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सुना है क्या: आज 'मैडम को फूल से नफरत' की कहानी...लगी फटकार तो याद आई जिम्मेदारी के किस्से
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
Published by: आकाश द्विवेदी
Updated Sat, 10 Jan 2026 10:32 AM IST
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सुना है क्या/suna hai kya
- फोटो : अमर उजाला
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यूपी के राजनीतिक गलियारे और प्रशासनिक गलियों में आज तीन किस्से काफी चर्चा में रहे। चाहे-अनचाहे आखिर ये बाहर आ ही जाते हैं। इन्हें रोकने की हर कोशिश नाकाम होती है। आज की कड़ी में 'मैडम को फूल से नफरत' की कहानी। इसके अलावा 'लगी फटकार तो याद आई जिम्मेदारी' और 'साहब को खरमास खत्म होने का इंतजार' के किस्से भी चर्चा में रहे। आगे पढ़ें, नई कानाफूसी...
उन्होंने अपने गेट पर कार्यरत कर्मी को भी बुलाकर फटकार लगाई। साफ कहा कि कोई भी फूल लेकर आए तो कह देना कि मैडम को फूलों से नफरत है। अब बेचारा कर्मी सभी को बता रहा है कि मैडम को फूल से नफरत है। शासन-सत्ता में जहां फूल की धमक है, वहीं मैडम की फूल से नफरत सुर्खियों में है।
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मैडम को फूल से नफरत
सेहत से जुड़े महकमे की कमान संभाल रहीं मैडम को फूल से नफरत है। नए साल पर एक डॉक्टर साहब मैडम के लिए फूल लेकर पहुंचे। उन्होंने संदेशा भिजवाया। मैडम ने कमरे में बुला लिया। डॉक्टर साहब अंदर पहुंचे तो हाथ में गुलदस्ता था। फिर क्या, मैडम आगबबूला हो गईं।
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उन्होंने अपने गेट पर कार्यरत कर्मी को भी बुलाकर फटकार लगाई। साफ कहा कि कोई भी फूल लेकर आए तो कह देना कि मैडम को फूलों से नफरत है। अब बेचारा कर्मी सभी को बता रहा है कि मैडम को फूल से नफरत है। शासन-सत्ता में जहां फूल की धमक है, वहीं मैडम की फूल से नफरत सुर्खियों में है।
लगी फटकार तो याद आई जिम्मेदारी
ट्रैफिक जाम ने नए साल के जश्न को फीका कर दिया था। लोग सोशल मीडिया पर जिम्मेदारों पर सवाल खड़े कर रहे थे। ऊपर तक संदेश पहुंचा कि जाम ने शहर को बेहाल कर दिया। फिर क्या कमिश्नरेट में तैनात बड़े अफसर को फटकार लगी। तब साहब को अपनी जिम्मेदारी का अहसास हुआ। बंकर में रहकर राजधानी संभालने वाले साहब सामने आए, बैठकें की और ट्रैफिक सुधारने की कवायद शुरू की।
साहब को खरमास खत्म होने का इंतजार
प्रदेश में एक प्रमुख विश्वविद्यालय में लगभग चार महीने के इंतजार के बाद बड़े साहब की तैनाती हुई। इसके बाद विश्वविद्यालय में लंबे समय से चल रही खींचतान खुद-ब-खुद धीमी पड़ गई लेकिन वहां के लोगों का इंतजार खत्म नहीं हो रहा। शिक्षक और अधिकारी बड़े साहब के नए-पुराने संस्थान से जानकारी जुटाने में लगे हैं कि साहब, कब आएंगे? हालांकि पता चलाहै कि साहब खरमास समाप्त होने का इंतजार कर रहे हैं।