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Bakrid 2026: 28 मई को मनाई जाएगी बकरीद, पुराने लखनऊ में छाई रौनक; सड़क पर नमाज न पढ़ने की अपील
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
Published by: Bhupendra Singh
Updated Tue, 26 May 2026 12:59 PM IST
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सार
Bakrid 2026: राजधानी में 28 मई को बकरीद मनाई जाएगी। इसे लेकर पुराने लखनऊ में रौनक छाई हुई है। ऐशबाग ईदगाह में सुबह 10 बजे नमाज होगी। सड़क पर नमाज न पढ़ने की अपील की गई है। मौलाना ने प्रशासनिक निर्देशों के पालन की नसीहत दी है। आगे पढ़ें पूरी खबर...
बकरीद 2026
- फोटो : adobe stock
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विस्तार
राजधानी लखनऊ में ईद-उल-अजहा (बकरीद) का पर्व 28 मई को मनाया जाएगा। मुस्लिम समुदाय में इसे लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। जहां बाजारों में बकरों की मंडी लगने लगी है। वहीं मस्जिदों और ईदगाहों में साफ-सफाई व व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया जा रहा है।
इस्लामिक सेंटर ऑफ इंडिया के अध्यक्ष एवं सुन्नी धर्मगुरु मौलाना खालिद रशीद फिरंगी महली ने बताया कि ऐशबाग स्थित ईदगाह में बकरीद की नमाज 28 मई को सुबह 10 बजे अदा की जाएगी। उन्होंने लोगों से समय से ईदगाह पहुंचने और प्रशासन के निर्देशों का पालन करने की अपील की है। साथ ही सड़कों पर नमाज अदा न करने को कहा है, ताकि यातायात व्यवस्था प्रभावित न हो। उन्होंने कुर्बानी के दौरान साफ-सफाई और एहतियात बरतने की भी अपील की। कुर्बानी निर्धारित स्थानों पर ही करें और अवशेष खुले में न डालें।
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सभी धर्म गुरुओं ने खुले में कुर्बानी नहीं करने की भी मुस्लिम समुदाय से अपील की है। बकरीद को लेकर प्रशासन भी सतर्क है। ईदगाहों और संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की जा रही है, जबकि नगर निगम की ओर से सफाई और पेयजल की अतिरिक्त व्यवस्थाएं की जा रही हैं।
इस्लामिक सेंटर ऑफ इंडिया के अध्यक्ष एवं सुन्नी धर्मगुरु मौलाना खालिद रशीद फिरंगी महली ने बताया कि ऐशबाग स्थित ईदगाह में बकरीद की नमाज 28 मई को सुबह 10 बजे अदा की जाएगी। उन्होंने लोगों से समय से ईदगाह पहुंचने और प्रशासन के निर्देशों का पालन करने की अपील की है। साथ ही सड़कों पर नमाज अदा न करने को कहा है, ताकि यातायात व्यवस्था प्रभावित न हो। उन्होंने कुर्बानी के दौरान साफ-सफाई और एहतियात बरतने की भी अपील की। कुर्बानी निर्धारित स्थानों पर ही करें और अवशेष खुले में न डालें।
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प्रशासनिक नियमों का पालन भी जरूरी
शिया धर्म गुरु मौलाना कल्बे जवाद और मरकजी शिया चांद कमेटी के अध्यक्ष मौलाना सैफ अब्बास नकवी ने भी बकरीद का पर्व 28 मई को मनाए जाने की बात कही। दोनों धर्मगुरुओं ने कहा कि धार्मिक परंपराओं के साथ-साथ प्रशासनिक नियमों और सामाजिक जिम्मेदारियों का पालन भी जरूरी है।
