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Lucknow News: भ्रष्टाचार से कमाई अकूत संपत्ति पर कुंडली मारकर बैठे थे पूर्व एआरटीओ ललित कुमार, पीटते थे ईमानदारी का ढिंढोरा
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विभाग में पीटते थे ईमानदारी का ढिंढोरा, अफसरों से रहती थी अनबन
परिजनों के नाम से खरीदे थे प्लाट, खेतिहर जमीन व गहने
साै करोड़ कमाने के लक्ष्य के साथ करते थे काम
लखनऊ। पूर्व एआरटीओ ललित कुमार भ्रष्टाचार से कमाई अकूत संपत्ति पर कुंडली मारकर बैठे हुए थे। विभागीय अफसरों से उनकी अनबन थी। विभागीय कार्यक्रमों में उन्होंने कभी सहयोग नहीं किया। इतना ही नहीं वह हमेशा ईमानदारी का ढिंढोरा पीटते थे। परिजनों के नाम से प्लाट, खेतिहर जमीन व गहने खरीदे, जिन्हें लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा था।
परिवहन विभाग के पूर्व एआरटीओ ललित कुमार के अलीगंज स्थित आवास पर विजिलेंस की टीम ने हाल ही में छापा मारा, जहां से टीम को 13 किलो सोना, नाै किलो चांदी सहित कुल 32 करोड़ रुपये की आय से अधिक संपत्ति बरामद हुई। मामले के उजागर होने के बाद विभाग के अन्य भ्रष्ट अफसर अंडरग्राउंड हो गए हैं। अफसरों ने अपनी काली कमाई को ठिकाने लगाना शुरू कर दिया है। सूत्र बताते हैं कि ललित कुमार भ्रष्टाचार से कमाई अकूल काली कमाई पर कुंडली मारकर बैठते थे। उन्होंने कभी भी विभागीय कार्यक्रमों में किसी प्रकार का सहयोग नहीं किया। न कभी चंदा वगैरह दिया। इसे लेकर उनकी अपने सहयोगियों व विभागीय अफसरों से बनती नहीं थी। अनबन रहती थी। हालांकि इससे कभी भी ललित कुमार की सेहत पर फर्क नहीं पड़ा। ललित कुमार खुद अफसरों से कहते थे कि वह धर्मार्थ कार्य के लिए विभाग में नहीं आए हैं।
साै करोड़ कमाने का था लक्ष्य
विभागीय अफसर बताते हैं कि संभागीय निरीक्षक पद पर रहते हुए ललित कुमार ने वाहनों की फिटनेस आदि से मोटी कमाई की। इसके बाद जब प्रमोट होकर एआरटीओ बने तो उनकी कमाई भी बढ़ गई। वह अपने बेहद खास लोगों से कहते थे कि वह साै करोड़ रुपये कमाने का लक्ष्य लेकर आए हैं।
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रिश्तेदारों से संपत्ति को लेकर होता था झगड़ा
सूत्र बताते हैं कि पूर्व एआरटीओ ललित कुमार ने काली कमाई से खरीदी गई बहुत सी संपत्तियां अपने परिजनों के नाम की थी। इसमें बेटी, दामाद सहित अन्य परिजन शामिल हैं। उनके नाम पर जमीन, गहने, प्लाट, खेतिहर जमीन खरीदी, जिसे सेवानिवृत्ति के बाद लाैटाने की शर्त थी। लेकिन परिजनों ने ऐसा नहीं किया, जिसकी वजह से आए दिन झगड़ा व किचकिच होती थी।
पीटते थे ईमानदारी का ढिंढोरा
विभागीय अधिकारी बताते हैं कि ललित कुमार खुद के ईमानदार होने का ढिंढोरा पीटते थे। रह-रहकर आवेदकों, विभागीय लोगों को ईमानदारी का ज्ञान भी देते थे। जब उनके खिलाफ पहली बार जांच शुरू हुई तो मामले के निपटारे के लिए पांच लाख रुपये मांगे गए, जिस पर वह जांच अधिकारी के आगे खड़े होकर सिर्फ खुद के ईमानदार होने की रट लगाते रहे।
