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सेहत की बात: दिल के 10 फीसदी रोगियों को प्रत्यारोपण की जरूरत, PGI में जगी उम्मीद; अंगदान जागरुकता बहुत जरूरी
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
Published by: लखनऊ ब्यूरो
Updated Tue, 14 Apr 2026 10:42 AM IST
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सार
डॉक्टरों के मुताबिक, दिल के 10 फीसदी रोगियों को प्रत्यारोपण की जरूरत होती है। इसके लिए अब PGI में उम्मीद दिख रही है। लेकिन, अंगदान के लिए जागरुकता बहुत जरूरी है। तभी लोगों को नई जिंदगी मिल पाएगी। आगे पढ़ें पूरी खबर...
heart transplant
- फोटो : Freepik.com
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विस्तार
दिल के हर 10वें मरीज पर इलाज बेअसर है। इस कारण इन्हें प्रत्यारोपण की जरूरत है। हालांकि, 500 में से सिर्फ एक रोगी का दिल प्रत्यारोपित हो पाता है। ऐसे में राजधानी लखनऊ स्थित संजय गांधी पीजीआई में हृदय प्रत्यारोपण शुरू होना मरीजों के लिए बड़ी राहत है।
एसजीपीजीआई में कार्डियोलॉजी विभाग के प्रमुख प्रो. आदित्य कपूर के मुताबिक, ओपीडी में आने वाले पांच से 10 फीसदी मरीजों का दिल लगभग काम करना बंद कर चुका होता है। इन्हें प्रत्यारोपण की जरूरत होती है, लेकिन इसकी सुविधा और अंगदान के प्रति जागरुकता की कमी के कारण यह संभव नहीं हो पाता है। अब ब्रेनडेड मरीजों के अंगदान होने लगे हैं। संस्थान में प्रत्यारोपण की सुविधा काफी राहत देगी।
भारत में हृदय प्रत्यारोपण दर प्रति दस लाख जनसंख्या पर केवल 0.2 है। यह वैश्विक औसत 1.06 से कम है। 65 फीसदी से अधिक हृदय प्रत्यारोपण दक्षिणी राज्यों में केंद्रित हैं। इस कारण यूपी के मरीजों को इन राज्यों की यात्रा करनी पड़ती है। इससे देरी, आर्थिक बोझ व मृत्यु दर बढ़ती है।
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एसजीपीजीआई में कार्डियोलॉजी विभाग के प्रमुख प्रो. आदित्य कपूर के मुताबिक, ओपीडी में आने वाले पांच से 10 फीसदी मरीजों का दिल लगभग काम करना बंद कर चुका होता है। इन्हें प्रत्यारोपण की जरूरत होती है, लेकिन इसकी सुविधा और अंगदान के प्रति जागरुकता की कमी के कारण यह संभव नहीं हो पाता है। अब ब्रेनडेड मरीजों के अंगदान होने लगे हैं। संस्थान में प्रत्यारोपण की सुविधा काफी राहत देगी।
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अंगदान के लिए जागरुकता की जरूरत
राज्य अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण संगठन (सोटो) के संयुक्त निदेशक प्रो. राजेश हर्षवर्धन ने बताया कि हृदय विफलता के करीब 72 फीसदी रोगियों में इस्केमिक हृदय रोग पाया जाता है। इसमें मृत्यु दर और बार-बार अस्पताल में भर्ती होने की घटनाएं अधिक हैं।भारत में हृदय प्रत्यारोपण दर प्रति दस लाख जनसंख्या पर केवल 0.2 है। यह वैश्विक औसत 1.06 से कम है। 65 फीसदी से अधिक हृदय प्रत्यारोपण दक्षिणी राज्यों में केंद्रित हैं। इस कारण यूपी के मरीजों को इन राज्यों की यात्रा करनी पड़ती है। इससे देरी, आर्थिक बोझ व मृत्यु दर बढ़ती है।
