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आईएएस रिंकू सिंह ने दिया त्यागपत्र: वेतन की तुलना में योगदान अत्यंत सीमित, भीतर गंभीर नैतिक द्वंद्व

अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ Published by: Ishwar Ashish Bhartiya Updated Wed, 01 Apr 2026 12:32 PM IST
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सार

आईएएस रिंकू सिंह राही ने त्यागपत्र में सामने आ रही बाधाओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि प्राप्त वेतन, सुविधाओं एवं सम्मान के अनुपात में उनका वास्तविक योगदान अत्यंत सीमित रह जाना एक गंभीर नैतिक द्वंद्व पैदा करता है।

IAS Rinku Singh resigns: Contribution extremely limited compared to salary
आईएएस रिंकू सिंह राही (फाइल फोटो) - फोटो : X
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विस्तार

उपेक्षा से नाराज 2023 बैच के आईएएस अफसर रिंकू सिंह राही ने इस्तीफा दे दिया। उन्होंने अपने त्यागपत्र में लिखा कि प्राप्त वेतन, सुविधाओं एवं सम्मान के अनुपात में उनका वास्तविक योगदान अत्यंत सीमित रह जाना एक गंभीर नैतिक द्वंद्व पैदा करता है। जहां भी कार्य करने के अवसर उपलब्ध होते हैं, वहां स्थापित कुप्रथाओं का सुदृढ़ तंत्र है। यह तंत्र शासनादेशों को उनकी वास्तविक मंशा के अनुरूप लागू करने के प्रयासों में बाधाओं को जन्म देता है। निष्पक्ष सुनवाई के अभाव में यह स्थिति और गंभीर हो जाती है।

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सांविधानिक मूल्यों से समझौता बिना काम करना असंभव : राही ने लिखा है कि व्यावहारिक स्तर पर ऐसी अनेक कुव्यवस्थाएं प्रचलित हैं, जो औपचारिक रूप से स्वीकार्य न होते हुए भी कार्यप्रणाली का अंग बन चुकी हैं। वरिष्ठ स्तर से यह भी संकेत दिए गए कि सांविधानिक मूल्यों से समझौता किए बिना वर्तमान व्यवस्था में उत्तरजीविता लगभग असंभव है।
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राही ने अपने त्यागपत्र को तकनीकी त्यागपत्र की संज्ञा देते हुए लिखा है कि यह न तो स्वेच्छा से है और न ही चुनौतियों के भयवश, बल्कि यह उस कार्यशैली का परिणाम है, जो सेवा के आरंभिक चरण में ही समुचित कार्यदायित्व से वंचित किए जाने की स्थिति से पैदा हुई है। इसमें वेतन एवं सुविधाएं तो प्राप्त होती रहेंगी, लेकिन वास्तविक सेवा के अवसर सीमित रहेंगे। आईएएस की तुलना में उनकी पूर्व की सेवा में प्रतीकात्मक दंडात्मक तैनाती वाले पद अपेक्षाकृत कम सृजित किए गए हैं। इसलिए मेरा त्यागपत्र स्वीकार कर मुझे पूर्ववर्ती सेवा में भेजे जाने की अनुमति देने की कृपा करें।

समाज कल्याण अधिकारी रहते दिव्यांग हुए
आईएएस की सेवा में आने से पहले रिंकू सिंह जिला समाज कल्याण अधिकारी के पद पर तैनात थे। 26 मार्च 2009 में मुजफ्फरनगर में कार्यभार ग्रहण करने के चौथे महीने में भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने पर उन पर प्राणघातक हमला किया गया। इसके कारण वे स्थायी दिव्यांगता की श्रेणी में आए और इसी श्रेणी में उन्होंने आईएएस की परीक्षा पास की।

बिना काम के वेतन न देने का भी किया था अनुरोध

राही ने राजस्व परिषद में बिना कार्य के वेतन ग्रहण न करने का अनुरोध पत्र भी उच्चाधिकारियों को भेजा था। इसके बाद आवंटित सीमित कार्य के लिए भी उन्हें प्रोग्रामर उपलब्ध नहीं कराया गया। आय प्रमाणपत्र से संबंधित शासनादेशों में विरोधाभास और ओबीसी नॉन क्रीमीलेयर प्रमाणपत्र में सेवा वर्ग के स्पष्ट उल्लेख के अभाव जैसे आवश्यक सुधारों के संबंध में भी पत्रावलियां प्रारंभ नहीं की गईं।

आईएएस एसोसिएशन पर साथ न देने का आरोप
राही ने आईएएस एसोसिशन पर साथ न देने का आरोप भी लगाया है। उन्होंने आईएएस अधिकारियों के वाट्सएप ग्रुप पर मंगलवार को लिखा कि भारतीय प्रशासनिक सेवा संघ से अपने निष्कासन की प्रक्रिया क्या है, जबकि इस बीच उनकी यह प्रार्थना लंबित है कि उन्हें भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) से मुक्त होकर सामाजिक कल्याण विभाग में अपने पूर्व कनिष्ठ पद पर पुनः कार्यभार ग्रहण करने की अनुमति दी जाए। यह निवेदन संघ द्वारा मेरे जैसे कनिष्ठ अधिकारियों के नैतिक तथा कर्तव्यनिष्ठ चिंताओं के प्रति निरंतर प्रदर्शित उदासीनता के परिप्रेक्ष्य में किया जा रहा है। यह संस्थागत अंतरात्मा के क्रमिक क्षरण को दर्शाती है तथा उस संवैधानिक नैतिकता को कमजोर करती है, जिसे यह सेवा अपने आचरण और कार्य में धारण करने के लिए प्रतिबद्ध है।

पिता बोले- रिंकू ने कभी आदर्शों से समझौता नहीं किया
आईएएस रिंकू सिंह राही के इस्तीफे की खबर से परिजन स्तब्ध हैं। पिता सौदान सिंह राही ने कहा कि रिंकू ने सदैव ईमानदारी की राह चुनी। पिता ने बताया कि रिंकू को कई बार करोड़ों रुपयों के प्रलोभन दिए गए, लेकिन उन्होंने कभी अपने आदशों से समझौता नहीं किया।

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