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Lucknow News: महिलाओं के जीवन में समृद्धि के रंग भर रहा तिरंगा
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लखनऊ। स्वयं सहायता समूह की 250 से अधिक महिलाएं तिरंगा तैयार कर रही हैं। यह कार्य उनके जीवन में समृद्धि और आत्मनिर्भरता ला रहा है। स्वतंत्रता दिवस पर ये तिरंगे लोगों के घरों और प्रतिष्ठानों पर शान से लहराएंगे।
आजीविका संवर्धन के तहत स्वयं सहायता समूहों को पांच लाख तिरंगे बनाने का काम दिया गया था। अब यह लक्ष्य 50 हजार और बढ़ा दिया गया है। महिलाएं समूह स्तर से कपड़े खरीदकर तिरंगे की सिलाई, पैकिंग और वितरण का कार्य कर रही हैं। सीडीओ प्रफुल्ल कुमार शर्मा और डीसी एनआरएल ज्ञानेंद्र सिंह की पहल पर इस बार लगभग सभी ब्लॉकों की महिलाओं को इस काम से जोड़ा गया है। पिछले वर्ष महिलाओं की संख्या कम रही थी। जिला मिशन प्रबंधक रागिनी सिंह ने बताया कि महिलाएं अब तक 3.60 लाख तिरंगे बना चुकी हैं। इनमें से करीब 2.40 लाख का वितरण भी हो चुका है। शेष काम दो से तीन दिन में पूरा हो जाएगा।
महिलाओं की आय में वृद्धि
तिरंगा बनाने के काम से जुड़ी प्रत्येक महिला को कुछ दिन काम करके 1500 से 2500 रुपये तक की आय होगी। कुछ महिलाएं इससे अधिक भी कमाएंगी। लक्ष्य के अलावा समूहों की महिलाओं द्वारा तैयार तिरंगों की मांग स्थानीय स्तर पर भी है। अधिक-से-अधिक महिलाओं को इस काम से जोड़ने का प्रयास किया गया है।
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आजीविका संवर्धन के तहत स्वयं सहायता समूहों को पांच लाख तिरंगे बनाने का काम दिया गया था। अब यह लक्ष्य 50 हजार और बढ़ा दिया गया है। महिलाएं समूह स्तर से कपड़े खरीदकर तिरंगे की सिलाई, पैकिंग और वितरण का कार्य कर रही हैं। सीडीओ प्रफुल्ल कुमार शर्मा और डीसी एनआरएल ज्ञानेंद्र सिंह की पहल पर इस बार लगभग सभी ब्लॉकों की महिलाओं को इस काम से जोड़ा गया है। पिछले वर्ष महिलाओं की संख्या कम रही थी। जिला मिशन प्रबंधक रागिनी सिंह ने बताया कि महिलाएं अब तक 3.60 लाख तिरंगे बना चुकी हैं। इनमें से करीब 2.40 लाख का वितरण भी हो चुका है। शेष काम दो से तीन दिन में पूरा हो जाएगा।
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महिलाओं की आय में वृद्धि
तिरंगा बनाने के काम से जुड़ी प्रत्येक महिला को कुछ दिन काम करके 1500 से 2500 रुपये तक की आय होगी। कुछ महिलाएं इससे अधिक भी कमाएंगी। लक्ष्य के अलावा समूहों की महिलाओं द्वारा तैयार तिरंगों की मांग स्थानीय स्तर पर भी है। अधिक-से-अधिक महिलाओं को इस काम से जोड़ने का प्रयास किया गया है।
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