लखनऊ। विश्वेश्वरैया हॉल में रविवार को जश्न ए अदब ने कल्चरल कारवां- विरासत का आयोजन किया। यह कार्यक्रम अदब, साहित्य, संगीत और भारतीय सांस्कृतिक विरासत को समर्पित था। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ के न्यायमूर्ति राजेश सिंह चौहान ने इसका शुभारंभ किया। उन्होंने जश्न ए अदब के संस्थापक कुंवर रंजीत सिंह चौहान के प्रयासों की सराहना की। कथक कलाकार डॉ. ऋचा जैन और उनकी टीम ने शास्त्रीय कथक प्रस्तुति दी। पद्मश्री डॉ. यश गुलाटी ने सैक्सोफोन की धुन से संगीतप्रेमियों को मंत्रमुग्ध किया। युवा बहार- यूथ पोएटिक सिम्पोजियम में युवा कवियों ने अपनी शेरों-शायरी पेश की। साकिब खान एवं समूह ने राग सूरदासी मल्हार में संगीतमय माहौल बनाया। शब्दरंग काव्य संगोष्ठी में अज्म शाकिरी, कुंवर रंजीत चौहान, जावेद मुशीरी, डॉ. सुनील पंवार, प्रो. रहमान मुसव्विर सहित कई ने रचनाएं प्रस्तुत कीं। रईस अनीस साबरी और समूह की कव्वाली ने शाम को सूफियाना रंग से भर दिया।

कल्चरल कारवां में साहित्य, संगीत और कला का संगम

कल्चरल कारवां में साहित्य, संगीत और कला का संगम

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