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Lucknow News: मरीज के हृदय वॉल्व से ही लैब में तैयार होंगी कोशिकाएं

Tue, 28 Jul 2026 02:32 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Tue, 28 Jul 2026 02:32 AM IST
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Cells will be cultivated in the lab directly from the patient's heart valve.
प्रतीकात्मक।
लखनऊ। पीजीआई के वैज्ञानिकों ने हृदय रोग के इलाज की दिशा में महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है। शोधकर्ताओं ने मरीजों के खराब हृदय वॉल्व से विशेष कोशिकाओं को अलग कर इन्हें प्रयोगशाला में जीवित और सक्रिय रखने का मॉडल तैयार किया गया है।
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यह उपलब्धि नई दवाओं के विकास का मार्ग प्रशस्त करेगी। भविष्य में मरीज की अपनी कोशिकाओं से कृत्रिम हृदय वॉल्व भी बनाए जा सकेंगे। केंद्र सरकार के जैव प्रौद्योगिकी विभाग ने इस शोध को वित्तीय सहयोग दिया है। अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिका जर्नल ऑफ फिजियोलॉजी एंड बायोकेमिस्ट्री ने भी इसे मान्यता दी है। पीजीआई के निदेशक डॉ. आरके धीमन ने पूरी शोध टीम को इस सफलता पर बधाई दी है। यह मॉडल रूमैटिक हृदय रोग में वॉल्व को होने वाले नुकसान को समझने में बहुत उपयोगी होगा।
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सर्जरी की आवश्यकता कम होगी
पीजीआई के सीवीटीएस विभाग के डॉ. शांतनु पांडे और मॉलिक्यूलर मेडिसिन विभाग के डॉ. आलोक कुमार के नेतृत्व में हुए इस शोध पता चला कि लगातार होने वाली सूजन और फाइब्रोसिस (ऊतक) का सख्त होना ही वॉल्व को नुकसान पहुंचाने का मुख्य कारण है। डॉ. पांडे के अनुसार, यदि दवाओं के जरिये सूजन और फाइब्रोसिस की प्रक्रिया को रोका जा सके तो कई मरीजों में हृदय वाल्व बदलने की सर्जरी टाली जा सकती है।
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इन दो रास्तों को साधने पर होगा काम
शोध में वॉल्व को नुकसान पहुंचाने वाले दो जैविक रास्तों की पहचान की गई है। अब इन्हीं रास्तों को निशाना बनाकर ऐसी दवाएं विकसित करने की कोशिश होगी। ये दवाएं वॉल्व को खराब होने से रोकेंगी या बीमारी की रफ्तार को धीमा करेंगी। इससे मरीजों को लंबे समय तक राहत मिलेगी। नई दवाओं के परीक्षण और बीमारी से जुड़े नए बायोमार्कर की खोज में भी मदद मिलेगी।

शोध टीम में शामिल वैज्ञानिक
शोध टीम में सीवीटीएस विभाग से डॉ. एसके अग्रवाल, क्लीनिकल इम्यूनोलॉजी से डॉ. विकास अग्रवाल, डॉ. मोहित के. राय, मॉलिक्यूलर मेडिसिन विभाग से साई रामिरेड्डी और अंजलि सिंह, पैथोलॉजी विभाग से डॉ. विनीता अग्रवाल भी शामिल रहे।

ये है खास
- मरीज के वॉल्व से कोशिका लेकर लैब में विकसित किया गया मॉडल
- सूजन और फाइब्रोसिस रोकने वाली दवाओं का रास्ता साफ
- भविष्य में मरीज की अपनी कोशिकाओं से बनेगा हार्ट वॉल्व
- शोध को केंद्र सरकार के जैव प्रौद्योगिकी विभाग का सहयोग
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