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Lucknow News: स्वागत योग्य फैसला पर राजधानी में एक महिला छात्रावास काफी नहीं
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बजट
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लखनऊ। राजधानी आकर प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी व पढ़ाई करने वाली दूरदराज व अन्य जिलों की छात्राओं को बजट से राहत मिली है। अब उन्हें किराये के कमरे के लिए भटकना नहीं होगा। बजट में छात्राओं के लिए महिला छात्रावास बनाने का निर्णय लिया गया है। छात्राओं ने फैसले का स्वागत करने के साथ ही एक से अधिक छात्रावास बनाने की मांग की है।
प्रदेश सरकार और समाज कल्याण विभाग की ओर से राजधानी में दो दर्जन से अधिक छात्रावास संचालित किए जा रहे हैं। इनमें विश्वविद्यालय के भी छात्रावास शामिल है, लेकिन शिक्षण संस्थानों के बाहर प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहीं पांच हजार से अधिक छात्राओं के लिए विशेष छात्रावास न होने से कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। केंद्रीय बजट के आधार पर राजधानी में बनने वाले महिला छात्रावास से बड़ी संख्या में छात्राओं को इसका लाभ मिलेगा।
सुरक्षा के साथ बेहतर होगी तैयारी
Iमध्य प्रदेश के सिंगरौली की रहने वाली हूं। आठ वर्ष से लखनऊ में रह रही हूं। बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय से पढ़ाई की है। अभी लखनऊ में ही सिविल सर्विस व अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रही हूं। इसके लिए 4500 से 5000 रुपये किराया दे रही हूं। महीने में 10 हजार रुपये के करीब खत्म हो जाते हैं। महिला छात्रावास होगा तो सुरक्षा के साथ बेहतर तैयारी का माहौल मिलेगा। I
I- सोनी कुमारी, प्रतियोगी छात्रा, सिंगारनगरI
एक से अधिक छात्रावास बने
Iबजट में एक महिला छात्रावास निर्माण की बात कही गई है। सरकार का यह फैसला स्वागतयोग्य है, लेकिन एक से अधिक छात्रावास बनने चाहिए। राजधानी में बड़ी संख्या में ऐसी छात्राएं हैं, जो विषम परिस्थितियों में बाहर रूम लेकर पढ़ाई कर रही हैं। हर महीने पांच हजार से अधिक रुपये खर्च करना मुश्किल है। महिला छात्रावास के निर्माण से आर्थिक रूप से कमजोर लड़कियों को अवसर मिलेगा।I
I- प्रियंका गौतम, छात्रा, बीबीएयू।I
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सुरक्षा के साथ बेहतर होगी तैयारी
Iमध्य प्रदेश के सिंगरौली की रहने वाली हूं। आठ वर्ष से लखनऊ में रह रही हूं। बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय से पढ़ाई की है। अभी लखनऊ में ही सिविल सर्विस व अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रही हूं। इसके लिए 4500 से 5000 रुपये किराया दे रही हूं। महीने में 10 हजार रुपये के करीब खत्म हो जाते हैं। महिला छात्रावास होगा तो सुरक्षा के साथ बेहतर तैयारी का माहौल मिलेगा। I
I- सोनी कुमारी, प्रतियोगी छात्रा, सिंगारनगरI
एक से अधिक छात्रावास बने
Iबजट में एक महिला छात्रावास निर्माण की बात कही गई है। सरकार का यह फैसला स्वागतयोग्य है, लेकिन एक से अधिक छात्रावास बनने चाहिए। राजधानी में बड़ी संख्या में ऐसी छात्राएं हैं, जो विषम परिस्थितियों में बाहर रूम लेकर पढ़ाई कर रही हैं। हर महीने पांच हजार से अधिक रुपये खर्च करना मुश्किल है। महिला छात्रावास के निर्माण से आर्थिक रूप से कमजोर लड़कियों को अवसर मिलेगा।I
I- प्रियंका गौतम, छात्रा, बीबीएयू।I
