूड बेहतर कर सकते हैं।
बोर होना भी जरूरी है, बस रोजाना इन 6 सवालों के जवाब खुद को देने होंगे
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अपनी क़िताब 'टेन मिनट्स टू हैपीनेस' में सैंडी ने इस नुस्खे को रोज़मर्रा की क़िताब के तौर पर पेश किया है। उन्होंने इस पर अमल को छह भागों में बांटा है। यानी रोज छह सवालों के जवाब आप को लिखने होंगे।
1. कौन सा अनुभव, भले ही वो बहुत आम सा क्यों न हो, आप को लुत्फ देता है?
2. आप ने अपने काम के लिए कौन सी तारीफ और क्या फीडबैक पाया है?
3. वो कौन से ऐसे लम्हे थे, जिन्हें आप विशुद्ध रूप से अच्छी क़िस्मत मानते हैं?
4. आपकी नजर में आप की कौन सी उपलब्धियां रही हैं, भले ही वो कितनी भी छोटी क्यों न रही हों?
5. ऐसी कौन सी बात थी जिससे आप ने एहसानमंद महसूस किया हो?
6. आपने नेकी का इजहार किस तरह से किया?
वैज्ञानिक रिसर्च पर आधारित है
सैंडी आगाह करती हैं कि आप को इन सवालों के जवाब लिखते ही बेहतर नहीं महसूस होने लगेगा. लेकिन, इन्हें दोबारा से पढ़ेंगे, तो आप को आगे चल कर मुश्किल दौर का सामना करने में सहूलत होगी।किसी बुरी घटना के बाद आप का मूड ख़राब होगा, तो आप इन अच्छी यादों पर दोबारा नज़र डाल कर ये महसूस करेंगे कि ज़िंदगी इतनी भी बुरी नहीं
इस नुस्खे का छठा सवाल
इस नुस्खे का छठा सवाल नेकी या मेहरबानी के हालिया रिसर्च पर आधारित है।बहुत से तजुर्बों से साबित हुआ है कि किसी की मदद करना या नेकी का कोई काम करना आपकी बेहतरी में मददगार तो होता ही है, आप के मूड को भी बेहतर करता है।थोड़े पैसों से किसी अजनबी की मदद कर के आप ज्यादा खुशी हासिल कर सकते हैं।
इसी पैसे को अपने ऊपर खर्च कर के आप उतने खुश नहीं होंगे। ये रिसर्च कम से कम 130 देशों में सही साबित हो चुकी है।जब आप मुश्किल वक़्त में ऐसे किसी काम को याद करेंगे, तो मूड बेहतर होगा। आप फिर से कुछ अच्छा, किसी का भला करने के लिए खुद को प्रेरित महसूस करेंगे।
काम की समीक्षा करने का फायदा
दिन भर के काम की 10 मिनट में समीक्षा करने से कोई जादू तो नहीं होगा। मगर, सैंडी कहती हैं कि अगर किसी को ये शक है कि वो डिप्रेशन में जा सकता है, तो उसे अपने डॉक्टर से मिलना चाहिए।लेकिन, जो लोग आम तौर पर हारा हुआ महसूस करते हैं। तनाव में रहते हैं।जिन में डिप्रेशन के लक्षण नहीं दिखते, उन्हें ये नुस्खा काफी मदद कर सकता है।
सैंडी ने एक और नुस्खा सुझाया है। जो लोग अक्सर बोर होने की शिकायत करते रहते हैं।ये नुस्खा उनके लिए है। सैंडी कहती हैं कि बोर होने के भी फायदे हैं। अगर आप खाली हैं, तो आप का जहन स्वच्छंद विचरण करता है। इस दौरान कई क्रिएटिव आइडिया भी आप के दिमाग को सूझ सकते हैं।
अगर जीवन में नीरसता के कुछ पल हैं, तो, उनका बुरा न मानिए। उस दौरान दिमाग को खुला छोड़ दीजिए, न कि मोबाइल या कंप्यूटर पर वक़्त बर्बाद करें। कुछ बोरिंग काम जैसे, तारे गिनना या फिर फोनबुक से नंबर रटना भी आप के जहन को धार दे सकते हैं।दिन में ख़्वाब देखना भी जहन की बेहतरी के लिए अच्छा माना जाता है।
सैंडी सलाह देती हैं कि, 'अगर आप किसी मुश्किल का हल नहीं खोज पा रहे हैं, तो थोड़ा वक्त किसी बोरिंग काम में लगाएं। इसी दौरान हो सकता है कि आप को अपनी मुश्किल का हल भी मिल जाए। आज के दौर में ये बात और भी मुफीद हो सकती है, क्योंकि हम बहुत सारा समय सोशल मीडिया पर गुजारते हैं।
वक़्त के साथ-साथ आप की सहनशीलता बढ़ती जाती है. पहले के मुकाबले आप तुरंत नहीं खीझते आप शांत रह कर अपनी चुनौती पर फिर से गौर करते हैं।सैंडी कहती हैं कि, 'जीवन में नीरसता का सामना करने के लिए आप को ढेर सारी बोरियत की जरूरत पड़ती है।