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UP: लखनऊ में नेशनल इंटरवेंशनल काउंसिल का शुभारंभ, सीएम योगी बोले-हमारी दिनचर्या बदली तो परिणाम हमारे सामने हैं
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
Published by: Bhupendra Singh
Updated Fri, 10 Apr 2026 12:30 PM IST
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सार
लखनऊ में नेशनल इंटरवेंशनल काउंसिल 2026 का शुभारंभ हुआ। इस मौके पर सीएम योगी ने कहा कि आज हमारी दिनचर्या बदली है तो परिणाम और चुनौतियां हमारे सामने हैं। आगे पढ़ें पूरी खबर...
सीएम योगी आदित्यनाथ
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
राजधानी लखनऊ स्थित अटल बिहारी वाजपेयी चिकित्सा विश्वविद्यालय में शुक्रवार को नेशनल इंटरवेंशनल काउंसिल 2026 का शुभारंभ हुआ। समारोह कार्डियोलॉजी सोसायटी ऑफ इंडिया की तरफ से आयोजित किया गया। इसका शुभारंभ सीएम योगी आदित्यनाथ ने किया।
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इस मौके पर सीएम ने कहा कि हमारे देश में प्राचीनकाल से ही समय पर जगना, सोना और संतुलित आहार लेना हमारी दिनचर्या का हिस्सा रहा है। लेकिन, दिनचर्या बदली, लाइफस्टाइल बदली तो परिणाम भी हमारे सामने हैं और चुनौतियां भी। सरकार स्वास्थ्य अवसंरचना और किफायती उपचार के विस्तार पर काम कर रही है। दूसरी ओर, समाज को बीमारियों से पहले ही सुरक्षित करने की रणनीति यानी ‘बचाव’ को प्राथमिकता देना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। यही द्विस्तरीय दृष्टिकोण आने वाले भारत की स्वास्थ्य सुरक्षा का आधार बनेगा और ‘विकसित भारत’ की परिकल्पना को वास्तविकता में बदलने की दिशा तय करेगा।
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नियमित दिनचर्या हमेशा से स्वस्थ जीवन का आधार रही है
उन्होंने कहा कि नॉन-कम्युनिकेबल डिजीज आज समाज के लिए गंभीर चिंता का विषय बन चुकी है। जबकि, भारत की परंपरा में संतुलित आहार और नियमित दिनचर्या हमेशा से स्वस्थ जीवन का आधार रही है। बदलती जीवनशैली के चलते उत्पन्न चुनौतियों के बीच अब स्वास्थ्य के दो प्रमुख आयाम-बचाव और उपचार स्पष्ट रूप से सामने हैं।सीएम ने आगे कहा कि जिस तेजी से नॉन-कम्युनिकेबल बीमारियां बढ़ रही हैं। समाज का बड़ा वर्ग इसकी चपेट में आ रहा है, वह गंभीर चिंता का विषय है। पहले गंभीर बीमारी का मतलब पूरे परिवार के लिए आर्थिक संकट होता था, क्योंकि न पर्याप्त स्वास्थ्य संस्थान थे और न ही विशेषज्ञों की उपलब्धता। लेकिन, पिछले वर्षों में स्थिति में बड़ा बदलाव आया है। आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के माध्यम से आज देश के लगभग 55-60 करोड़ लोगों को प्रति वर्ष 5 लाख रुपये तक की स्वास्थ्य सुरक्षा मिल रही है।
1400 करोड़ रुपये उपचार के लिए जनता को उपलब्ध कराए गए
उन्होंने आगे कहा कि वर्ष 2025 में मुख्यमंत्री राहत कोष के माध्यम से लगभग 1400 करोड़ रुपये उपचार के लिए जनता को उपलब्ध कराए गए, जो सरकार की संवेदनशीलता का प्रमाण है। हाल ही में शिक्षकों, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, आशा वर्कर्स, एएनएम तथा मिड-डे मील से जुड़े रसोइयों को भी इस योजना में कवर किया गया है। ताकि, समाज का एक बड़ा वर्ग अब स्वास्थ्य सुरक्षा के दायरे में आ गया है।एक दशक पहले उत्तर प्रदेश में केवल 17 सरकारी मेडिकल कॉलेज संचालित थे, जो 25 करोड़ की आबादी के लिए बेहद अपर्याप्त थे। आज इनकी संख्या बढ़कर 81 हो गई है। 2 एम्स भी संचालित हैं। हर जिले में आईसीयू की स्थापना, अनेक स्थानों पर कैथ लैब की शुरुआत, निजी क्षेत्र में सुपर स्पेशलिटी अस्पतालों का तेजी से विस्तार और पुराने मेडिकल कॉलेजों के इंफ्रास्ट्रक्चर का सुदृढ़ीकरण स्वास्थ्य सेवाओं को नई मजबूती दे रहा है।
अधिक स्मार्टफोन के उपयोग ने नई बीमारियों को जन्म दिया
सीएम ने उदाहरण देते हुए बताया कि केजीएमयू में प्रतिदिन 12 से 14 हजार, एम्स दिल्ली में 16 से 17 हजार और एसजीपीजीआई में 10 से 12 हजार तक ओपीडी होती है। ऐसी स्थिति में प्रत्येक मरीज को पर्याप्त समय और गुणवत्तापूर्ण उपचार दे पाना कठिन हो जाता है। भविष्य में यह दबाव और बढ़ने की आशंका है।उन्होंने कहा कि बदलती जीवनशैली, विशेषकर प्रतिदिन 4 से 6 घंटे स्मार्टफोन के उपयोग ने नई बीमारियों को जन्म दिया है। वहीं डायबिटीज का तेजी से बढ़ता प्रसार भी बड़ी चुनौती बनकर सामने आया है। इन परिस्थितियों में केवल सरकारी प्रयास पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि व्यापक जन जागरुकता अत्यंत आवश्यक है।
सीएम ने आगे कहा कि आज की सबसे बड़ी चुनौती बदलती जीवनशैली और खान-पान में बढ़ती मिलावट है। अतीत में लोग समय पर सोते-जागते और संतुलित आहार लेते थे, जबकि आज स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है।
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