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केजीएमयू : अब एक क्लिक पर सामने होगा मरीज का रिकॉर्ड
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लखनऊ। केजीएमयू जल्द हॉस्पिटल इंफॉर्मेशन सिस्टम (एचआईएस) लागू करने जा रहा है। इससे मरीजों का रिकॉर्ड एक क्लिक पर सामने आ जाएगा। डॉक्टर का परचा, जांच रिपोर्ट, फार्मेसी का डाटा भी डिजिटल प्लेटफॉर्म पर रहेगा, जिससे गड़बड़ी की आशंका बेहद कम होगी। एचआईएस शुरू होने से इलाज से जुड़ी हर गतिविधि ऑनलाइन दर्ज होगी और सीधे मोबाइल पर सूचना पहुंचेगी।
वर्तमान में केजीएमयू में इलाज की व्यवस्था ऑनलाइन नहीं है। अब एचआईएस लागू होने से मरीजों को सुविधा मिलेगी और अस्पताल प्रशासन की निगरानी भी आसान होगी। प्रवक्ता डॉ. केके सिंह ने बताया कि अस्पताल की व्यवस्थाएं ऑनलाइन होने से कई समस्याएं दूर होंगी।
दवा घोटाले पर लगेगी रोक
बीते दिनों यूरोलॉजी विभाग से जुड़े दवा घोटाले में मृत मरीजों के नाम पर दवा और उपकरणों के इंडेंट जारी होने के आरोप लगे थे। एचआईएस में ऐसी व्यवस्था होगी कि मरीज के नाम पर किसी भी दवा या उपकरण की मांग होते ही उसके पंजीकृत मोबाइल नंबर पर सूचना पहुंच जाएगी। इससे मरीज को पता रहेगा कि उसके नाम पर क्या जारी हुआ है। यह व्यवस्था गड़बड़ी पर रोक लगाएगी।
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बाहर से दवा खरीदने की शिकायत होगी कम
केजीएमयू में मरीजों की शिकायत रहती है कि दवाएं उपलब्ध होने के बावजूद उन्हें बाहर से दवा खरीदनी पड़ती है। एचआईएस में अस्पताल की फार्मेसी का रियल टाइम स्टॉक ऑनलाइन रहेगा। डॉक्टरों को उपलब्ध दवाओं की जानकारी रहेगी और वे उसी आधार पर दवा लिख सकेंगे। फैकल्टी और कर्मचारियों को मिलने वाली निशुल्क दवा की सुविधा भी डिजिटल निगरानी के दायरे में आएगी।
वर्तमान में केजीएमयू में इलाज की व्यवस्था ऑनलाइन नहीं है। अब एचआईएस लागू होने से मरीजों को सुविधा मिलेगी और अस्पताल प्रशासन की निगरानी भी आसान होगी। प्रवक्ता डॉ. केके सिंह ने बताया कि अस्पताल की व्यवस्थाएं ऑनलाइन होने से कई समस्याएं दूर होंगी।
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दवा घोटाले पर लगेगी रोक
बीते दिनों यूरोलॉजी विभाग से जुड़े दवा घोटाले में मृत मरीजों के नाम पर दवा और उपकरणों के इंडेंट जारी होने के आरोप लगे थे। एचआईएस में ऐसी व्यवस्था होगी कि मरीज के नाम पर किसी भी दवा या उपकरण की मांग होते ही उसके पंजीकृत मोबाइल नंबर पर सूचना पहुंच जाएगी। इससे मरीज को पता रहेगा कि उसके नाम पर क्या जारी हुआ है। यह व्यवस्था गड़बड़ी पर रोक लगाएगी।
बाहर से दवा खरीदने की शिकायत होगी कम
केजीएमयू में मरीजों की शिकायत रहती है कि दवाएं उपलब्ध होने के बावजूद उन्हें बाहर से दवा खरीदनी पड़ती है। एचआईएस में अस्पताल की फार्मेसी का रियल टाइम स्टॉक ऑनलाइन रहेगा। डॉक्टरों को उपलब्ध दवाओं की जानकारी रहेगी और वे उसी आधार पर दवा लिख सकेंगे। फैकल्टी और कर्मचारियों को मिलने वाली निशुल्क दवा की सुविधा भी डिजिटल निगरानी के दायरे में आएगी।