AmbedkarNagar News: युवती की हत्या में चार को आजीवन कारावास, मां और चाचा दोषमुक्त; 12 साल बाद मिला न्याय
अंबेडकरनगर में प्रतिमा हत्याकांड में चार दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। वहीं, मां और चाचा दोषमुक्त करार दिए गए। मामले में 12 साल बाद परिवार को न्याय मिला। आगे पढ़ें पूरी खबर...
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यूपी में अंबेडकरनगर में वर्ष 2014 में हुई युवती की हत्या के मामले में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (प्रथम) राम विलास सिंह ने चार दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। वहीं, पुलिस द्वारा आरोपी बनाई गई मृतक युवती की मां और चाचा को साक्ष्यों के अभाव में दोषमुक्त कर दिया।
मामला सम्मनपुर थाना क्षेत्र के मोहिउद्दीनपुर जगन्नाथपुर गांव का है। गांव निवासी अलगू राम चौहान ने पुलिस को दी गई शिकायत में बताया था कि 20 अप्रैल 2014 की रात वह अपनी पत्नी शारदा देवी के साथ खेत की सिंचाई करने गए थे। घर के बरामदे में उनकी पुत्री प्रतिमा (19) सो रही थी। सुबह जब वे लौटे तो पुत्री गायब थी। बाद में उसका शव पास के ही एक खेत में मिला। दुपट्टे से गला घोंटकर उसकी हत्या की गई थी।
अवैध संबंधों में वारदात को अंजाम दिया गया
पुलिस ने शुरुआत में अज्ञात के खिलाफ मामला दर्ज किया था, लेकिन विवेचना के बाद मृतका की मां शारदा देवी और एक अन्य व्यक्ति रामइंदर को आरोपी बनाते हुए चार्जशीट दाखिल कर दी। पुलिस का तर्क था कि दोनों के बीच अवैध संबंधों के कारण इस वारदात को अंजाम दिया गया। हालांकि, कोर्ट में सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने रामबल चौहान, विक्रम चौहान, उमाशंकर और राजकुमार चौहान को आरोपी बनाने की अपील की। मृतका की दादी और अन्य गवाहों ने गवाही दी कि इन चारों ने ही प्रतिमा को घर से उठाकर ले जाकर उसकी हत्या की थी।
न्यायालय ने पाया कि पुलिस ने विवेचना में लापरवाही बरती और मृतका की मां शारदा देवी व रामइंदर को गलत तरीके से फंसाया गया था। कोर्ट ने इन दोनों को बाइज्जत बरी कर दिया। वहीं, रामबल, विक्रम, उमाशंकर और राजकुमार चौहान को हत्या का दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। प्रत्येक पर 15-15 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया।
कोर्ट की तल्ख टिप्पणी- पुलिस ने गढ़ी झूठी कहानी
युवती की हत्या के मामले में पुलिस की विवेचना न केवल लापरवाह रही, बल्कि अदालत में पेश किया गया आरोप पत्र भी पूरी तरह दिशाहीन था। कोर्ट में गवाहों के बयानों से यह स्पष्ट हो गया कि पुलिस ने बिना किसी ठोस सबूत के मृतका की मां और चाचा के बीच अवैध संबंधों की मनगढ़ंत कहानी रची और उसी आधार पर आरोप पत्र दाखिल कर दिया। जबकि, अदालत की सक्रियता से असली दोषियों रामबल, विक्रम, उमाशंकर और राजकुमार चौहान की संलिप्तता उजागर हुई।गवाहों ने अपने बयानों में यहां तक कहा कि पुलिस ने इन चारों को बचाने के लिए देवर-भाभी के पवित्र रिश्ते को कलंकित करने का प्रयास किया। विवेचना के दौरान घटनास्थल पर गला घोंटने के अलावा खून बहने (रक्तस्राव) के साक्ष्य भी मिले थे, लेकिन पुलिस ने इस महत्वपूर्ण बिंदु पर जांच करना उचित नहीं समझा।