Lucknow: पंजीकृत सिर्फ 226.... लखनऊ में चल रहे करीब चार हजार अवैध कोचिंग संस्थान, सुरक्षा के मानक पूरे नहीं
उच्च शिक्षा विभाग ने अपने यहां पंजीकृत कोचिंग संस्थानों की सूची तक वेबसाइट पर अपलोड नहीं की है। इससे विद्यार्थियों को पता नहीं चल पाता कि वे जिस कोचिंग में प्रवेश ले रहे हैं, वह पंजीकृत है या नहीं।
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कोचिंग संस्थान शुरू करने से पहले क्षेत्रीय उच्च शिक्षा कार्यालय में पंजीकरण कराना जरूरी होता है, लेकिन राजधानी में इस नियम का पालन नहीं हो रहा है। शहरभर में सिर्फ 226 पंजीकृत कोचिंग संस्थान हैं, जबकि अवैध कोचिंग सेंटरों की संख्या करीब चार हजार है। उच्च शिक्षा विभाग की लापरवाही से इनकी मंडी लगातार बढ़ती जा रही है।
सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि लापरवाह कोचिंग संचालक बच्चों की सुरक्षा को दरकिनार कर रहे हैं। अवैध कोचिंग संस्थानों पर कार्रवाई को लेकर विभाग के अधिकारियों का कहना है कि समय-समय पर निरीक्षण होता है। हालांकि, वे इसका कोई ब्योरा नहीं दे सके। राजधानी में अभी तक एक भी अवैध कोचिंग संस्थान पर उच्च शिक्षा विभाग ने कार्रवाई नहीं की है।
कोचिंग संस्थान में ये इंतजाम होने जरूरी
आने-जाने का मार्ग अलग-अलग होना चाहिए। आग से बचाव के इंतजाम होने चाहिए। पीवीसी पैनल का इस्तेमाल नहीं होना चाहिए। सीसीटीवी कैमरे की व्यवस्था की जानी चाहिए। दूसरी मंजिल पर सेंटर है तो आपातकालीन निकासी की व्यवस्था होनी चाहिए।
एक पते पर कई शाखाओं का पंजीकरण
उच्च शिक्षा विभाग ने अपने यहां पंजीकृत कोचिंग संस्थानों की सूची तक वेबसाइट पर अपलोड नहीं की है। इससे विद्यार्थियों को पता नहीं चल पाता कि वे जिस कोचिंग में प्रवेश ले रहे हैं, वह पंजीकृत है या नहीं। शहर में कई कोचिंग संस्थान ऐसे भी हैं, जिन्होंने पंजीकरण एक पते पर संचालित कोचिंग का ले रखा है, लेकिन कई शाखाएं चलाते हैं। उधर, कोचिंग अधिनियम कहता है कि हर संस्थान का पंजीकरण होना जरूरी है। कोचिंग संस्थानों की कक्षा में एक मीटर की दूरी पर एक विद्यार्थी के बैठने की व्यवस्था होने का मानक है। संस्थान के पास अग्निशमन विभाग से फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट (एनओसी) होना भी जरूरी है। हालांकि, कई कोचिंग संस्थान इन नियमों को नहीं मान रहे हैं।
मानक पूरे न होने पर पंजीकरण कराने से बचते हैं
क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी डॉ. अश्वनी बताते हैं कि यदि किसी कोचिंग संस्थान के मानक पूरे हैं तो उसका पंजीकरण बहुत आसान है। कोचिंग संस्थान के मालिक तब पंजीकरण कराने से पीछे हटते हैं, जब मानक पूरे नहीं होते। एक पंजीकरण पर दूसरी ब्रांच भी नहीं चलाई जा सकती है। फिर भी कुछ संचालक ऐसा करते हैं। अधिकारियों के मुताबिक यदि कोई घर में 10 से 15 बच्चे पढ़ाकर जीविका चला रहा है तो पंजीकरण की जरूरत नहीं है। हालांकि, यदि बच्चों की संख्या 25 से अधिक है तो पंजीकरण कराना जरूरी है।
चार टीमों ने शहर में कोचिंग संस्थानों की जांच
क्षेत्रीय उच्च शिक्षा निदेशक डॉ. अश्विनी कुमार का कहना है कि शुरू कर दी है। है। मानक पूरे न मिलने पर इनका पंजीकरण निरस्त किया जाएगा और अवैध कोचिंग सेंटर बंद कराए जाएंगे।
बंद मिले कई कोचिंग संस्थान
अवैध कोचिंग संस्थानों की जांच के लिए क्षेत्रीय उच्च शिक्षा विभाग की ओर से गठित चार टीमें बुधवार को मैदान में उतरीं। हालांकि, ज्यादातर इलाकों में कोचिंग सेंटर बंद मिलने से टीमों को वापस आना पड़ा। क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी का चार्ज संभाल रहीं प्रो. सुमन गुप्ता ने बताया कि हजरतगंज के आसपास, आलमबाग, अमीनाबाद, अलीगंज में टीमों ने पड़ताल की है। कई कोचिंग संस्थानों के नाम नोट किए गए हैं। टीम की निगरानी जारी रहेगी। कोचिंग खुलते ही कार्रवाई होगी। (संवाद)
इतना लगता है जुर्माना... अवैध कोचिंग चलाने पर उप्र कोचिंग
विनियमन अधिनियम और स्थानीय कानूनों के तहत 50 हजार से लेकर एक लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है। क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी डॉ. अश्वनी कुमार के मुताबिक पहली बार में 25 हजार, दूसरी बार में एक लाख रुपये जुर्माना और तीसरी बार में एफआईआर दर्ज कराने का नियम है। कोचिंग सेंटर शुरू करने के लिए स्थानीय स्तर पर ट्रेड लाइसेंस, शॉप्स एंड एस्टेब्लिशमेंट लाइसेंस और पंजीकरण प्रक्रिया का कुल शुल्क 2650 से 15,000 रुपये तक है। केंद्र सरकार के नए नियमों के अनुसार, कोचिंग को पंजीकृत कराना अनिवार्य है।