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लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे: चार और जगहों पर धंसा, कथित धांधली पर PIL दाखिल; तकनीकी जांच में खुलेंगे राज

Tue, 11 Aug 2026 06:21 AM IST
रोहित मिश्र अभिषेक गुप्ता, अमर उजाला लखनऊ
अभिषेक गुप्ता, अमर उजाला लखनऊ Published by: रोहित मिश्र Updated Tue, 11 Aug 2026 06:21 AM IST
सार

Lucknow Kanpur Expressway: लखनऊ कानपुर एक्सप्रेसवे लगातार विवादों में है। एक के बाद एक जगह धंसने के बाद अब इस मामले में तकनीकी जांच की जाएगी। 

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Lucknow-Kanpur Expressway: Four more collapses, PIL filed over alleged irregularities; technical investigation
कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे लगाातर विवादों में है। - फोटो : अमर उजाला/संवाद न्यूज एजेंसी.

विस्तार

लखनऊ कानपुर एक्सप्रेसवे लगातार विवादों में है। अब तक करीब 65 से 70 जगहों पर सड़क धंसने के मामले सामने आ चुके हैं। बीते दिनों सड़क धंसने के बाद से इस एक्सप्रेसवे पर टोल खत्म कर दिया गया था। टोल खत्म होने के बाद वाहनों की संख्या में भी इजाफा आ गया था। अब इस मामले में हुई कथित गड़बड़ी की सीबीआई जांच के लिए जनहित याचिका सोमवार को हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ में दाखिल की गई है। 

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‘आईआईटी पेव’ तय करता है सड़क की मजबूती का मानक
 कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे के निर्माण में सवाल सिर्फ सामग्री की गुणवत्ता तक सीमित नहीं है, अब यह भी जांच होगी कि सड़क का डिजाइन जिन तकनीकी मानकों के आधार पर तैयार किया गया था, उसी अनुरूप काम हुआ है या नहीं। डामर वाली सड़कों के डिजाइन में भारतीय सड़क कांग्रेस (आईआरसी) के दिशा-निर्देशों के तहत आईआईटीपेव सॉफ्टवेयर से सड़क की परतों पर वाहनों के दबाव का विश्लेषण किया जाता है। इसमें देखा जाता है कि भारी वाहनों के भार से सड़क की विभिन्न परतों में कितना तनाव और विकृति पैदा होगी और मिट्टी में धंसाव का कितना खतरा है।
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आईआईटीपेव को आईआईटी खड़गपुर के परिवहन इंजीनियरिंग विशेषज्ञों ने विकसित किया है। इसका इस्तेमाल लचीली सड़क की परतों के विश्लेषण के लिए किया गया है। इस सॉफ्टवेयर से सड़क की परतों की मोटाई और उनके लोच संबंधी गुणों के साथ वाहन के पहिये का भार और दबाव जैसे आंकड़े दिए जाते हैं। सरल भाषा में समझें तो सड़क बनाने से पहले कंप्यूटर पर देखा जाता है कि भारी ट्रक और वाणिज्यिक वाहन लगातार गुजरने से परतें कितना दबाव सह पाएंगी।

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सॉफ्टवेयर में फीड होता है सड़क और ट्रैफिक का डाटा

Lucknow-Kanpur Expressway: Four more collapses, PIL filed over alleged irregularities; technical investigation
कानपुर-लखनऊ हाईवे

सड़क डिजाइन के दौरान सॉफ्टवेयर में कई तकनीकी आंकड़े दिए जाते हैं। इनमें अपेक्षित यातायात, भार, विभिन्न परतों की मोटाई और परतों की सामग्री के गुण शामिल होते हैं। इसके बाद कंप्यूटर मॉडल के जरिये सड़क की संरचना पर पड़ने वाले प्रभावों का आकलन किया जाता है। यानी डिजाइन स्तर पर यह सवाल पहले ही पूछा जाता है कि इतने भारी वाहनों के इतने वर्षों तक गुजरने पर परतें निर्धारित सीमा के भीतर रहेंगी या नहीं।

असली सवाल डिजाइन नहीं, निर्माण से जुड़ा
कानपुर एक्सप्रेसवे के मामले में महत्वपूर्ण पड़ताल यह होगी कि जिस डिजाइन के आधार पर सड़क को मजबूत माना गया था, क्या मौके पर उसी डिजाइन के मुताबिक निर्माण हुआ। डीपीआर और डिजाइन रिपोर्ट, आईआईटीपेव विश्लेषण, सड़क की वास्तविक परतों की मोटाई, इस्तेमाल सामग्री के परीक्षण परिणाम, मिट्टी की स्थिति, कॉम्पैक्शन रिकॉर्ड और निर्माण के दौरान गुणवत्ता नियंत्रण परीक्षणों का मिलान किया जा सकता है। यदि डिजाइन में निर्धारित मोटाई और सामग्री के अनुरूप निर्माण हुआ है, फिर भी सड़क प्रभावित हुई है तो इसके कारणों की पड़ताल अलग स्तर पर होगी।

लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेस वे निर्माण में कथित धांधली के खिलाफ पीआईएल दाखिल

Lucknow-Kanpur Expressway: Four more collapses, PIL filed over alleged irregularities; technical investigation
कानपुर-लखनऊ हाईवे

लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे निर्माण में कथित धांधली की न्यायिक या सीबीआई से जांच कराने के आग्रह वाली जनहित याचिका सोमवार को हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ में दाखिल की गई है। इस पर इसी सप्ताह सुनवाई संभावित है। अधिवक्ता मोतीलाल यादव ने बताया कि उन्होंने व्यक्तिगत रूप से यह पी आई एल दाखिल की है। याची ने इसमें लखनऊ - कानपुर एक्सप्रेस वे निर्माण में धांधली किए जाने के आरोप लगाए हैं। याची ने याचिका के साथ एक्सप्रेस वे मामले से संबंधित छपी खबरों को भी लगाया है। साथ ही याचिका में इस एक्सप्रेस वे पर लगाए गए टोल टैक्स को काफी अधिक बताकर व्यापक जनहित में इसे अन्य एक्सप्रेस के समान उचित दर पर निर्धारित करने की भी मांग की है।

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