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Lucknow News: निजी स्कूलों में फीस निर्धारण के लिए बने स्वतंत्र कमेटी, अभिभावक भी हों इसमें शामिल
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संवाद में पहुंचे निजी स्कूलों के प्रबंधक और अभिभावक।
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लखनऊ। निजी स्कूलों में हर साल मनमानी फीस बढ़ोतरी से अभिभावकों की जेब पर महंगाई की मार पड़ रही है। फीस निर्धारण के लिए एक ऐसी स्वतंत्र कमेटी बननी चाहिए, जिस पर किसी भी प्रकार का दबाव न हो। अभिभावकों को भी उसमें शामिल किया जाना चाहिए, क्योंकि निजी स्कूल फीस बढ़ाने से पहले कभी भी अभिभावकों के साथ बैठक नहीं करते। ये बातें अमर उजाला कार्यालय में निजी स्कूलों में फीस बढ़ोतरी के मुद्दे पर बुधवार को आयोजित संवाद के दौरान स्कूल प्रबंधकों की मौजूदगी में अभिभावकों ने कहीं।
अभिभावकों ने कहा कि सरकारी स्कूलों में आज व्यवस्था इतनी खराब है कि मजबूरी में अभिभावकों को निजी स्कूल की ओर जाना पड़ता है। ऐसे में अगर सरकारी विद्यालयों का सुधार हो जाए तो निजी स्कूलों की मनमानी पर काफी हद तक लगाम लग सकेगी। अभिभावकों ने एडेड कॉलेजों को भी सुधारने पर जोर दिया।
ये सुझाव भी आए
- फीस बढ़ोतरी अभिभावक के वेतन के अनुसार होनी चाहिए। हर साल वेतन की अपेक्षा अधिक फीस बढ़ा दी जाती है।
- मिशनरी स्कूलों के लिए भी फीस बढ़ोतरी के नियम बनने चाहिए। वहां शिक्षकों का वेतन बढ़ता है। इससे अन्य विद्यालयों के शिक्षक भी वेतन बढ़ाने की मांग करते हैं और फीस बढ़ानी पड़ती है।
प्रबंधक भी बोले
बाल निकुंज इंटर कॉलेज के प्रबंधक एसएन जायसवाल ने कहा कि सरकारी स्कूलों में सरकार एक बच्चे पर बजट खर्च करती है, वही फीस निजी स्कूलों में भी लागू होनी चाहिए। सरकार जब फीस निर्धारित करेगी तो उसकी मॉनीटरिंग भी होगी। प्रबंधक रामजन्म सिंह ने कहा कि फीस का निर्धारण बहुत ही मुश्किल है। जिस विद्यालय की जैसी फीस है, वैसी सुविधाएं भी बच्चों को मिलती हैं। किसी अभिभावक को गुमराह कर उसके बच्चे का दाखिला नहीं लिया जाता। निजी स्कूल के कोआर्डिनेटर सुधीर मिश्रा ने कहा कि स्कूलों का वर्गीकरण करते हुए फीस निर्धारण होना चाहिए। कई बार निजी स्कूलों के सामने 100 प्रतिशत शुल्क जमा कराना भी चुनौती होता है। इससे वित्तीय बजट पर बोझ पड़ता है।
ये रहे मौजूद
अभिभावक आरके निगम, अफीक सिद्दीकी, वेद गुप्ता, कल्पना अग्रवाल, ज्योति, आयुष जायसवाल, अंजना भारती, अंकिता श्रीवास्तव, ऐश्वर्य सिंह, श्वेता श्रीवास्तव, निजी स्कूल के प्रबंधक एसएन जायसवाल, प्रबंधक रामजन्म सिंह, कोऑर्डिनेटर सुधीर मिश्रा।
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अभिभावकों ने कहा कि सरकारी स्कूलों में आज व्यवस्था इतनी खराब है कि मजबूरी में अभिभावकों को निजी स्कूल की ओर जाना पड़ता है। ऐसे में अगर सरकारी विद्यालयों का सुधार हो जाए तो निजी स्कूलों की मनमानी पर काफी हद तक लगाम लग सकेगी। अभिभावकों ने एडेड कॉलेजों को भी सुधारने पर जोर दिया।
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ये सुझाव भी आए
- फीस बढ़ोतरी अभिभावक के वेतन के अनुसार होनी चाहिए। हर साल वेतन की अपेक्षा अधिक फीस बढ़ा दी जाती है।
- मिशनरी स्कूलों के लिए भी फीस बढ़ोतरी के नियम बनने चाहिए। वहां शिक्षकों का वेतन बढ़ता है। इससे अन्य विद्यालयों के शिक्षक भी वेतन बढ़ाने की मांग करते हैं और फीस बढ़ानी पड़ती है।
प्रबंधक भी बोले
बाल निकुंज इंटर कॉलेज के प्रबंधक एसएन जायसवाल ने कहा कि सरकारी स्कूलों में सरकार एक बच्चे पर बजट खर्च करती है, वही फीस निजी स्कूलों में भी लागू होनी चाहिए। सरकार जब फीस निर्धारित करेगी तो उसकी मॉनीटरिंग भी होगी। प्रबंधक रामजन्म सिंह ने कहा कि फीस का निर्धारण बहुत ही मुश्किल है। जिस विद्यालय की जैसी फीस है, वैसी सुविधाएं भी बच्चों को मिलती हैं। किसी अभिभावक को गुमराह कर उसके बच्चे का दाखिला नहीं लिया जाता। निजी स्कूल के कोआर्डिनेटर सुधीर मिश्रा ने कहा कि स्कूलों का वर्गीकरण करते हुए फीस निर्धारण होना चाहिए। कई बार निजी स्कूलों के सामने 100 प्रतिशत शुल्क जमा कराना भी चुनौती होता है। इससे वित्तीय बजट पर बोझ पड़ता है।
ये रहे मौजूद
अभिभावक आरके निगम, अफीक सिद्दीकी, वेद गुप्ता, कल्पना अग्रवाल, ज्योति, आयुष जायसवाल, अंजना भारती, अंकिता श्रीवास्तव, ऐश्वर्य सिंह, श्वेता श्रीवास्तव, निजी स्कूल के प्रबंधक एसएन जायसवाल, प्रबंधक रामजन्म सिंह, कोऑर्डिनेटर सुधीर मिश्रा।
