{"_id":"69d6c455f5d016a5e0067b1a","slug":"drivers-licence-verification-is-lax-with-frightened-parents-taking-their-children-to-school-themselves-lucknow-news-c-13-1-lko1072-1683255-2026-04-09","type":"story","status":"publish","title_hn":"Lucknow News: वाहन चालकों के लाइसेंस सत्यापन में ढील, डरे माता-पिता खुद पहुंचा रहे बच्चों को स्कूल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Lucknow News: वाहन चालकों के लाइसेंस सत्यापन में ढील, डरे माता-पिता खुद पहुंचा रहे बच्चों को स्कूल
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
Updated Thu, 09 Apr 2026 02:40 AM IST
विज्ञापन
स्कूली बसों की हालत ऐसी है कि सुरक्षा को दरकिनार कर गेट के सामने ही बच्चों के लिए एक अलग सीट लग
विज्ञापन
लखनऊ। यदि आप अपने बच्चों को स्कूल किसी वैन या बस से भेजना चाहते हैं तो मानक के अनुसार आपको वाहन बड़ी ही मुश्किल से मिलेंगे। ऊपर से चालकों के पास लाइसेंस है कि नहीं है, इसका सत्यापन भी आसान नहीं है।
शहर में कई ऐसे वाहन हैं, जिनके चालकों के पास डीएल नहीं है। अभिभावक भी कहते हैं कि जब ड्राइवरों ने मांगने पर भी लाइसेंस नहीं दिखाए तो उन्होंने बच्चों को खुद स्कूल पहुंचाने का जिम्मा उठाया है। वहीं, न पुलिस, न ही परिवहन अधिकारी ऐसे ड्राइवरों का सत्यापन कर रहे हैं, जब कि नियम है कि स्कूली वाहन व्यावसायिक होते हैं, इसलिए लाइसेंस भी व्यावसायिक होने चाहिए।
न वाहन फिट न चालक का सत्यापन
आलमबाग निवासी अविनाश ने बताया कि उनका बेटा आशियाना स्थित एक स्कूल में पढ़ता है। उन्होंने जब अपने बच्चे का प्रवेश विद्यालय में कराया, तो स्कूली वाहनों के ड्राइवरों से बच्चे को स्कूल पहुंचाने की बात हुई तो उन्होंने मनमाने पैसे मांगे। जब चालक से लाइसेंस दिखाने को कहा तो वह असमर्थ दिखा। वाहन में अतिरिक्त सीटें लगी थीं। इसलिए बच्चे की सुरक्षा का ध्यान रखते हुए खुद स्कूल ले जाते और लाते हैं।
एक हादसे ने खोल दीं आंखें
बंगला बाजार क्षेत्र के अमित उपाध्याय ने बताया कि लखनऊ में कई हादसे हमने देखे हैं। एक हादसा आशियाना में भी हुआ था। तब ड्राइवर का लाइसेंस नहीं मिला था। कंडक्टर का सत्यापन भी नहीं था। यह देख अब अपने बच्चों को स्वयं स्कूल पहुंचाने जाता हूं। इससे मुझे भी उनकी सुरक्षा के प्रति चिंता नहीं रहती है। खटारा स्कूली वाहनों पर कार्रवाई भी नहीं होती है।
एलपीजी सिलिंडर देख बच्चे को खुद लाने-ले जाने लगी
आशियाना क्षेत्र की चांदनी ने बताया कि उनका बेटा पहले वैन से आता-जाता था। वैन में सीटें फटी थीं। जब एलपीजी सिलिंडर लगा देखा तो बच्चे की सुरक्षा का ध्यान रखते हुए खुद से पहुंचाती हूं और छुट्टी के समय लेने भी जाती हूं।
पुलिस का दावा : 90 फीसदी चालकों का है सत्यापन
