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Amar Ujala Impact: अब बिना ऑप्टोमेट्रिस्ट नहीं खुलेंगे चश्माघर, विशेषज्ञों की राय लेकर शासन को जाएगी रिपोर्ट
Sun, 26 Jul 2026 09:08 AM IST
Bhupendra Singh
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
Published by: Bhupendra Singh
Updated Sun, 26 Jul 2026 09:08 AM IST
सार
Amar Ujala Impact: यूपी में अब बिना ऑप्टोमेट्रिस्ट चश्माघर नहीं खुलेंगे। महानिदेशक की अध्यक्षता में शासन ने कमेटी बनाई है। ये कमेटी विशेषज्ञों की राय लेकर शासन को रिपोर्ट देगी। आगे पढ़ें पूरी खबर...
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विस्तार
उत्तर प्रदेश में चश्माघर खोलने के लिए ऑप्टोमेट्रिस्ट की नियुक्ति अनिवार्य होगी। साथ ही, प्रत्येक चश्माघर का पंजीकरण भी कराया जाएगा। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने इस दिशा में कार्य शुरू कर दिया है। इसके लिए स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ. पवन कुमार अरुण की अध्यक्षता में गठित समिति विशेषज्ञों की राय लेकर शासन को अपनी रिपोर्ट सौंपेगी। इसके बाद नियमावली तैयार की जाएगी।
अमर उजाला ने 19 जुलाई के अंक में ‘पंजीयन न डिग्री, आंखों के डॉक्टर बने चश्माघर’ शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी। इसमें बताया गया था कि प्रदेश में बिना ऑप्टोमेट्रिस्ट के चश्माघर संचालित हो रहे हैं। विभिन्न शहरों में आंखों की जांच का पर्याप्त ज्ञान न होने के बावजूद नंबर वाले चश्मे दिए जा रहे हैं। इससे अनेक लोगों की आंखों को नुकसान पहुंच रहा है। खबर प्रकाशित होने के बाद चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने इसका संज्ञान लिया।
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इसके लिए समिति की पहली बैठक हो चुकी है। इसमें निर्णय लिया गया कि विभिन्न विशेषज्ञों के सुझाव भी लिए जाएंगे। इन सुझावों और अन्य राज्यों में प्रचलित व्यवस्थाओं का अध्ययन कर नई नियमावली तैयार की जाएगी। इसी प्रकार सरकारी अस्पतालों में कार्यरत नेत्र परीक्षण अधिकारियों के ग्रेड पे में सुधार, मेडिकल बोर्ड में नेत्र परीक्षण अधिकारी को शामिल करने और अस्पतालों में कार्यरत ऑप्टोमेट्रिस्ट द्वारा प्राथमिक उपचार संबंधी दवाएं लिखे जाने पर उन्हें उपलब्ध कराने जैसे मामलों पर भी समिति अपनी रिपोर्ट तैयार करेगी।
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अमर उजाला ने 19 जुलाई के अंक में ‘पंजीयन न डिग्री, आंखों के डॉक्टर बने चश्माघर’ शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी। इसमें बताया गया था कि प्रदेश में बिना ऑप्टोमेट्रिस्ट के चश्माघर संचालित हो रहे हैं। विभिन्न शहरों में आंखों की जांच का पर्याप्त ज्ञान न होने के बावजूद नंबर वाले चश्मे दिए जा रहे हैं। इससे अनेक लोगों की आंखों को नुकसान पहुंच रहा है। खबर प्रकाशित होने के बाद चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने इसका संज्ञान लिया।
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समिति का गठन किया गया
अपर मुख्य सचिव अमित कुमार घोष के निर्देश पर समिति गठित कर दी गई है। समिति का अध्यक्ष स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ. पवन कुमार अरुण को बनाया गया है। समिति में निदेशक (राष्ट्रीय कार्यक्रम) डॉ. शुभा मिश्रा, संयुक्त निदेशक (नेत्र उपचार) डॉ. पंकज सक्सेना, राजकीय ऑप्टोमेट्रिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष सर्वेश कुमार पाटिल, महासचिव रविंद्र यादव, नेत्र अनुभाग के प्रधान सहायक नरेंद्र कुमार, संयुक्त निदेशक (कार्मिक), संयुक्त निदेशक (पैरामेडिकल), संयुक्त निदेशक (नर्सिंग) और वित्त एवं लेखाधिकारी शामिल हैं।
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क्या करेगी कमेटी
समिति नेत्र परीक्षण से जुड़े विभिन्न मामलों पर रिपोर्ट तैयार करेगी। जिस प्रकार मेडिकल स्टोर खोलने के लिए फार्मासिस्ट की अनिवार्यता है, उसी प्रकार चश्माघर खोलने के लिए ऑप्टोमेट्रिस्ट की अनिवार्यता संबंधी नियमावली तैयार करेगी। इससे चश्माघरों का पंजीकरण किया जाएगा और प्रशिक्षित ऑप्टोमेट्रिस्ट का प्रमाणपत्र अनिवार्य किया जा सकेगा।इसके लिए समिति की पहली बैठक हो चुकी है। इसमें निर्णय लिया गया कि विभिन्न विशेषज्ञों के सुझाव भी लिए जाएंगे। इन सुझावों और अन्य राज्यों में प्रचलित व्यवस्थाओं का अध्ययन कर नई नियमावली तैयार की जाएगी। इसी प्रकार सरकारी अस्पतालों में कार्यरत नेत्र परीक्षण अधिकारियों के ग्रेड पे में सुधार, मेडिकल बोर्ड में नेत्र परीक्षण अधिकारी को शामिल करने और अस्पतालों में कार्यरत ऑप्टोमेट्रिस्ट द्वारा प्राथमिक उपचार संबंधी दवाएं लिखे जाने पर उन्हें उपलब्ध कराने जैसे मामलों पर भी समिति अपनी रिपोर्ट तैयार करेगी।