परिजनों के नाम से खरीदे थे प्लाट, खेतिहर जमीन व गहने
साै करोड़ कमाने के लक्ष्य के साथ करते थे काम
लखनऊ। पूर्व एआरटीओ ललित कुमार भ्रष्टाचार से कमाई अकूत संपत्ति पर कुंडली मारकर बैठे हुए थे। विभागीय अफसरों से उनकी अनबन थी। विभागीय कार्यक्रमों में उन्होंने कभी सहयोग नहीं किया। इतना ही नहीं वह हमेशा ईमानदारी का ढिंढोरा पीटते थे। परिजनों के नाम से प्लाट, खेतिहर जमीन व गहने खरीदे, जिन्हें लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा था।
परिवहन विभाग के पूर्व एआरटीओ ललित कुमार के अलीगंज स्थित आवास पर विजिलेंस की टीम ने हाल ही में छापा मारा, जहां से टीम को 13 किलो सोना, नाै किलो चांदी सहित कुल 32 करोड़ रुपये की आय से अधिक संपत्ति बरामद हुई। मामले के उजागर होने के बाद विभाग के अन्य भ्रष्ट अफसर अंडरग्राउंड हो गए हैं। अफसरों ने अपनी काली कमाई को ठिकाने लगाना शुरू कर दिया है। सूत्र बताते हैं कि ललित कुमार भ्रष्टाचार से कमाई अकूल काली कमाई पर कुंडली मारकर बैठते थे। उन्होंने कभी भी विभागीय कार्यक्रमों में किसी प्रकार का सहयोग नहीं किया। न कभी चंदा वगैरह दिया। इसे लेकर उनकी अपने सहयोगियों व विभागीय अफसरों से बनती नहीं थी। अनबन रहती थी। हालांकि इससे कभी भी ललित कुमार की सेहत पर फर्क नहीं पड़ा। ललित कुमार खुद अफसरों से कहते थे कि वह धर्मार्थ कार्य के लिए विभाग में नहीं आए हैं।
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साै करोड़ कमाने का था लक्ष्य
विभागीय अफसर बताते हैं कि संभागीय निरीक्षक पद पर रहते हुए ललित कुमार ने वाहनों की फिटनेस आदि से मोटी कमाई की। इसके बाद जब प्रमोट होकर एआरटीओ बने तो उनकी कमाई भी बढ़ गई। वह अपने बेहद खास लोगों से कहते थे कि वह साै करोड़ रुपये कमाने का लक्ष्य लेकर आए हैं।
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रिश्तेदारों से संपत्ति को लेकर होता था झगड़ा
सूत्र बताते हैं कि पूर्व एआरटीओ ललित कुमार ने काली कमाई से खरीदी गई बहुत सी संपत्तियां अपने परिजनों के नाम की थी। इसमें बेटी, दामाद सहित अन्य परिजन शामिल हैं। उनके नाम पर जमीन, गहने, प्लाट, खेतिहर जमीन खरीदी, जिसे सेवानिवृत्ति के बाद लाैटाने की शर्त थी। लेकिन परिजनों ने ऐसा नहीं किया, जिसकी वजह से आए दिन झगड़ा व किचकिच होती थी।
पीटते थे ईमानदारी का ढिंढोरा
विभागीय अधिकारी बताते हैं कि ललित कुमार खुद के ईमानदार होने का ढिंढोरा पीटते थे। रह-रहकर आवेदकों, विभागीय लोगों को ईमानदारी का ज्ञान भी देते थे। जब उनके खिलाफ पहली बार जांच शुरू हुई तो मामले के निपटारे के लिए पांच लाख रुपये मांगे गए, जिस पर वह जांच अधिकारी के आगे खड़े होकर सिर्फ खुद के ईमानदार होने की रट लगाते रहे।