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Lucknow News: केजीएमयू में भर्ती लावारिस मरीजों का मानवीय उपचार
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केजीएमयू।
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लखनऊ। केजीएमयू के न्यूरोसर्जरी विभाग ने मानवता की मिसाल पेश की है। यहां घायल अवस्था में भर्ती हुए दो लावारिस मरीजों का इलाज परिवार के सदस्य की तरह किया जा रहा है। अब उनकी हालत में सुधार के बाद परिजनों से मिलाने के प्रयास तेज कर दिए गए हैं।
दोनों मरीज शताब्दी फेज टू के पंचम तल पर न्यूरो सर्जरी वार्ड में भर्ती हैं। न्यूरोसर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ. बीके ओझा ने बताया कि कनौसी मानक नगर निवासी विशाल वर्मा (21) पांच अप्रैल को मानकनगर क्षेत्र में घायल मिले थे। पुलिस ने उन्हें इमरजेंसी में भर्ती कराया था। वह अभी बेहोश हैं। उसकी जेब से मिले आधार कार्ड से उनकी पहचान हुई। तमाम प्रयासों के बावजूद उसके परिवार से संपर्क नहीं हो सका है
वहीं, दूसरा मरीज करीब सोलह-सत्रह वर्ष का किशोर है। वह 7 अगस्त 2025 को बाराबंकी में ट्रेन से गिरकर गंभीर रूप से घायल हुआ था। 8 अगस्त 2025 को उसके सिर का ऑपरेशन किया गया। अब उसकी स्थिति में सुधार है, लेकिन वह अपना नाम या पता स्पष्ट नहीं बता पा रहा है। डॉ. बीके ओझा ने बताया कि इस किशोर के इलाज में सिस्टर प्रिया राय और डॉ. अभिषेक सिंह की टीम ने विशेष मेहनत की है। विभाग के कर्मचारी अतुल उपाध्याय अपनी टीम के साथ उसे बाराबंकी ले गए। वहां पुलिस थानों, रेलवे स्टेशन, मंदिरों और स्कूलों में पहचान कराने की कोशिश की गई। हालांकि, वह किसी स्थान को पहचान नहीं सका। इससे कयास है कि वह दूर दराज का रहने वाला हो सकता है।
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दोनों मरीज शताब्दी फेज टू के पंचम तल पर न्यूरो सर्जरी वार्ड में भर्ती हैं। न्यूरोसर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ. बीके ओझा ने बताया कि कनौसी मानक नगर निवासी विशाल वर्मा (21) पांच अप्रैल को मानकनगर क्षेत्र में घायल मिले थे। पुलिस ने उन्हें इमरजेंसी में भर्ती कराया था। वह अभी बेहोश हैं। उसकी जेब से मिले आधार कार्ड से उनकी पहचान हुई। तमाम प्रयासों के बावजूद उसके परिवार से संपर्क नहीं हो सका है
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वहीं, दूसरा मरीज करीब सोलह-सत्रह वर्ष का किशोर है। वह 7 अगस्त 2025 को बाराबंकी में ट्रेन से गिरकर गंभीर रूप से घायल हुआ था। 8 अगस्त 2025 को उसके सिर का ऑपरेशन किया गया। अब उसकी स्थिति में सुधार है, लेकिन वह अपना नाम या पता स्पष्ट नहीं बता पा रहा है। डॉ. बीके ओझा ने बताया कि इस किशोर के इलाज में सिस्टर प्रिया राय और डॉ. अभिषेक सिंह की टीम ने विशेष मेहनत की है। विभाग के कर्मचारी अतुल उपाध्याय अपनी टीम के साथ उसे बाराबंकी ले गए। वहां पुलिस थानों, रेलवे स्टेशन, मंदिरों और स्कूलों में पहचान कराने की कोशिश की गई। हालांकि, वह किसी स्थान को पहचान नहीं सका। इससे कयास है कि वह दूर दराज का रहने वाला हो सकता है।