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सभी धर्म गुरुओं ने खुले में कुर्बानी नहीं करने की भी मुस्लिम समुदाय से अपील की है। बकरीद को लेकर प्रशासन भी सतर्क है। ईदगाहों और संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की जा रही है, जबकि नगर निगम की ओर से सफाई और पेयजल की अतिरिक्त व्यवस्थाएं की जा रही हैं।
सड़क पर नमाज न पढ़ने की अपील
ईद-उल-अजहा को लेकर दरगाह शाहमीना शाह में पीस कमेटी की हुई बैठक में लोगों से मस्जिद परिसर में ही नमाज अदा करने, सड़कों पर नमाज न पढ़ने और त्योहार पारंपरिक तरीके से मनाने की अपील की गई। साथ ही कुर्बानी के अवशेष खुले में न फेंककर नगर निगम के कूड़ेदानों में डालने को कहा गया।दरगाह शाहमीना फाउंडेशन के सेक्रेटरी रूफी बाबा ने त्योहार के दौरान साफ-सफाई, बिजली और सुरक्षा व्यवस्था बेहतर रखने की मांग उठाई। बैठक में प्रशासन की ओर से एडीसीपी पश्चिम धनंजय सिंह कुशवाहा, एसीपी चौक राजकुमार सिंह, इंस्पेक्टर चौक नागेश उपाध्याय व दरगाह कमेटी की ओर से शाकिर अली मीनाई, मौलाना वासिफ, पार्षद मोहम्मद हलीम, राहुल मिश्रा, नदीम खान आदि मौजूद रहे।
पुराने लखनऊ में छाई रौनक
बकरीद की दस्तक के साथ ही पुराने लखनऊ की गलियां फिर रौनक से भर उठी हैं। चौक की तंग गलियों से लेकर नक्खास के बाजार, अकबरी गेट की दुकानों और हुसैनाबाद की सड़कों तक हर तरफ त्योहार का रंग दिखाई देने लगा है। कहीं बच्चे बकरों को रंगीन फीते बांधते नजर आ रहे हैं तो कहीं परिवार कुर्बानी के लिए पसंदीदा बकरा चुनने में घंटों वक्त बिता रहे हैं।बकरीद यहां सिर्फ एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि लखनऊ की तहजीब, अपनापन और गंगा-जमुनी संस्कृति की खूबसूरत झलक भी बनकर सामने आ रही है। शिया और सुन्नी दोनों समुदायों में त्योहार को लेकर खास उत्साह है। नक्खास, दुबग्गा और ठाकुरगंज के बाजारों में लंबे कान, ऊंचे कद और मजबूत शरीर वाले जमुनापारी और बरबरी नस्ल के बकरों की सबसे ज्यादा मांग देखी जा रही है।
सुन्नी परिवारों में बड़े और आकर्षक बकरों को पसंद करने का चलन अधिक नजर आ रहा है। कई परिवार बच्चों की खुशी के लिए बकरों को खास नाम भी दे रहे हैं। वहीं चौक, कश्मीरी मोहल्ला और हुसैनाबाद क्षेत्र के कई शिया परिवार सादगी और पाकीजगी को ध्यान में रखते हुए सफेद या हल्के रंग के स्वस्थ बकरों को प्राथमिकता दे रहे हैं।
कुर्बानी पर्व की वास्तविक भावना को दर्शाती है
घरों में भी बकरों की खास देखभाल की जा रही है। बच्चे उन्हें नहलाने, खिलाने और सजाने में पूरे उत्साह से जुटे हैं। धर्म गुरुओं का कहना है कि कुर्बानी का असली संदेश त्याग, इंसानियत और जरूरतमंदों की मदद करना है। दिखावे से दूर रहकर सच्चे मन से की गई कुर्बानी ही इस पर्व की वास्तविक भावना को दर्शाती है।मरकजी चांद कमेटी के अध्यक्ष मौलाना सैफ अब्बास नकवी ने कहा कि ईद-उल-अजहा इंसान को त्याग, सब्र और इंसानियत का संदेश देती है। कुर्बानी केवल रस्म नहीं, बल्कि अल्लाह की राह में अपनी मोहब्बत और भरोसे का इजहार है। नमाज के बाद सभी मुल्क में तरक्की, भाईचारे की दुआ करें।
मौलाना खालिद रशीद फिरंगी महली ने कहा कि बकरीद का त्योहार भाईचारे, बराबरी और जरूरतमंदों तक खुशियां पहुंचाने का पैगाम देता है। कुर्बानी में नीयत और सादगी सबसे ज्यादा अहम है।