Lucknow News: घर बने मिनी लाइब्रेरी, बच्चों के साथ अभिभावक भी रोज पढ़ें किताबें
वक्ताओं ने कहा कि अभिभावक प्रतिदिन कम से कम 30 से 45 मिनट बच्चों के साथ पढ़ने में बिताएं। इससे बच्चों में नियमित पठन की आदत बनेगी और डिजिटल स्क्रीन पर निर्भरता भी कम होगी। कार्यक्रम के दौरान पुस्तक प्रदर्शनी, ‘बुक नॉट बुक’ अभियान से जुड़े आयोजन, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और प्रतियोगिताएं हुईं।
लेखन संवाद के पहले सत्र में अपर मुख्य सचिव माध्यमिक एवं बेसिक शिक्षा पार्थ सारथी सेन शर्मा, वरिष्ठ कथाकार चंद्रशेखर वर्मा और कवि-सांस्कृतिक चिंतक यतींद्र मिश्र ने विचार रखे।
राजकीय जुबिली इंटर कॉलेज कक्षा 12वीं के छात्र ऋषभ ने सवाल किया कि क्या पुस्तक मार्गदर्शक के रूप में काम कर सकती है। यशोदा इंटर कॉलेज की 11वीं कक्षा की छात्रा प्रोशी जोशी ने नॉवेल के बारे बारे में पूछा। जब सब कुछ इंटरनेट पर उपलब्ध है तो किताब की जरूरत क्यों। वक्ताओं ने कहा कि पुस्तकें मार्गदर्शक की तरह काम करती हैं और इंटरनेट पर उपलब्ध जानकारी के बावजूद सही ज्ञान और समझ के लिए पुस्तकों का पठन जरूरी है।

राजकीय जुबिली इंटर कॉलेज परिसर में हुआ आयोजन।

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