संयुक्त पुलिस आयुक्त कानून व्यवस्था बबलू कुमार का दावा है कि 90 फीसदी स्कूली वाहन चालकों का सत्यापन हो चुका है, जिनके सत्यापन नहीं हैं, उन्हें कराने की व्यवस्था की जाएगी।
Trending Videos
शहर में कई ऐसे वाहन हैं, जिनके चालकों के पास डीएल नहीं है। अभिभावक भी कहते हैं कि जब ड्राइवरों ने मांगने पर भी लाइसेंस नहीं दिखाए तो उन्होंने बच्चों को खुद स्कूल पहुंचाने का जिम्मा उठाया है। वहीं, न पुलिस, न ही परिवहन अधिकारी ऐसे ड्राइवरों का सत्यापन कर रहे हैं, जब कि नियम है कि स्कूली वाहन व्यावसायिक होते हैं, इसलिए लाइसेंस भी व्यावसायिक होने चाहिए।
विज्ञापन
विज्ञापन
न वाहन फिट न चालक का सत्यापन
आलमबाग निवासी अविनाश ने बताया कि उनका बेटा आशियाना स्थित एक स्कूल में पढ़ता है। उन्होंने जब अपने बच्चे का प्रवेश विद्यालय में कराया, तो स्कूली वाहनों के ड्राइवरों से बच्चे को स्कूल पहुंचाने की बात हुई तो उन्होंने मनमाने पैसे मांगे। जब चालक से लाइसेंस दिखाने को कहा तो वह असमर्थ दिखा। वाहन में अतिरिक्त सीटें लगी थीं। इसलिए बच्चे की सुरक्षा का ध्यान रखते हुए खुद स्कूल ले जाते और लाते हैं।
एक हादसे ने खोल दीं आंखें
बंगला बाजार क्षेत्र के अमित उपाध्याय ने बताया कि लखनऊ में कई हादसे हमने देखे हैं। एक हादसा आशियाना में भी हुआ था। तब ड्राइवर का लाइसेंस नहीं मिला था। कंडक्टर का सत्यापन भी नहीं था। यह देख अब अपने बच्चों को स्वयं स्कूल पहुंचाने जाता हूं। इससे मुझे भी उनकी सुरक्षा के प्रति चिंता नहीं रहती है। खटारा स्कूली वाहनों पर कार्रवाई भी नहीं होती है।
एलपीजी सिलिंडर देख बच्चे को खुद लाने-ले जाने लगी
आशियाना क्षेत्र की चांदनी ने बताया कि उनका बेटा पहले वैन से आता-जाता था। वैन में सीटें फटी थीं। जब एलपीजी सिलिंडर लगा देखा तो बच्चे की सुरक्षा का ध्यान रखते हुए खुद से पहुंचाती हूं और छुट्टी के समय लेने भी जाती हूं।
पुलिस का दावा : 90 फीसदी चालकों का है सत्यापन
संयुक्त पुलिस आयुक्त कानून व्यवस्था बबलू कुमार का दावा है कि 90 फीसदी स्कूली वाहन चालकों का सत्यापन हो चुका है, जिनके सत्यापन नहीं हैं, उन्हें कराने की व्यवस्था की जाएगी।

स्कूली बसों की हालत ऐसी है कि सुरक्षा को दरकिनार कर गेट के सामने ही बच्चों के लिए एक अलग सीट लग

स्कूली बसों की हालत ऐसी है कि सुरक्षा को दरकिनार कर गेट के सामने ही बच्चों के लिए एक अलग सीट लग

स्कूली बसों की हालत ऐसी है कि सुरक्षा को दरकिनार कर गेट के सामने ही बच्चों के लिए एक अलग सीट लग

स्कूली बसों की हालत ऐसी है कि सुरक्षा को दरकिनार कर गेट के सामने ही बच्चों के लिए एक अलग सीट लग

स्कूली बसों की हालत ऐसी है कि सुरक्षा को दरकिनार कर गेट के सामने ही बच्चों के लिए एक अलग सीट लग

स्कूली बसों की हालत ऐसी है कि सुरक्षा को दरकिनार कर गेट के सामने ही बच्चों के लिए एक अलग सीट लग

स्कूली बसों की हालत ऐसी है कि सुरक्षा को दरकिनार कर गेट के सामने ही बच्चों के लिए एक अलग सीट लग