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Lucknow News: कानपुर से श्रमायुक्त मुख्यालय हटाना दुर्भाग्यपूर्ण
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विचारमंच की गोष्ठी में बुद्धिजीवियों ने रखी बात
माई सिटी रिपोर्टर
लखनऊ। कानपुर कभी भारत का अत्यंत गौरवपूर्ण नगर था तथा उसे मैनचेस्टर माना जाता था। किन्तु पहले तो मजदूर आंदोलनों ने कानपुर का विनाश किया और अब अफसरों ने उसका महत्व कम करने की कमर कस ली है। यही कारण है कि भारी विरोध के बावजूद श्रमायुक्त-मुख्यालय को कानपुर से हटाकर लखनऊ लाने का उपक्रम किया जा रहा है। इस प्रकार पहले प्रयागराज के महत्व कम करने का षड्यंत्र किया गया और अब कानपुर का महत्व घटाने का दुष्प्रयास किया जा रहा है।
उक्त विचार बुद्धिजीवियों ने विचार मंच की ओर से वीरसावरकरनगर में आयोजित ‘श्रमायुक्त मुख्यालय कानपुर से हटाया जाना’ विषयक गोष्ठी में व्यक्त किए। मुख्य वक्ता पत्रकार शेखर पंडित ने कहाकि प्रदेश के अनेक महत्वपूर्ण कार्यालय प्रयागराज में स्थित थे। किन्तु बड़े अफसर चाहते हैं कि वे लखनऊ में रहें, ताकि उन्हें मुख्यमंत्री से निकटता बनाने का सुअवसर मिलता रहे। इसीलिए उन बड़े अफसरों ने अपने विभागों के शिविर कार्यालय बनाकर लखनऊ में रहने का रास्ता निकाल लिया। इस प्रकार धीरे-धीरे प्रयागराज को महत्वहीन किया जाने लगा। प्रयागराज के बाद अब कानपुर पर हमला बोला गया है और वहां स्थापित श्रमायुक्त-मुख्यालय को अब लखनऊ लाया जा रहा है। संगोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए पत्रकार श्याम कुमार ने कहाकि वीडियो-काॅन्फ्रेंसिंग के जरिए अब दूरस्थ जगहों से भी बड़ी आसानी से संपर्क किया जा सकता है, इसलिए प्रशासनिक सुविधा की बात कहकर विभागों के मुख्यालयों को राजधानी लखनऊ लाए जाने का तर्क महत्वहीन है। शासन व प्रशासन में वीडियो-काॅन्फ्रेंसिंग की प्रणाली का अधिकाधिक उपयोग होना चाहिए। इससे वाहनों के संचालन में फूंके जाने वाले पेट्रोल में बहुत बचत होगी। कानपुर के वरिष्ठ एडवोकेट विश्वनाथ प्रसाद ने कहाकि कानपुर में श्रमायुक्त-मुख्यालय दीर्घकाल से रहने के कारण अब वहां से मुख्यालय हटने पर कानपुर का महत्व तो कम होगा ही, वहां के कर्मचारियों को भी असीमित परेशानी झेलनी पड़ेगी। अतः उचित यही होगा कि कानपुर से श्रमायुक्त-मुख्यालय को लखनऊ लाने का प्रस्ताव पूरी तरह रद्द कर दिया जाए।
माई सिटी रिपोर्टर
लखनऊ। कानपुर कभी भारत का अत्यंत गौरवपूर्ण नगर था तथा उसे मैनचेस्टर माना जाता था। किन्तु पहले तो मजदूर आंदोलनों ने कानपुर का विनाश किया और अब अफसरों ने उसका महत्व कम करने की कमर कस ली है। यही कारण है कि भारी विरोध के बावजूद श्रमायुक्त-मुख्यालय को कानपुर से हटाकर लखनऊ लाने का उपक्रम किया जा रहा है। इस प्रकार पहले प्रयागराज के महत्व कम करने का षड्यंत्र किया गया और अब कानपुर का महत्व घटाने का दुष्प्रयास किया जा रहा है।
उक्त विचार बुद्धिजीवियों ने विचार मंच की ओर से वीरसावरकरनगर में आयोजित ‘श्रमायुक्त मुख्यालय कानपुर से हटाया जाना’ विषयक गोष्ठी में व्यक्त किए। मुख्य वक्ता पत्रकार शेखर पंडित ने कहाकि प्रदेश के अनेक महत्वपूर्ण कार्यालय प्रयागराज में स्थित थे। किन्तु बड़े अफसर चाहते हैं कि वे लखनऊ में रहें, ताकि उन्हें मुख्यमंत्री से निकटता बनाने का सुअवसर मिलता रहे। इसीलिए उन बड़े अफसरों ने अपने विभागों के शिविर कार्यालय बनाकर लखनऊ में रहने का रास्ता निकाल लिया। इस प्रकार धीरे-धीरे प्रयागराज को महत्वहीन किया जाने लगा। प्रयागराज के बाद अब कानपुर पर हमला बोला गया है और वहां स्थापित श्रमायुक्त-मुख्यालय को अब लखनऊ लाया जा रहा है। संगोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए पत्रकार श्याम कुमार ने कहाकि वीडियो-काॅन्फ्रेंसिंग के जरिए अब दूरस्थ जगहों से भी बड़ी आसानी से संपर्क किया जा सकता है, इसलिए प्रशासनिक सुविधा की बात कहकर विभागों के मुख्यालयों को राजधानी लखनऊ लाए जाने का तर्क महत्वहीन है। शासन व प्रशासन में वीडियो-काॅन्फ्रेंसिंग की प्रणाली का अधिकाधिक उपयोग होना चाहिए। इससे वाहनों के संचालन में फूंके जाने वाले पेट्रोल में बहुत बचत होगी। कानपुर के वरिष्ठ एडवोकेट विश्वनाथ प्रसाद ने कहाकि कानपुर में श्रमायुक्त-मुख्यालय दीर्घकाल से रहने के कारण अब वहां से मुख्यालय हटने पर कानपुर का महत्व तो कम होगा ही, वहां के कर्मचारियों को भी असीमित परेशानी झेलनी पड़ेगी। अतः उचित यही होगा कि कानपुर से श्रमायुक्त-मुख्यालय को लखनऊ लाने का प्रस्ताव पूरी तरह रद्द कर दिया जाए।
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