सेहत की बात: पहली बार खून देकर आया चक्कर तो दोबारा रक्तदान से लोगों ने किया तौबा; KGMU की स्टडी में खुलासा
केजीएमयू के अध्ययन के अनुसार, पहली बार रक्तदान के बाद चक्कर आया तो लोगों ने रक्तदान से दूरी बना ली। 89 फीसदी लोगों ने दोबारा रक्तदान नहीं किया। वर्ष 2025 के दौरान 73 हजार से ज्यादा रक्तदाताओं पर यह अध्ययन किया गया है। बायोइंफॉर्मेशन में प्रकाशित हुआ है। आगे पढ़ें पूरी खबर...
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पहली बार रक्तदान के बाद चक्कर आना सामान्य बात है। इसके बावजूद 10 में से नौ रक्तदाता खून देने के लिए दोबारा नहीं आते हैं। किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) के अध्ययन में यह खुलासा हुआ है। इसे बायोइंफॉर्मेशन के ताजा अंक में स्थान दिया गया है।
केजीएमयू के रक्ताधान चिकित्सा विभाग में वर्ष 2025 में कुल 73,487 लोगों ने रक्तदान किया। इनमें से 264 लोगों को रक्तदान के बाद चक्कर और बेहोश आने की समस्या रही। बेहोश होने या चक्कर आने की प्रतिक्रिया दर 0.36 फीसदी रही। पुरुषों में यह दर 0.45 फीसदी और महिलाओं में 0.19 फीसदी थी। इस अध्ययन में डॉ. तूलिका चंद्रा, डॉ. ज्योति भारती और डॉ. मल्लिका अग्रवाल शामिल रहीं।
अध्ययन में पहली बार रक्तदान करने वालों में प्रतिक्रिया का खतरा 3.2 गुना अधिक मिला। इस कारण 60 रक्तदान पूरे नहीं हो सके। इनमें पहली बार रक्तदान करने वाले पुरुष प्रमुख थे। थोड़ी देर की परेशानी ने न सिर्फ उस समय का रक्तदान रोका, बल्कि रक्तदान की आगे की राह भी मुश्किल कर दी।
87 फीसदी मामले हल्के, छह फीसदी गंभीर
रक्तदान के दौरान हुई 264 प्रतिक्रियाओं में 87 फीसदी हल्की, सात फीसदी मध्यम और छह प्रतिशत गंभीर थीं। हल्की प्रतिक्रिया में चक्कर, पसीना, जी मिचलाना और चेहरा पीला पड़ना जैसे लक्षण रहे। मध्यम प्रतिक्रिया में कुछ देर बेहोशी, रक्तचाप गिरना या उल्टी और गंभीर मामलों में ऐंठन, लंबे समय तक बेहोशी या गिरने से चोट जैसी स्थिति शामिल थीं। कोई जानलेवा जटिलता नहीं मिली।
रक्तदान से पहले बरतें ये सावधानियां
- खाली पेट रक्तदान न करें।
- पर्याप्त पानी पिएं
- पहली बार रक्तदान कर रहे हैं तो घबराएं नहीं
- पर्याप्त नींद लें और थकान की स्थिति में रक्तदान से बचें।
- स्वास्थ्य संबंधी जानकारी सही-सही दें
- रक्तदान के दौरान चक्कर, पसीना आना, मितली या कमजोरी महसूस हो तो तुरंत बताएं। इसे छिपाकर रक्तदान पूरा करने की कोशिश न करें।
रक्तदान करने के फायदे
- रक्तदान के बाद शरीर खोई रक्त कोशिकाओं की पूर्ति करने के लिए नई रक्त कोशिकाएं बनाता है।
- आयरन की मात्रा नियंत्रित रखने में मदद मिलती है।
- रक्तदान से पहले संक्रमणों की जांच होती है।
- नियमित रक्तदान से हृदय रोगों का खतरा कम होता है।
- एक बार के रक्तदान से लगभग 650 कैलोरी बर्न होती है।
खतरा नहीं, पर काउंसिलिंग की जरूरत
रक्तदान से पहले सभी जरूरी सूचनाएं ली जाती हैं। पहली बार रक्तदान करने वालों में कुछ तनाव और चिंता की वजह से चक्कर या बेहोशी आ सकती है। इसका यह मतलब नहीं है कि वे खून देने के लिए स्वस्थ नहीं हैं। उनकी काउंसिलिंग करनी चाहिए। इससे रक्तदान बढ़ेगा। -प्रो. तूलिका चंद्रा, विभागाध्यक्ष ब्लड एंड ट्रांसफ्यूजन विभाग, केजीएमयू