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Lucknow News: कैंसरग्रस्त महिला को खाना खाते ही हो रही थी उल्टी, डॉक्टरों ने पेट में स्टेंट डालकर दी राहत
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डॉक्टरों के साथ महिला मरीज।
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लखनऊ। किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के डॉक्टरों ने पेट में पूरी तरह से फैल चुके कैंसर से पीड़ित महिला की जान बचाई है। कैंसर की वजह से महिला कुछ भी खा-पी नहीं पा रही थी। कुछ भी खाने या पीने पर उसे उल्टी हो जाती थी। ऐसे में डॉक्टरों ने बिना चीरा लगाए तार के माध्यम से पेट में स्टेंट डालकर महिला को राहत दी।
पारा निवासी महिला को पहले गाल ब्लेडर में कैंसर था। धीरे-धीरे यह कैंसर पेट के अन्य हिस्सों में भी फैल गया। ऐसे में घर वाले उसे लेकर केजीएमयू आए। यहां इंटरवेंशनल रेडियोलॉजी विभाग की टीम ने मरीज की जांच की। पता चला कि महिला के पेट में कैंसर की वजह से कई जगह रुकावट हो गई थी। इससे भोजन नीचे नहीं बढ़ पा रहा था और उसे उल्टी हो जाती थी। डॉ. सौरभ, डॉ. सिद्धार्थ, डॉ. नितिन एवं डॉ. सूर्य, रेडियो डायग्नोसिस विभाग के अध्यक्ष डॉ. अनित परिहार व डॉ. मनोज कुमार के मार्गदर्शन में ट्रांसहेपेटिक असिस्टेड पेरोरल डुओडनल स्टेंटिंग का फैसला किया गया।
डेढ़ लाख रुपये आया खर्च, आयुष्मान से हुई भरपाई
डॉ. सुमित रुंगटा ने बताया कि इलाज आयुष्मान योजना के तहत हुआ। इसमें करीब डेढ़ लाख रुपये का खर्च आया। संस्थान में आयुष्मान योजना से कई मरीजों का इलाज किया जाता है।
ऐसे डाला गया स्टेंट
डॉ. सौरभ ने बताया कि सबसे पहले नाभि के पास छेदकर कर महीन तार अल्ट्रासाउंड से देखकर लिवर तक पहुंचाया गया। इसके बाद तार को पित्त की नली में पहुंचाया गया। यह प्रक्रिया करने के बाद दूसरा तार महिला के मुंह के माध्यम से डाला गया। ये दोनों तार जब एक-दूसरे से मिले तो उन्हें फंसाकर मुंह के रास्ते से दोनों तार बाहर खींच लिए गए। ऐसा करने पर रुकावट दूर हो गई। इसके बाद इंडोस्कोप के माध्यम से कैंसर प्रभावित हिस्से में स्टेंट डाल दिया गया। इस स्टेंट की सहायता से महिला को भोजन बिना फंसे पास होने लगा। इससे उसे राहत मिल गई। अब वह सामान्य रूप से भोजन कर पा रही हैं। गेस्ट्रो मेडिसिन विभाग के अध्यक्ष डॉ. सुमित रूंगटा ने बताया कि इस तकनीक से कैंसर तो नहीं ठीक किया जा सकता, लेकिन भोजन न कर पाने की समस्या से छुटकारा दिलाया गया। इससे उसे कुपोषण की समस्या नहीं होगी और कैंसर की दवाएं बेहतर काम करेंगी।
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पारा निवासी महिला को पहले गाल ब्लेडर में कैंसर था। धीरे-धीरे यह कैंसर पेट के अन्य हिस्सों में भी फैल गया। ऐसे में घर वाले उसे लेकर केजीएमयू आए। यहां इंटरवेंशनल रेडियोलॉजी विभाग की टीम ने मरीज की जांच की। पता चला कि महिला के पेट में कैंसर की वजह से कई जगह रुकावट हो गई थी। इससे भोजन नीचे नहीं बढ़ पा रहा था और उसे उल्टी हो जाती थी। डॉ. सौरभ, डॉ. सिद्धार्थ, डॉ. नितिन एवं डॉ. सूर्य, रेडियो डायग्नोसिस विभाग के अध्यक्ष डॉ. अनित परिहार व डॉ. मनोज कुमार के मार्गदर्शन में ट्रांसहेपेटिक असिस्टेड पेरोरल डुओडनल स्टेंटिंग का फैसला किया गया।
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डेढ़ लाख रुपये आया खर्च, आयुष्मान से हुई भरपाई
डॉ. सुमित रुंगटा ने बताया कि इलाज आयुष्मान योजना के तहत हुआ। इसमें करीब डेढ़ लाख रुपये का खर्च आया। संस्थान में आयुष्मान योजना से कई मरीजों का इलाज किया जाता है।
ऐसे डाला गया स्टेंट
डॉ. सौरभ ने बताया कि सबसे पहले नाभि के पास छेदकर कर महीन तार अल्ट्रासाउंड से देखकर लिवर तक पहुंचाया गया। इसके बाद तार को पित्त की नली में पहुंचाया गया। यह प्रक्रिया करने के बाद दूसरा तार महिला के मुंह के माध्यम से डाला गया। ये दोनों तार जब एक-दूसरे से मिले तो उन्हें फंसाकर मुंह के रास्ते से दोनों तार बाहर खींच लिए गए। ऐसा करने पर रुकावट दूर हो गई। इसके बाद इंडोस्कोप के माध्यम से कैंसर प्रभावित हिस्से में स्टेंट डाल दिया गया। इस स्टेंट की सहायता से महिला को भोजन बिना फंसे पास होने लगा। इससे उसे राहत मिल गई। अब वह सामान्य रूप से भोजन कर पा रही हैं। गेस्ट्रो मेडिसिन विभाग के अध्यक्ष डॉ. सुमित रूंगटा ने बताया कि इस तकनीक से कैंसर तो नहीं ठीक किया जा सकता, लेकिन भोजन न कर पाने की समस्या से छुटकारा दिलाया गया। इससे उसे कुपोषण की समस्या नहीं होगी और कैंसर की दवाएं बेहतर काम करेंगी।
